Modi Cabinet Decisions: मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले, हावड़ा-चेन्नई रेल कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता; रेलवे प्रोजेक्ट्स पर ₹13,041 करोड़ की मंजूरी
खड़गपुर-भद्रक सहित चार रेल परियोजनाओं पर होगा काम, तीसरी-चौथी लाइन बिछाने की तैयारी; माल ढुलाई बढ़ने के साथ CO₂ उत्सर्जन में कमी की उम्मीद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 19 अगस्त को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में कुल पांच प्रस्तावों पर मुहर लगने की जानकारी सामने आई है। इनमें रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने वाली मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के साथ एक हाईवे परियोजना भी शामिल है। रेलवे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए करीब ₹13,041 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।
रेलवे परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य देश के अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइन बिछाकर यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन को बेहतर बनाना है। इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की दिशा में इन फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हावड़ा-चेन्नई रेल कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता
कैबिनेट ने हावड़ा-चेन्नई रेल कॉरिडोर से जुड़े महत्वपूर्ण सेक्शनों में अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। हावड़ा-चेन्नई देश के प्रमुख रेल मार्गों में से एक है और इस पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी संचालन होता है।
अतिरिक्त रेल लाइन तैयार होने से मौजूदा नेटवर्क पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाने और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।
रेलवे पिछले कुछ वर्षों से अधिक ट्रैफिक वाले मार्गों पर तीसरी और चौथी लाइन जैसी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं पर जोर दे रहा है। इनका उद्देश्य मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और भविष्य में यात्री एवं माल परिवहन की बढ़ती मांग के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है।
इन चार प्रमुख रेल सेक्शन पर होगा काम
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी प्राप्त रेल परियोजनाएं कई राज्यों से होकर गुजरेंगी। इन परियोजनाओं में अलग-अलग रेल सेक्शन पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का काम शामिल है।
खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन की लंबाई करीब 173 किलोमीटर होगी। इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन लगभग 75 किलोमीटर लंबी होगी।
इसी तरह गुम्मिडीपुंडी-गुडूर सेक्शन पर तीसरी और चौथी लाइन करीब 90 किलोमीटर में तैयार करने की योजना है। वहीं कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) सेक्शन पर तीसरी और चौथी लाइन करीब 72 किलोमीटर में विकसित की जाएगी।
इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के रेल नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
खड़गपुर-भद्रक सेक्शन पर ₹3,352 करोड़ होंगे खर्च
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए खड़गपुर-भद्रक रेल परियोजना को महत्वपूर्ण बताया। इस परियोजना की लंबाई करीब 173 किलोमीटर है और इसे पूरा करने में लगभग ₹3,352 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
परियोजना से पश्चिम मेदिनीपुर, बालेश्वर और भद्रक सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं, जिसके कारण रेल मार्ग पर माल परिवहन का दबाव भी अधिक रहता है।
नई लाइन बनने के बाद रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों के संचालन के लिए अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध होगा।
सीमेंट, स्टील और पावर सेक्टर को मिलेगा फायदा
रेल मंत्री के अनुसार परियोजना वाले क्षेत्रों में कई सीमेंट प्लांट, स्टील प्लांट, पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक केंद्र मौजूद हैं। ऐसे में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से उद्योगों को कच्चा माल पहुंचाने और तैयार माल को दूसरे क्षेत्रों तक भेजने में सुविधा हो सकती है।
रेल मार्ग से बड़ी मात्रा में सामान का परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक कुशल माना जाता है। इसलिए अतिरिक्त रेल लाइन तैयार होने से पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रेलवे परियोजनाओं के लिए ₹13,041 करोड़ का प्रावधान
मंजूर रेल परियोजनाओं के लिए कुल मिलाकर करीब ₹13,041 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का फोकस देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने और उन सेक्शनों पर अतिरिक्त लाइन तैयार करने पर है, जहां वर्तमान में ट्रेनों की संख्या अधिक है।
तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने के बाद एक ही कॉरिडोर पर अधिक संख्या में ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। इससे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के परिचालन को भी बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में सहायता मिल सकती है।
हाईवे से रेलवे पर शिफ्ट होगा 1.3 करोड़ टन माल
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बड़ी मात्रा में माल परिवहन को सड़क से रेलवे पर स्थानांतरित करने की संभावना है। अनुमान के अनुसार करीब 13 मिलियन टन यानी 1.3 करोड़ टन माल हाईवे के बजाय रेल नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जा सकेगा।
माल परिवहन का एक हिस्सा रेलवे पर स्थानांतरित होने से हाईवे पर भारी मालवाहक वाहनों का दबाव कम हो सकता है। इसके साथ ही लंबी दूरी की माल ढुलाई में लागत और समय को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सड़कों पर भारी वाहनों की संख्या कम होने से सड़क नेटवर्क पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकता है।
सालाना 21 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान
रेल परियोजनाओं को पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। रेल मंत्री के अनुसार सड़क मार्ग से होने वाली माल ढुलाई का हिस्सा रेलवे पर स्थानांतरित होने से हर साल करीब 21 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।
रेलवे को लंबी दूरी के बड़े पैमाने के माल परिवहन के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा-कुशल माध्यम माना जाता है। ऐसे में माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ने से देश के परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यात्री ट्रेनों के संचालन में भी मिलेगी मदद
इन परियोजनाओं का लाभ केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा। व्यस्त रेल मार्गों पर तीसरी और चौथी लाइन उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता मिल सकेगी।
अक्सर अत्यधिक व्यस्त रेल कॉरिडोर पर यात्री और मालगाड़ियों को एक ही ट्रैक क्षमता साझा करनी पड़ती है। अतिरिक्त लाइन बनने के बाद रेलवे को ट्रेनों की समय-सारिणी और परिचालन को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।
इससे भविष्य में नई ट्रेन सेवाओं के संचालन और मौजूदा सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए भी आधार तैयार हो सकता है।
रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्र का फोकस
मोदी कैबिनेट के इन फैसलों से सरकार ने एक बार फिर रेल और सड़क बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर दिया है। रेलवे में मल्टी-ट्रैकिंग के जरिए मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ हाईवे परियोजनाओं के माध्यम से सड़क संपर्क बेहतर करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
चार प्रमुख रेल सेक्शनों में अतिरिक्त लाइनें तैयार होने से पूर्वी और दक्षिणी भारत के बीच रेल संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर औद्योगिक और बंदरगाह आधारित माल परिवहन के लिए इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने, माल ढुलाई में तेजी आने, सड़क यातायात पर भारी वाहनों का दबाव कम होने और कार्बन उत्सर्जन में कमी आने जैसे दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
