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Nagda में भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं मुकुट सप्तमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

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Published On: 20 August 2026
Nagda

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नागदा में भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं मुकुट सप्तमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

Nagda , 19 अगस्त 2026। श्रावण शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर नागदा में दिगम्बर जैन समाज द्वारा भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक एवं मुकुट सप्तमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, नागदा जंक्शन में दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

अभिषेक और शांतिधारा से हुई पर्व की शुरुआत

धार्मिक आयोजन की शुरुआत प्रातःकाल भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक पूजन एवं धार्मिक विधान में भाग लिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक निर्वाण लाड्डू अर्पित किया गया। मूलनायक भगवान की शांतिधारा के लाभार्थी श्री एस.पी. जैन परिवार एवं श्री पराग जैन परिवार रहे। वहीं निर्वाण लाड्डू अर्पित करने का लाभ श्री नितिन जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंदिर परिसर भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति और जयकारों से गूंजता रहा। समाज के लोगों ने धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।

भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक का महत्व

भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। दिगम्बर जैन परंपरा के अनुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक की पावन तिथि है।

जैन मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ ने श्री सम्मेद शिखरजी के स्वर्णभद्र कूट से मोक्ष प्राप्त कर सिद्ध पद हासिल किया था। जैन दर्शन में मोक्ष कल्याणक आत्मा की परम उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है।

भगवान पार्श्वनाथ का जीवन अहिंसा, क्षमा, संयम, तप, त्याग और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। उनके जीवन और उपदेशों से प्रेरणा लेकर श्रद्धालु आत्मकल्याण तथा आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

मुकुट सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने की आराधना

मुकुट सप्तमी जैन समाज के महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में शामिल है। इस अवसर पर श्रद्धालु उपवास, पूजन, अभिषेक, धार्मिक विधान और भक्ति के माध्यम से आत्मकल्याण की भावना को मजबूत करते हैं।

महोत्सव के दौरान उपवास करने वाली बालिकाओं ने भी मंदिर पहुंचकर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की। समाज की कु. अनोशी अंकुर जैन एवं मीनल मुकेश जैन ने निर्जरा उपवास कर अपनी आराधना पूर्ण की।

धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल श्रद्धालुओं ने संयम, त्याग और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा।

सम्मेद शिखरजी का विशेष धार्मिक महत्व

जैन धर्म में श्री सम्मेद शिखरजी को प्रमुख सिद्धक्षेत्रों में माना जाता है। जैन परंपरा के अनुसार 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र भूमि से मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण सम्मेद शिखरजी अनंत सिद्धात्माओं की मोक्षभूमि के रूप में जैन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सम्मेद शिखरजी पर्वत पर स्थित स्वर्णभद्र कूट भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसलिए भगवान पार्श्वनाथ की मोक्ष सप्तमी के अवसर पर सम्मेद शिखरजी का स्मरण और वंदन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

नागदा में आयोजित महोत्सव के दौरान भी श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक को स्मरण करते हुए उनकी आराधना की और जैन धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की भावना व्यक्त की।

शाम को दीपों से जगमगा उठा मंदिर परिसर

दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बाद शाम के समय मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। समाजजनों से अपने घरों से दीप लेकर आने का आह्वान किया गया था। श्रद्धालु बड़ी संख्या में दीप लेकर मंदिर पहुंचे।

असंख्य दीपों से मंदिर परिसर जगमगा उठा। दीपों की रोशनी, भगवान पार्श्वनाथ की आराधना और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय नजर आया।

श्रद्धालुओं ने महाआरती में उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मंदिर परिसर का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

समाजजनों ने उत्साह से लिया हिस्सा

महोत्सव के दौरान दिगम्बर जैन समाज के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। धार्मिक कार्यक्रमों में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालुओं के साथ बच्चों ने भी भाग लिया।

समाजजनों ने पूजन, अभिषेक, विधान, निर्वाण लाड्डू अर्पण और महाआरती में सहभागिता कर भगवान पार्श्वनाथ के प्रति अपनी भक्ति प्रकट की। आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा गया।

आत्मकल्याण का संदेश देता है मोक्ष कल्याणक

भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक जैन समाज के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मकल्याण का अवसर भी है। यह पर्व मनुष्य को अहिंसा, संयम, तप, त्याग और क्षमा जैसे गुणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

मोक्ष की अवधारणा जैन दर्शन में आत्मा की सर्वोच्च अवस्था मानी जाती है। भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से प्रेरणा लेते हुए श्रद्धालु सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

नागदा में आयोजित इस महोत्सव ने भी समाजजनों को धार्मिक आस्था के साथ आत्मकल्याण और मानव जीवन में सदाचार के महत्व का संदेश दिया।

भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ महोत्सव

श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर आयोजित भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक एवं मुकुट सप्तमी महोत्सव में सुबह से शाम तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। अभिषेक, शांतिधारा और पूजन से शुरू हुआ आयोजन शाम की भव्य महाआरती और दीपों की रोशनी के साथ विशेष रूप से आकर्षक बन गया।

मंदिर परिसर में पूरे दिन भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे और भक्तिभाव के स्वर गूंजते रहे। समाजजनों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ पर्व मनाते हुए भगवान पार्श्वनाथ के आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर प्राप्त जानकारी सुनील जैन द्वारा दी गई। नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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