सम्मेद शिखरजी में जैसवाल जैन सेवा न्यास का भव्य सेवा आयोजन, 12 हजार तीर्थयात्रियों ने लिया वात्सल्य भोज का लाभ
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम
मुरैना/सम्मेद शिखरजी (मनोज जैन नायक)। भगवान श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की दिव्य एवं मोक्षदायिनी धरा पर जैसवाल जैन सेवा न्यास द्वारा श्रद्धा, सेवा, वात्सल्य और करुणा से परिपूर्ण भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से सम्मेद शिखरजी पहुंचे हजारों तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए विशेष शिविर लगाया गया, जिसमें करीब 12 हजार श्रद्धालुओं को वात्सल्य भोज कराया गया।
सेवा आयोजन के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए मेडिकल कैंप भी लगाया गया, जहां यात्रा के दौरान थकान, कमजोरी अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे श्रद्धालुओं को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया।
भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और शांतिधारा
सेवा न्यास से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया। इसके बाद भगवान पार्श्वनाथ स्वामी को निर्वाण लाडू अर्पित कर मोक्ष कल्याणक की आराधना की गई।
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए आयोजित शिविर में सेवा कार्य शुरू किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोज का लाभ लिया। आयोजन स्थल पर सेवा और धार्मिक आस्था का विशेष वातावरण देखने को मिला।
12 हजार श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज
जैसवाल जैन सेवा न्यास द्वारा आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में करीब 12 हजार तीर्थयात्रियों के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था की गई। कठिन और लंबी तीर्थयात्रा के बाद श्रद्धालुओं ने भोजन ग्रहण कर सेवा का लाभ लिया।
आयोजकों ने कहा कि तीर्थयात्रियों को भोजन कराना केवल अन्नदान नहीं, बल्कि उनके प्रति वात्सल्य और आत्मीयता प्रकट करने का माध्यम है। सम्मेद शिखरजी की कठिन वंदना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराना सेवा न्यास के लिए आध्यात्मिक अनुभव रहा।

मेडिकल कैंप में तीर्थयात्रियों को मिला उपचार
तीर्थयात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं को थकान और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए सेवा न्यास द्वारा मेडिकल कैंप की भी व्यवस्था की गई।
मेडिकल कैंप में जरूरतमंद तीर्थयात्रियों को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा काफी उपयोगी साबित हुई।
आयोजकों के अनुसार, किसी अस्वस्थ तीर्थयात्री को उपचार के बाद राहत मिलना और उसके चेहरे पर संतोष दिखाई देना सेवा कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा।
सेवा को आध्यात्मिक साधना बताया
सेवा न्यास के कार्याध्यक्ष सीए कमलेश जैन, गुरुग्राम ने कहा कि सेवा केवल भोजन कराने या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह तीर्थयात्रियों के प्रति वात्सल्य, करुणा और आत्मीयता व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि सम्मेद शिखरजी की कठिन वंदना करने वाले श्रद्धालुओं के थके कदमों को सहारा देना और उनकी आवश्यकताओं में सहभागी बनना स्वयं में एक आध्यात्मिक अनुभव है।
उन्होंने कहा कि तीर्थराज की पावन भूमि पर सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है और न्यास का प्रयास है कि भविष्य में भी इसी भावना के साथ सेवा कार्य निरंतर जारी रहे।
पवन जैन ने सेवा आयोजन को बताया बड़ी उपलब्धि
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईपीएस पवन जैन, सेवानिवृत्त डीजीपी, मध्य प्रदेश ने भी सेवा आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी तीर्थयात्री के चेहरे पर भोजन के बाद दिखाई देने वाली संतुष्टि, किसी थके हुए श्रद्धालु को मिला सेवा का सहारा और किसी अस्वस्थ यात्री को उपचार के बाद मिली राहत ही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की पावन भूमि पर हजारों श्रद्धालुओं की सेवा करते हुए यह अनुभव हुआ कि प्रत्येक तीर्थयात्री में भगवान पार्श्वनाथ का स्वरूप विद्यमान है और प्रत्येक सेवा प्रभु के चरणों में समर्पित हो रही है।

