भीनमाल उपजिला अस्पताल में PMO से कथित मारपीट पर चिकित्सकों में आक्रोश, IMA ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी
आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, अस्पताल के CCTV में घटना कैद होने का दावा
संवाददाता : मुकेश सोलंकी
भीनमाल भीनमाल के उपजिला अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) डॉ. नेमीचंद संघवी के साथ कथित मारपीट, अभद्रता और राजकार्य में बाधा डालने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों में आक्रोश है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) से जुड़े चिकित्सकों ने उपखंड कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तथा अस्पताल में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की।
चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर के साथ इस तरह की घटना गंभीर चिंता का विषय है। आईएमए ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो चिकित्सा समुदाय कार्य बहिष्कार जैसे कदम पर विचार करने को मजबूर हो सकता है।
मामले में नामजद एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी दी गई है। आरोपों की अंतिम सत्यता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
18 अगस्त की सुबह PMO कक्ष में हुई घटना
आईएमए की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार घटना 18 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे की है। उस समय पीएमओ डॉ. नेमीचंद संघवी अपने कक्ष में मौजूद थे और मरीजों का उपचार एवं अस्पताल से जुड़े नियमित कार्य कर रहे थे।
आरोप है कि इसी दौरान कमलेश कुमार नामक व्यक्ति अस्पताल के एक संविदा कर्मचारी के मानदेय से संबंधित मामले को लेकर पीएमओ के कक्ष में पहुंचा।
ज्ञापन के मुताबिक संबंधित संविदा कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित बताया जा रहा था। इसी कारण डॉ. संघवी ने नियमों का हवाला देते हुए मानदेय जारी करने में असमर्थता जताई। आरोप है कि इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी।
कॉलर पकड़ने और अभद्रता करने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मानदेय जारी करने से इनकार किए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति आक्रोशित हो गया और उसने कथित रूप से डॉ. संघवी के साथ अभद्र व्यवहार किया।
आईएमए के अनुसार आरोपी ने पीएमओ का कॉलर पकड़ लिया, गाली-गलौज की और मारपीट का प्रयास किया। इस दौरान टेबल पर रखी नेमप्लेट को भी उखाड़कर फेंकने का आरोप लगाया गया है।
घटना के समय अस्पताल में अन्य चिकित्सक और कर्मचारी भी मौजूद थे। बताया गया कि विवाद बढ़ता देख डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को नियंत्रित किया।
आईएमए ने इस घटना को चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार के साथ सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाला मामला बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
CCTV कैमरे में घटना कैद होने का दावा

चिकित्सकों के मुताबिक पीएमओ कक्ष और अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। आईएमए ने पुलिस प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और त्वरित जांच करने की मांग की है।
चिकित्सकों का कहना है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग घटना की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पुलिस जांच में फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि किए जाने की उम्मीद है।
थाने में नामजद FIR दर्ज कराने की जानकारी
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस थाने में शिकायत की गई। आईएमए के अनुसार मामले में आरोपी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है।
चिकित्सकों ने कहा कि केवल प्रकरण दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई भी शीघ्र होनी चाहिए। संगठन ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग प्रमुखता से उठाई है।
आईएमए प्रतिनिधियों ने प्रशासन से कहा कि कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होने से अस्पताल कर्मचारियों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा।
उपखंड कार्यालय पहुंचकर चिकित्सकों ने जताया विरोध
घटना के विरोध में बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्सिंग कर्मचारी और अस्पताल स्टाफ उपखंड कार्यालय पहुंचे। यहां आईएमए के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए घटना पर नाराजगी जताई गई।
इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य रूप से आरोपी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई।
चिकित्सकों ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों को भयमुक्त वातावरण मिलना जरूरी है, क्योंकि किसी भी प्रकार का विवाद या हिंसा केवल स्वास्थ्यकर्मियों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इससे मरीजों की चिकित्सा सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।
डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उठाई मांग
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान उनके साथ कथित हिंसा या अभद्रता की घटनाएं चिंता पैदा करती हैं।
संगठन ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल के संवेदनशील हिस्सों में पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और किसी विवाद की स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए।
साथ ही अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी नियमों के अनुसार काम करने के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाना आवश्यक बताया गया।
कार्रवाई नहीं हुई तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी
आईएमए ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आरोपी के खिलाफ शीघ्र कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती और चिकित्सकों की सुरक्षा से संबंधित मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता तो चिकित्सा समुदाय को कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
हालांकि चिकित्सकों ने अपनी प्राथमिक मांग त्वरित कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को बताया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए जिससे चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हों, इसलिए प्रशासन को समय रहते आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अस्पताल में भयमुक्त माहौल की जरूरत
चिकित्सकों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां चिकित्सकों और कर्मचारियों को कई प्रशासनिक एवं चिकित्सा संबंधी निर्णय भी लेने होते हैं। ऐसे निर्णय नियमों और उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार किए जाते हैं।
यदि किसी प्रशासनिक निर्णय से असहमति होने पर डॉक्टर या कर्मचारी के साथ हिंसा अथवा अभद्रता की स्थिति बनती है तो इसका असर पूरे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
आईएमए ने लोगों से भी अस्पताल में किसी समस्या या शिकायत की स्थिति में निर्धारित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया अपनाने की अपील की है।
बड़ी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी रहे मौजूद
प्रदर्शन और ज्ञापन के दौरान आईएमए अध्यक्ष डॉ. हिम्मत शर्मा, डॉ. प्रेमराज परमार, डॉ. भूपेंद्र चौधरी, बीसीएमओ डॉ. दिनेश जाम्भानी, डॉ. रमेश देवासी, डॉ. बाबूलाल चौधरी, डॉ. नेमीचंद संघवी, डॉ. भगवानाराम जांगिड़, डॉ. रवि परमार, डॉ. अक्षय बोहरा, डॉ. विनोद कुमार वारडे, नरेंद्र सिंह गोहिल, संजीव माथुर, डॉ. जुगमलराम चौधरी, डॉ. सुरेश विश्नोई, डॉ. अनिल बिश्नोई, ललित कुमार, जितेंद्र कुमार और भिखाराम सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग एवं अस्पताल कर्मचारी मौजूद रहे।
फिलहाल चिकित्सक समुदाय ने आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार शीघ्र कार्रवाई और अस्पताल में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। दूसरी ओर, मामले में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच पुलिस द्वारा की जानी है। जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद घटनाक्रम की पूरी स्थिति और स्पष्ट होगी।
