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कुर्सी नहीं, व्यक्तित्व बनाता है इंसान को नंबर वन, मुनि सुधासागर जी ने धर्मसभा में दिया प्रेरणादायक संदेश

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Published On: 19 August 2026
कुर्सी

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*👏 जय जिनेन्द्र जी 🙏 नमोस्तु गुरुवर*

1.”कुर्सी से नहीं, व्यक्तित्व से बनता है नंबर एक” : मुनि सुधासागर जी“
राजेश जैन दद्दू
इंदौर
दलाल बाग स्थित देशना मंडप में श्रंमण संस्कृति के महाश्रमण सुधासागर जी ने धर्म सभा में कहा – भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व प्रेरणा है। नंबर मत खोजो, अपना चरित्र और क्षमता खोजो

*इंदौर।* चातुर्मास में विराजित श्रमण निर्यापक मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने आज की धर्मसभा में अपनी मंगल देशना में कहा*”व्यक्तित्व की महानता”पर अत्यंत प्रेरणादायक देशना दी। गुरुदेव ने कहा कि कुर्सी से नहीं, व्यक्तित्व से बनता है नंबर एक। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कल्याण का मार्ग और उपलब्धि का सुख

मुनि श्री ने कहा कल्याण करना बहुत सरल है।” मोक्षमार्ग पर चलने वाला जीव जब अपनी उपलब्धि को सामने देखता है तो बड़े से बड़े कष्ट भी उसे छोटे लगने लगते हैं। जब हमें किसी चीज की उपलब्धि का सुख दिखाई देता है, तो उस उपलब्धि के सामने कष्टों की परवाह नहीं रहती।”
पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व बनी प्रेरणा

गुरुदेव ने भगवान पार्श्वनाथ का उदाहरण देते हुए कहा अनंत-अनंत जीवों ने कल्याण किया, पर सभी के कल्याणक नहीं मनाए गए। असंख्यात जीवों में से केवल 24 तीर्थंकरों के कल्याणक मनाए गए। और उन 24 में भी भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व ऐसा बना कि आज वे भक्तों के हृदय में एक विशेष स्थान रखते हैं।”
यही सबसे बड़ी प्रेरणा है – अपना नंबर मत देखो, अपना व्यक्तित्व बनाओ।”
महानता का मापदंड
मुनि श्री ने कहा महान आत्माएँ किसी एक नंबर की कुर्सी की मोहताज नहीं होतीं। वे जिस स्थान पर बैठ जाती हैं, वही स्थान महत्वपूर्ण और प्रथम बन जाता है।

हमें बार-बार यह जानने की चिंता रहती है कि हमारा नंबर क्या है? हमें कौन-सी कुर्सी मिली? यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है।”

गुरुदेव ने सूत्र दिया -“आप ऐसा व्यक्तित्व बनाइए कि आप 24वें नंबर पर भी बैठें, तो लोगों की नजरें आपकी ओर हों। सारे कैमरे आपकी तरफ मुड़ जाएँ।”
क्योंकि एक नंबर की कुर्सी पर बैठने से व्यक्ति नंबर एक नहीं बनता; व्यक्ति का व्यक्तित्व उस कुर्सी को नंबर एक बना देता है।”

पद नहीं, चरित्र महत्वपूर्ण
आचार्य श्री ने कहा पद आपको बड़ा नहीं बनाता, आपका व्यक्तित्व पद को बड़ा बनाता है।”
महान आत्माओं को सिंहासन की आवश्यकता नहीं होती। वे जहाँ बैठ जाते हैं, वही स्थान सिंहासन बन जाता है।”
आसन से कोई सिंह नहीं होता, सिंह से आसन सिंहासन बनता है।”
भक्तों के भगवान बनना सबसे बड़ी उपलब्धि

मुनि श्री ने कहा साक्षात भगवान बनना तपस्या का परिणाम है, लेकिन भक्तों के भगवान बनना उससे भी कठिन है। सभी तीर्थंकर साधना से भगवान बने, पर भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व ऐसा बना कि वे करोड़ों भक्तों के आराध्य बन गए।
अंत में गुरुदेव ने कहा अपने लिए महान बनना आसान है, लेकिन दूसरों के हृदय में महान बनना कठिन है।”
इसलिए “नंबर मत खोजिए, अपना व्यक्तित्व खोजिए। कुर्सी मत खोजिए, अपनी क्षमता खोजिए। सम्मान मत माँगिए, ऐसा चरित्र बनाइए कि सम्मान स्वयं आपके पीछे आए।”

और ऐसा जीवन बनाइए कि – आप जहाँ बैठें, वही स्थान नंबर एक बन जाए।” धर्म सभा में आकाश आलोक कोल, डॉ जैनेन्द्र जैन, आनंद नवीन गोधा सपना मनीष गोधा अखिलेश सोधीया विरेन्द्र जैन श्रुत जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित रहे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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