नव दिवसीय नवकार महामंत्र आराधना का हुआ भव्य शुभारंभ
लाभार्थी नागदा निवासी गांग परिवार ने लिया धर्म लाभ
महिदपुर रोड। नगर में नव दिवसीय श्री नवकार महामंत्र आराधना का भव्य शुभारंभ विधि-विधान एवं धार्मिक उत्साह के साथ हुआ। श्री संघ, साधु-साध्वी भगवंतों और आराधकों की उपस्थिति में आयोजित इस आराधना में बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त किया। आराधना के दौरान 30 आराधक श्रद्धा और भक्ति के साथ नवकार महामंत्र की साधना कर रहे हैं।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने नवकार महामंत्र की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवकार महामंत्र में 14 पूर्वों का सार समाया हुआ है। जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ अपने जीवन में 9 लाख संपूर्ण नवकार महामंत्र का जाप करता है, वह दुर्गति से बचता है। उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र के प्रभाव से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।
साध्वीश्री ने कहा कि नवकार महामंत्र का नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक स्मरण करने वाला व्यक्ति संसार रूपी सागर को पार करने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह महामंत्र आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र के नियमित जाप और उसके भावार्थ को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि नवकार महामंत्र के नौ पदों में 68 अक्षर हैं और इन 68 अक्षरों को 68 तीर्थों की उपमा दी गई है। जिस प्रकार 68 तीर्थों की यात्रा से पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है, उसी प्रकार श्रद्धा और भावपूर्वक नवकार महामंत्र के एक-एक जाप का भी विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने नवकार महामंत्र के अक्षरों के भावार्थ को समझाते हुए कहा कि इसके प्रत्येक अक्षर में गहन आध्यात्मिक संदेश निहित है। उन्होंने ‘न’ अक्षर के माध्यम से नम्रता का संदेश बताया, जबकि ‘अ’ अक्षर अहिंसा के पालन की प्रेरणा देता है। ‘र’ अक्षर दर्शन, ज्ञान और चरित्र की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ने का संदेश देता है। वहीं ‘ह’ अक्षर जीवन में हिंसात्मक कार्यों से बचने की प्रेरणा प्रदान करता है।
‘नमो अरिहंताणं’ का अर्थ समझाते हुए साध्वीश्री ने कहा कि नवकार महामंत्र किसी एक व्यक्ति या संप्रदाय विशेष की स्तुति नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं को नमन करने का महामंत्र है जिन्होंने आत्मकल्याण के उच्चतम मार्ग को प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि महामंत्र के प्रत्येक शब्द में अनंत आध्यात्मिक शक्ति विद्यमान है और श्रद्धापूर्वक इसका जाप व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, शांति और संयम की भावना को मजबूत करता है।
महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर में आज से अत्यंत प्रभावशाली श्री नवकार महामंत्र आराधना का विधि-विधान के साथ शुभारंभ हुआ। आराधना के दौरान 30 आराधक नियमित रूप से साधना कर अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

गांग परिवार ने लिया संपूर्ण आराधना का लाभ
आराधना के शुभारंभ अवसर पर साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ सुभाषचंद्र एवं गौरव कुमार भंडारी परिवार द्वारा लिया गया। वहीं संपूर्ण नवकार महामंत्र आराधना का स्वर्णिम लाभ स्वर्गीय कुंदनमल, स्वर्गीय शीला बाई, अमिष कुमार, श्रीमती अंकिता एवं आयांश गांग परिवार, नागदा जंक्शन द्वारा लिया गया।
लाभार्थी परिवारों ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। जैन श्री संघ चातुर्मास समिति द्वारा लाभार्थी परिवार की खूब-खूब अनुमोदना की गई तथा उनके प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त की गईं।
नवकार महामंत्र आराधना के शुभारंभ अवसर पर सकल जैन श्री संघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
आयोजन समिति ने बताया कि नव दिवसीय आराधना के दौरान श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र की महिमा, उसके आध्यात्मिक महत्व और जीवन में उसके नियमित स्मरण से होने वाले लाभों के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। आराधकों द्वारा श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक साधना की जा रही है।
धर्मसभा में साध्वीश्री ने समाजजनों से आह्वान किया कि नवकार महामंत्र को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए उसके संदेश को अपने व्यवहार और जीवन में उतारने का प्रयास करें। नम्रता, अहिंसा, संयम, सदाचार और आत्मचिंतन जैसे गुणों को अपनाकर ही महामंत्र की वास्तविक भावना को जीवन में साकार किया जा सकता है।
नव दिवसीय नवकार महामंत्र आराधना के शुभारंभ से महिदपुर रोड का जैन समाज धार्मिक एवं आध्यात्मिक उत्साह से भर उठा है। सकल जैन श्री संघ की सहभागिता और आराधकों की श्रद्धा ने आयोजन को विशेष बना दिया।
