मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने इंदौर के दलाल बाग में धर्मसभा के दौरान ढंग का जीवन जीने, शाकाहार अपनाने, नशा छोड़ने, गुरु से सत्य बोलने और शुद्ध आचरण के महत्वपूर्ण सूत्र दिए।
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने दिए ढंग का जीवन जीने के 7 महत्वपूर्ण सूत्र, नशामुक्ति और शुद्ध आचरण का दिया प्रभावशाली संदेश
इंदौर।
रिपोर्टर – राजेश जैन दद्दू
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने गुरुवार को इंदौर के दलाल बाग में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रद्धालुओं को ढोंग का नहीं, बल्कि ढंग का जीवन जीने के लिए कई प्रेरणास्पद और महत्वपूर्ण सूत्र दिए। श्रमण संस्कृति के महाश्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में मोक्ष मार्ग, शुद्धता, गुरु के प्रति सत्यता, आत्मा-परमात्मा, विवाह संस्कार, शाकाहार और नशामुक्त जीवन सहित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म को केवल दिखावे तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि आचरण में उतारना चाहिए। जीवन में सत्य, शुद्धता, संयम और सदाचार का विशेष महत्व है।
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज बोले—मोक्ष चाहिए तो संसार मार्ग का त्याग करें
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि मोक्ष चाहिए तो संसार मार्ग का त्याग करें। मनुष्य को यदि आध्यात्मिक उन्नति करनी है तो उसे सांसारिक मोह और आसक्ति से ऊपर उठने का प्रयास करना चाहिए।उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए धर्म को जीवन के आचरण से जोड़ने का संदेश दिया।
अशुद्धता को शुद्धता का चोला मत पहनाओ
मुनि श्री ने कहा कि अशुद्धता को शुद्धता का चोला मत पहनाओ। अशुद्धि में धर्म क्रिया करना और साधु को आहार देना पाप है।उन्होंने कहा कि पाप बुरा है, लेकिन पाप पर धर्म की सील लगा देना उससे भी ज्यादा बुरा पाप है। धर्म के मार्ग पर चलते समय व्यक्ति को अपने आचरण और भावों के प्रति सजग रहना चाहिए।मुनि श्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि धर्म के नाम पर अशुद्ध आचरण को उचित ठहराने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
गुरु से अपनी बुराई कभी मत छिपाना
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने गुरु और शिष्य के संबंध पर महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि गुरु से अपनी बुराई कभी नहीं छिपानी चाहिए।उन्होंने कहा कि पाप या अपराध होने पर गुरु के पास प्रायश्चित लेने जाना चाहिए, लेकिन अपने द्वारा हुए अपराध, पाप और अशुद्धि पर धर्म और सत्यता की सील लगवाने के लिए गुरु के पास नहीं जाना चाहिए।उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्ममंथन और अपनी गलतियों को स्वीकार करने की प्रेरणा दी।
आत्मा और परमात्मा दुनिया में सबसे बड़े गवाह
मुनि श्री ने कहा कि आत्मा और परमात्मा दुनिया में सबसे बड़े गवाह हैं, इनसे कोई चीज छिपती नहीं है।उन्होंने कहा कि व्यक्ति भले ही अपनी किसी गलती या कार्य को दुनिया से छिपाने का प्रयास करे, लेकिन अपनी आत्मा और परमात्मा से कुछ भी छिपाया नहीं जा सकता। इसलिए व्यक्ति को ऐसा जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए जिसमें उसे अपने आचरण को लेकर स्वयं से कुछ छिपाना न पड़े।
विवाह को लेकर युवक-युवतियों को दिया संदेश
धर्मसभा के दौरान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने विवाह और पारिवारिक संस्कारों को लेकर भी अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब उसकी संतान अपनी ही जाति में शादी करे। इसलिए प्रत्येक युवक-युवती अपने माता-पिता की खुशी के लिए अपनी ही जाति में विवाह करने का संकल्प लें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।मुनि श्री ने परिवार और समाज में संस्कारों को बनाए रखने पर जोर दिया।
शाकाहारी बनें और मांसाहार का त्याग करें
मुनि श्री ने धर्मसभा में शाकाहार अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को शाकाहारी बनना चाहिए और मांसाहार का त्याग करना चाहिए।उन्होंने जीव दया और अहिंसा की भावना को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति का खान-पान भी उसके जीवन और विचारों पर प्रभाव डालता है, इसलिए शुद्ध एवं सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए।
नशे का त्याग कर व्यसनमुक्त जीवन जिएं
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने नशामुक्ति पर विशेष जोर देते हुए प्रत्येक व्यक्ति से हर तरह के नशे का त्याग करने और व्यसनमुक्त जीवन जीने का संकल्प लेने की अपील की।उन्होंने संदेश दिया—“शराब जीवन को करे बर्बाद, इस सूत्र को याद रखें।”मुनि श्री ने कहा कि शास्त्र में भी शराब के स्वाद को कुत्ते के मूत्र के समान बताया गया है। उन्होंने सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए शराब, गांजा, भांग, गुटखा और तंबाकू आदि का बहिष्कार करने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ परिवार और समाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए युवाओं सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को व्यसनों से दूर रहकर स्वस्थ और संस्कारित जीवन अपनाना चाहिए।
सोशल ग्रुप फेडरेशन के सदस्यों ने श्रीफल समर्पित कर लिया आशीर्वाद
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के अध्यक्ष मनोहर झांझरी एवं शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल के नेतृत्व में फेडरेशन के अमित कासलीवाल, सुशील पांड्या, राकेश विनायका, प्रदीप चौधरी, भूपेंद्र जैन, ऋषभ जैन, संजय पापड़ीवाल, आशीष जैन, विपुल बांझल, पार्षद राजीव जैन, भूपेंद्र जैन, आलोक और आकाश जैन कोल आदि सदस्यों ने श्रीफल समर्पित कर मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर अमित कासलीवाल ने मुनि श्री को सोशल ग्रुप एवं फेडरेशन की स्थापना के उद्देश्य और उसकी गतिविधियों की जानकारी दी।उन्होंने पर्युषण पर्व के अवसर पर लगने वाले धर्म संस्कार शिविर में ग्रुप के सदस्यों की ओर से “नाम के लिए नहीं, काम के लिए” हर तरह का सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की और सहयोग का आश्वासन दिया।धर्मसभा का संचालन अनुराग जैन ने किया।
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के प्रवचन का प्रमुख संदेश
मुनि श्री के प्रवचन का मुख्य संदेश जीवन में दिखावे की जगह वास्तविक शुद्धता और सदाचार अपनाने का रहा। उन्होंने श्रद्धालुओं को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने, गलतियों को स्वीकार करने, गुरु के सामने सत्य बोलने, शाकाहार अपनाने और शराब, गांजा, भांग, गुटखा व तंबाकू जैसे व्यसनों का त्याग करने की प्रेरणा दी।धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के प्रवचन का धर्मलाभ लिया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
