पहली बार मनाया गया 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण-मोक्ष महोत्सव
श्री भाईंदर श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ का विशेष आयोजन
भायंदर। भायंदर के प्रथम श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में संघ के इतिहास में पहली बार 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष एवं निर्वाण कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से निर्वाण-मोक्ष लड्डू महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
यह आयोजन श्री भाईंदर श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ की ओर से किया गया। कार्यक्रम को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा एवं आस्था प्रकट की।
कामठीया निकेतन से मंदिर तक निकली भव्य यात्रा
श्रावण सुदी 8, गुरुवार 20 अगस्त को सुबह करीब 7 बजे निर्वाण-मोक्ष लड्डू को कामठीया निकेतन से श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ मंदिर तक ले जाया गया। लाभार्थी परिवार के सदस्यों के साथ सकल संघ के श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल हुए।
लड्डू को मंदिर तक वाजते-गाजते, नाचते-गाते और धार्मिक उत्साह के साथ लाया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में आयोजित इस यात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक भावनाओं के साथ इस आयोजन में भाग लिया और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे लगाए। मंदिर पहुंचने के बाद निर्वाण लड्डू को विधि-विधानपूर्वक भगवान के चरणों में अर्पित किया गया।
पहली बार हुआ ऐसा आयोजन
श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर और संघ के इतिहास में पहली बार भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष-निर्वाण कल्याणक का यह विशेष आयोजन किया गया। इसी कारण समाज के लिए यह महोत्सव विशेष महत्व रखता है।
आयोजकों और समाजजनों के बीच इस आयोजन को लेकर उत्साह रहा। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप निर्वाण लड्डू अर्पित करने के साथ भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक का स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेश को याद किया। जैन धर्म में तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक को आत्मकल्याण और आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
साध्वी सोम्यकला श्रीजी म.सा. की निश्रा में आयोजन
संपूर्ण महोत्सव पंजाब केसरी आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वरजी म.सा. समुदाय एवं गच्छाधिपति धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्तीनी साध्वी सोम्यकला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में संपन्न हुआ।
धार्मिक आयोजन के दौरान साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक का महत्व समझाया। उन्होंने भगवान के जीवन, साधना और मोक्ष प्राप्ति से जुड़े आध्यात्मिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और उन्होंने साध्वीश्री के प्रवचन को श्रद्धापूर्वक सुना।
मोक्ष कल्याणक का बताया महत्व
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी सोम्यकला श्रीजी म.सा. ने भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं। उनके जीवन में अहिंसा, संयम, तप, त्याग और आत्मशुद्धि के आदर्श दिखाई देते हैं। उनका मोक्ष कल्याणक श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं से धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ भगवान के संदेशों को अपने व्यवहार और जीवन में उतारने का आह्वान किया।
निर्वाण-मोक्ष लड्डू के लाभार्थी परिवार
इस अवसर पर परमात्मा को निर्वाण-मोक्ष लड्डू एवं संघ प्रभावना लड्डू अर्पित करने का लाभ सुशीलाबाई पारसमलजी सोनीगरा (डायलाना) परिवार को प्राप्त हुआ।
लाभार्थी परिवार ने धार्मिक भावना के साथ इस आयोजन में सहभागिता की। समाजजनों ने भी परिवार के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं और धार्मिक आयोजन में उनके योगदान की सराहना की।
निर्वाण लड्डू अर्पित करने की परंपरा जैन समाज में भगवान के मोक्ष कल्याणक के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना से जुड़ी है। इस आयोजन में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त की।
मंदिर परिसर में रहा भक्तिमय माहौल
निर्वाण-मोक्ष महोत्सव के दौरान श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। धार्मिक यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में समाजजनों ने भाग लिया।
भक्ति, जयकारों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। समाज के लोगों ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना करते हुए अपने जीवन में धर्म, संयम और सदाचार को अपनाने की भावना व्यक्त की।
समाजजनों की रही बड़ी सहभागिता
इस विशेष अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अशोक मेहता, संजय राठौड़, रमेश बंबोरी, महावीर दुग्गड़, राकेश पुनमिया, मेहुल जैन और राहुल जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता करते हुए भगवान पार्श्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। आयोजन के दौरान समाज के लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
धार्मिक परंपरा और आस्था का अनूठा संगम
श्री भाईंदर श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ द्वारा आयोजित यह महोत्सव धार्मिक परंपरा, सामूहिक सहभागिता और आस्था का अनूठा उदाहरण रहा। संघ के इतिहास में पहली बार भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण-मोक्ष कल्याणक का आयोजन होने के कारण समाजजनों के लिए इसका विशेष महत्व रहा।
कामठीया निकेतन से मंदिर तक निकाली गई धार्मिक यात्रा से लेकर
