ओलंपियन अंकित शर्मा पर उम्र में हेराफेरी का आरोप, मुरैना में FIR; ससुर की शिकायत के बाद बढ़ीं मुश्किलें
पांच साल उम्र कम दिखाकर जूनियर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का आरोप, परिवार ने आरोपों को बताया विवाद से प्रेरित; रियो ओलंपिक में भारत का कर चुके हैं प्रतिनिधित्व
मुरैना। भारतीय ओलंपियन और लंबी कूद के खिलाड़ी अंकित शर्मा एक कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े के मामले में विवादों में घिर गए हैं। मुरैना कोतवाली पुलिस ने उनके खिलाफ शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। आरोप है कि अंकित शर्मा ने अपनी वास्तविक उम्र से करीब पांच वर्ष कम उम्र दर्शाने के लिए कथित रूप से दस्तावेजों में जन्मतिथि बदलवाई और इसके आधार पर जूनियर स्तर की कई एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। हालांकि, अंकित शर्मा के परिवार की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया गया है कि पारिवारिक विवाद के चलते उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद अंकित शर्मा की खेल उपलब्धियों और उनके शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। अंकित शर्मा 2016 के रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित विक्रम पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। खेल उपलब्धियों के आधार पर उन्हें आयकर विभाग में नौकरी भी मिली थी।
मुरैना कोतवाली में दर्ज हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, मुरैना कोतवाली थाना पुलिस ने प्राप्त शिकायत और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर अंकित शर्मा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत में उनकी जन्मतिथि और शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामले में शिकायत अंकित शर्मा के ससुर डॉ. राजकुमार तिवारी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस को कथित तौर पर कई दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। अब पुलिस इन दस्तावेजों और आरोपों की जांच कर रही है।
आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में फिलहाल लगाए गए दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वास्तविक और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जन्मतिथि को लेकर विवाद
शिकायत में दावा किया गया है कि अंकित शर्मा की वास्तविक जन्मतिथि 1 अगस्त 1987 है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के पिनाहट क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा के दौरान भी इसी जन्मतिथि का इस्तेमाल किया गया था।
इसके बाद कथित रूप से मध्य प्रदेश के मुरैना में शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कराते समय जन्मतिथि बदलकर 20 जुलाई 1992 दर्शाई गई। इस तरह दोनों तारीखों में लगभग पांच साल का अंतर बताया जा रहा है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अंकित ने कथित दस्तावेजों के आधार पर मुरैना के शासकीय ज्योति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गणेशपुरा में कक्षा आठवीं में प्रवेश लिया। इसके बाद मुरैना और भोपाल के शिक्षण संस्थानों से आगे की पढ़ाई पूरी करने की बात कही गई है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उम्र में कथित बदलाव के कारण अंकित शर्मा को जूनियर वर्ग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर मिला। आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक और पुरस्कार हासिल किए।
मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि अंकित शर्मा ने अपने खेल करियर के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व किया और विभिन्न स्तरों पर पुरस्कार राशि हासिल की।
हालांकि इन आरोपों का अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और संबंधित खेल एवं शैक्षणिक संस्थाओं के रिकॉर्ड के सत्यापन पर निर्भर करेगा।
2016 रियो ओलंपिक में किया था भारत का प्रतिनिधित्व
अंकित शर्मा भारतीय एथलेटिक्स में लंबी कूद के चर्चित खिलाड़ियों में रहे हैं। जून 2016 में कजाकिस्तान में आयोजित एक प्रतियोगिता में उन्होंने 8.19 मीटर की लंबी कूद लगाकर शानदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें 2016 के रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
उनका नाम लंबे समय तक देश के प्रमुख लॉन्ग जंप खिलाड़ियों में शामिल रहा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रदर्शन के कारण उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान भी मिले।
विक्रम पुरस्कार से भी हो चुके हैं सम्मानित
अंकित शर्मा को मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान विक्रम पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उनके प्रदर्शन के लिए अन्य राज्यों से भी पुरस्कार मिलने की बात सामने आई है।
खेल उपलब्धियों के आधार पर अंकित शर्मा को आयकर विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति मिली। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में उनकी पदस्थापना चेन्नई में बताई जा रही है।
इसी कारण कथित उम्र संबंधी विवाद केवल खेल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। जांच में यदि दस्तावेजों से जुड़े आरोप साबित होते हैं तो आगे संबंधित संस्थाओं के स्तर पर भी मामले की समीक्षा हो सकती है। हालांकि इस संबंध में किसी विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने आने तक कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
ससुर की शिकायत से सामने आया मामला
मामले में शिकायतकर्ता डॉ. राजकुमार तिवारी ने अंकित शर्मा पर कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी और अंकित शर्मा की शादी दिसंबर 2020 में ग्वालियर में हुई थी। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद पैदा हो गया।
शिकायतकर्ता ने वैवाहिक जीवन और आर्थिक लेन-देन को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। इनमें कथित घरेलू विवाद और पैसों के लेन-देन से जुड़े दावे भी शामिल हैं। ये आरोप अलग पारिवारिक विवाद से संबंधित हैं और संबंधित कानूनी मामलों के आधार पर ही इनकी स्थिति स्पष्ट होगी।
परिवार ने आरोपों को बताया बदनाम करने की कोशिश
दूसरी ओर अंकित शर्मा के परिवार ने आरोपों का विरोध किया है। उनके बड़े भाई का कहना है कि अंकित शर्मा का वैवाहिक विवाद और तलाक का मामला चल रहा है तथा इसी कारण ससुराल पक्ष की ओर से उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
परिवार का दावा है कि उन्होंने जुलाई में मुरैना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने संबंधित दस्तावेज पेश किए थे। उनका यह भी कहना है कि इससे पहले ग्वालियर में भी इसी तरह शिकायत करने का प्रयास किया गया था और उस समय भी परिवार ने अपना पक्ष दस्तावेजों के साथ रखा था।
इस तरह मामले में शिकायतकर्ता और अंकित शर्मा के परिवार की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
ओलंपियन खिलाड़ी से जुड़ा मामला होने के कारण इस प्रकरण ने खेल जगत में भी ध्यान खींचा है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अंकित शर्मा की वास्तविक जन्मतिथि से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड क्या बताते हैं और विभिन्न शैक्षणिक एवं खेल संस्थाओं में दर्ज दस्तावेजों में कोई अंतर है या नहीं।
पुलिस को जांच के दौरान स्कूल रिकॉर्ड, जन्मतिथि संबंधी दस्तावेज, प्रतियोगिताओं में जमा किए गए प्रमाण-पत्र और अन्य संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन करना पड़ सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।
फिलहाल अंकित शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज होने की खबर के साथ उनके परिवार का पक्ष भी सामने आया है। इसलिए आरोपों को सिद्ध तथ्य मानने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।