अध्यक्ष प्रदीप जी के मार्गदर्शन में आयोजन
जैसवाल जैन सेवा न्यास के अध्यक्ष श्री प्रदीप जी (PNC) के कुशल मार्गदर्शन में इस सेवा आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया गया। आयोजन में विभिन्न स्थानों से आए न्यासीगण, समाज के प्रतिनिधि और धर्मप्रेमी बंधुओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
मुख्य अतिथि पवन जैन जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। आयोजन में उपस्थित सदस्यों ने सेवा कार्य को सफल बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
देश के विभिन्न शहरों से पहुंचे न्यासी और धर्मप्रेमी
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से आए समाज के लोगों ने सहभागिता की। इस अवसर पर रवीन्द्र जैन जमूसर भोपाल, सुदीप जैन मिढ़ेला वाले, रूपेश जैन दिल्ली, अजय जैन धौलपुर, राजकुमार जैन धौलपुर, गौरव जैन इंदौर, नरेश जैन दिल्ली, प्रवीण जैन दिल्ली, मनीष जैन शिवपुरी और विपिन जैन दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से पधारे सम्माननीय न्यासीगण एवं धर्मप्रेमी बंधुओं ने आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
सभी ने मिलकर तीर्थयात्रियों की सेवा में योगदान दिया और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अन्नदान के साथ करुणा का संदेश
न्यास से जुड़े सदस्यों ने कहा कि जहां भूखे व्यक्ति को अन्न मिलता है, वहां केवल अन्नदान नहीं होता, बल्कि वात्सल्य का जन्म होता है। इसी प्रकार जहां किसी पीड़ित और अस्वस्थ व्यक्ति को उपचार मिलता है, वहां केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि करुणा भी प्रवाहित होती है।
सेवा न्यास के सदस्यों के अनुसार तीर्थयात्रियों की निस्वार्थ सेवा के दौरान उन्हें प्रभु भक्ति और आत्मिक आनंद की अनुभूति हुई। उनका मानना है कि धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा करना भी धर्म आराधना का ही एक स्वरूप है।

सामूहिक सहयोग से सफल हुआ आयोजन
रविन्द्र जैन जमूसर ने कहा कि इस सेवा कार्य की सफलता किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है। यह सामूहिक श्रद्धा, सहयोग, समर्पण और सेवाभाव का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि सभी न्यासीगण, सहयोगियों और धर्मप्रेमी बंधुओं के सहयोग से आयोजन आत्मीय और अविस्मरणीय बन सका। सेवा कार्य में जिस तरह सभी ने मिलकर सहभागिता निभाई, उससे आयोजन को व्यापक स्वरूप मिला।
सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात
कार्याध्यक्ष सीए कमलेश जैन, गुरुग्राम ने जैसवाल जैन सेवा न्यास की ओर से सभी सहयोगियों, न्यासीगण और धर्मप्रेमी बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की पावन भूमि पर हजारों तीर्थयात्रियों की सेवा करने का अवसर मिलना अपने आप में सौभाग्य है। न्यास की ओर से कामना की गई कि सेवा का यह सौभाग्य निरंतर मिलता रहे और समाज में वात्सल्य, करुणा तथा सेवा की भावना लगातार मजबूत होती रहे।
धर्म और सेवा का संदेश
भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर आयोजित यह सेवा कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सेवा का भी प्रेरणादायी उदाहरण बना। एक ओर जहां श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना कर निर्वाण लाडू अर्पित किया, वहीं दूसरी ओर हजारों तीर्थयात्रियों की भोजन और चिकित्सा के माध्यम से सेवा की गई।
आयोजकों ने कहा कि सेवा, समर्पण और करुणा की यही भावना समाज को जोड़ती है। तीर्थराज की पावन भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धा के साथ मानव सेवा का संदेश भी दिया।
न्यास ने कामना की कि धर्म की ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहे, वात्सल्य और करुणा का भाव बढ़ता रहे तथा भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में जीवन समर्पित करने की भावना सदैव बनी रहे।
