नवकार महामंत्र के 68 अक्षरों में अनंत शक्ति, विनय से आत्मविजय का संदेश
इंदौर, 20 अगस्त। नवकार महामंत्र आराधना के प्रथम दिवस पर आयोजित धर्मसभा में गच्छाधिपति श्री नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. ने नवकार महामंत्र की आध्यात्मिक महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके 68 अक्षरों में अनंत आध्यात्मिक शक्ति समाहित है। उन्होंने प्रथम अक्षर ‘णमो’ के गूढ़ अर्थ को समझाते हुए कहा कि विनय, सरलता और अहंकार का त्याग आत्मकल्याण की दिशा में पहला कदम है।
उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि आत्मा को निर्मल बनाने वाली महान आध्यात्मिक साधना है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ नवकार का स्मरण करने से व्यक्ति अपने भीतर छिपे विकारों को पहचानने और उन पर विजय प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
विनय और अहंकार त्याग आत्मकल्याण का आधार
धर्मसभा में नवकार महामंत्र के प्रथम दिवस की आराधना के दौरान गच्छाधिपति श्री नित्यसेनसूरीश्वरजी ने ‘णमो’ शब्द के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में विनय का विशेष महत्व है। अहंकार व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप से दूर करता है, जबकि विनय उसे आत्मचिंतन और आत्मकल्याण के मार्ग पर ले जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि धर्म आराधना तभी सार्थक होती है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में दिखाई दे। सरलता, विनम्रता, संयम और सद्भाव को जीवन का हिस्सा बनाकर ही आध्यात्मिक साधना को सार्थक किया जा सकता है।
नवकार आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा की साधना
परम पूज्य विद्वद्रत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि नवकार महामंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, विनय और कर्मनिर्जरा की दिव्य साधना है। उन्होंने कहा कि नवकार की आराधना व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों से अधिक अपने भीतर झांकने की प्रेरणा देती है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने अष्टापद तीर्थ की भावयात्रा कराते हुए भगवान आदिनाथ, भरत चक्रवर्ती और गौतम स्वामी से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने तीर्थ निर्माण, आराधना और गुरु-कृपा की महिमा को समझाते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर अपने दुखों और परेशानियों के लिए बाहरी परिस्थितियों को जिम्मेदार मानता है, जबकि वास्तविक शत्रु उसके भीतर ही मौजूद होते हैं। क्रोध, मान, माया, लोभ, राग-द्वेष और अहंकार जैसे विकार आत्मिक उन्नति में बाधा बनते हैं। नवकार महामंत्र की आराधना इन आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।

प्रमुख जैन तीर्थों की महिमा का स्मरण
प्रवचन के दौरान मालवा क्षेत्र सहित विभिन्न प्रमुख जैन तीर्थों की आध्यात्मिक महिमा का भी स्मरण किया गया। मालवा, रिंगणोद, नवकार पार्श्वनाथ, मोहनखेड़ा, हत्थुंडी, तालनपुर और नांदियाजी जैसे तीर्थों से जुड़े धार्मिक महत्व और परंपराओं पर प्रकाश डाला गया।
रिंगणोद में पुण्यसम्राट के ऐतिहासिक चातुर्मास का उल्लेख करते हुए वर्तमान में साध्वी श्री विज्ञानलताश्रीजी म.सा. की निश्रा में चल रही नवकार आराधना की जानकारी भी श्रद्धालुओं को दी गई। संतों ने कहा कि तीर्थ और साधु-संतों का सान्निध्य मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।
तप आराधना में साधक कर रहे आत्मसंयम
धर्मसभा के साथ विभिन्न तप आराधनाएं भी जारी हैं। सिद्धि तप के 54 तपस्वी अपनी साधना में लीन हैं। वहीं गुरुराज द्विशताब्दी तप आराधना के अंतर्गत 36 भाई-बहनों ने पारणा किया।
विशेष तपस्या करने वाले साधकों में चंदनबालाजी बडेरा 32 उपवास, जयंतीलालजी वेद 23 उपवास, साध्वी बालसाध्वी राजर्षिलताश्रीजी 22 उपवास तथा पूर्वी मुथा 19 उपवास की तपस्या कर रहे हैं।
धर्मसभा में तपस्वियों की साधना की अनुमोदना करते हुए संतों ने कहा कि तप केवल शारीरिक उपवास नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि की प्रक्रिया भी है। तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना और आत्मसंयम का अभ्यास सीखता है।
आरती और नवकार आराधना का लिया लाभ
इस अवसर पर दादा गुरुदेव एवं पुण्यसम्राट की आरती का लाभ सुनीलजी राजमलजी कापड़िया परिवार ने लिया। वहीं नवकार आराधना का लाभ रांका परिवार, इंदौर ने प्राप्त किया।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान नवकार महामंत्र की आराधना, धार्मिक वातावरण और संतों के प्रवचनों से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा।
कार्यक्रम का संचालन महेंद्र बागवाला ने किया। धनराज संघवी ने आभार व्यक्त किया, जबकि आयोजन से संबंधित आवश्यक सूचनाएं नीरज सुराणा ने दीं

कल कुमारपाल महाराज के परिवार का भव्य प्रवेश
धार्मिक आयोजन की आगामी कड़ी में शुक्रवार को कुमारपाल महाराज के परिवार का विशेष प्रवेश होगा। जानकारी के अनुसार परिवार प्रातः 9:09:09 बजे केशरी वाटिका से प्रवचन मंडप की ओर गाजे-बाजे के साथ प्रवेश करेगा।
इस आयोजन के लाभार्थी सुरेशजी मदनलालजी अक्षयजी मेहता, देसाईवाले रहेंगे। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और बड़ी संख्या में धर्मावलंबियों के शामिल होने की संभावना है।
धर्मसभा में संतों ने श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र के नियमित स्मरण के साथ जीवन में विनय, संयम, करुणा और आत्मचिंतन को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बाहरी उपलब्धियों के साथ मनुष्य को अपने भीतर की शुद्धि पर भी ध्यान देना चाहिए। यही साधना उसे वास्तविक शांति और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।
