Gujarat में जहरीली शराब का कहर: 9 लोगों की मौत, 41 बीमार; मुरैना के युवक ने भी गंवाई जान, उज्जैन से जुड़ा कनेक्शन
शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब से हड़कंप
Gujarat । शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब ने बड़ा कहर बरपाया है। भावनगर जिले में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इनमें से 7 की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले का एक युवक भी शामिल बताया जा रहा है।
घटना के सामने आने के बाद गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। गुजरात पुलिस की शुरुआती जांच में इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश के उज्जैन से शराब की खेप पहुंचने की बात सामने आई है।
खुशी की पार्टी मातम में बदली
जानकारी के अनुसार, यह घटना 16 अगस्त की रात भावनगर जिले की घोघा तहसील के खरकड़ी गांव में हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस में चयन होने की खुशी में हरपाल सिंह गोहिल की बाड़ी में एक पार्टी आयोजित की गई थी।
पार्टी में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इसी दौरान घनश्याम नाम के कथित तस्कर से शराब खरीदी गई। आरोप है कि शराब को ‘रॉयल स्टैग’ की बोतलों में भरकर लोगों को परोसा गया।
शराब पीने के कुछ समय बाद ही कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। लोगों को उल्टी, चक्कर और दूसरी गंभीर परेशानियां होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान कई लोगों की मौत हो गई।
मुरैना के युवक की भी मौत
इस जहरीली शराब कांड में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक युवक की भी मौत होने की जानकारी सामने आई है। युवक गुजरात में किसी काम के सिलसिले में गया था और कथित तौर पर इसी पार्टी में शामिल हुआ था।
घटना की जानकारी मुरैना पहुंचने के बाद परिवार में मातम पसर गया। प्रशासन की ओर से मृतक और बीमार लोगों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
उज्जैन से भावनगर पहुंची थी शराब की खेप
गुजरात पुलिस की जांच में इस मामले का कनेक्शन मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ता दिखाई दे रहा है। पुलिस के अनुसार, जहरीली शराब की 28 पेटियां उज्जैन से भावनगर लाई गई थीं।
जांच के दौरान पुलिस ने इनमें से 15 पेटियां बरामद कर ली हैं, जबकि 13 पेटियां अभी भी गायब बताई जा रही हैं। पुलिस को आशंका है कि गायब पेटियों में मौजूद शराब को आसपास के दूसरे गांवों में भी पहुंचाया गया हो सकता है।
इसी आशंका के चलते प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में बड़े स्तर पर अलर्ट जारी किया है।
1000 गांवों में अलर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब 1000 गांवों में चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन और पुलिस की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं जहरीली शराब की खेप दूसरे इलाकों में तो नहीं पहुंची।
लापता 13 पेटियों की तलाश भी तेज कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब किन लोगों तक पहुंची और इसे किन इलाकों में सप्लाई किया गया।
शराब में मिलाया गया था मिथाइल अल्कोहल?
पुलिस की शुरुआती जांच में शराब में जहरीले मिथाइल अल्कोहल यानी मेथनॉल की मिलावट की आशंका जताई गई है। मेथनॉल इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है और इसके सेवन से आंखों की रोशनी जाने से लेकर मौत तक हो सकती है।
हालांकि, शराब में किस पदार्थ की कितनी मात्रा थी और मौत का वास्तविक कारण क्या रहा, इसकी पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगी।
तीन मुख्य आरोपियों की तलाश
गुजरात पुलिस ने मामले में तीन मुख्य आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही है। इनमें उज्जैन निवासी रईस और जुबेर तथा भावनगर का गौतम सोलंकी शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर अवैध शराब की सप्लाई और तस्करी से जुड़े होने का संदेह है। उनकी गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की मदद भी ली जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उज्जैन से शराब की खेप गुजरात तक कैसे पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
15 टीमों को जांच में लगाया गया
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को सौंपी गई है। जांच के लिए कुल 15 टीमें गठित की गई हैं।
इनमें से 5 टीमें अस्पतालों में भर्ती मरीजों से जानकारी जुटा रही हैं। पांच टीमें संदिग्ध शराब की बोतलों और सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही हैं, जबकि बाकी पांच टीमें शराब के मूल सप्लायरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
पुलिस अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब कहां से खरीदी गई थी।
मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैला तस्करी नेटवर्क?
इस मामले ने गुजरात में अवैध शराब की तस्करी को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, मध्य प्रदेश से गुजरात में शराब पहुंचाने के लिए झाबुआ और अलीराजपुर से लगे इलाकों के करीब 18 प्रमुख रास्तों के इस्तेमाल की आशंका है।
इन रास्तों के जरिए शराब और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी होने की जानकारी पहले भी सामने आती रही है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि भावनगर पहुंची शराब किस रास्ते से गुजरात लाई गई थी।
डिनेचर्ड स्पिरिट के इस्तेमाल की भी आशंका
जांच में डिनेचर्ड स्पिरिट के इस्तेमाल की आशंका भी जताई जा रही है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर औद्योगिक और अन्य गैर-पेय उद्देश्यों में किया जाता है। इसे पीने योग्य शराब में इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
पुलिस और जांच एजेंसियां संदिग्ध शराब के नमूनों की जांच करा रही हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जहरीली शराब में किस रसायन की मौजूदगी थी और उसकी वजह से लोगों की मौत हुई या नहीं।
कई परिवारों में पसरा मातम
इस घटना के बाद खरकड़ी गांव और आसपास के इलाकों में मातम का माहौल है। जिन लोगों की मौत हुई, उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनकी सलामती के लिए चिंतित हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं।
सरकार और प्रशासन के सामने कई सवाल
गुजरात में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जहरीली शराब का इतना बड़ा मामला सामने आने से प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब की इतनी बड़ी खेप मध्य प्रदेश से गुजरात तक कैसे पहुंची और रास्ते में उसे रोकने के लिए निगरानी तंत्र क्यों काम नहीं कर पाया।
इसके अलावा, 13 पेटियों के अब तक बरामद नहीं होने से भी पुलिस की चिंता बढ़ी हुई है। यदि यह शराब दूसरे क्षेत्रों में पहुंच चुकी है तो और लोगों के इसकी चपेट में आने की आशंका बनी हुई है।
जांच से खुलेगा पूरे नेटवर्क का राज
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान फरार आरोपियों को पकड़ने, गायब शराब की पेटियों को बरामद करने और सप्लाई नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने पर है।
उज्जैन से भावनगर तक सामने आए इस कथित अवैध शराब नेटवर्क की जांच में जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, मामले की तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल 9 लोगों की मौत और 41 लोगों के बीमार होने की घटना ने गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों में चिंता बढ़ा दी है।
