Indore Property Tax: सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों का नहीं खुलेगा प्रॉपर्टी टैक्स खाता, MIC ने प्रस्ताव किया खारिज
इंदौर। सरकारी और नगर निगम के स्वामित्व वाली जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को लेकर इंदौर नगर निगम ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों के नाम पर प्रॉपर्टी टैक्स यानी संपत्तिकर खाता खोलने के प्रस्ताव को मेयर-इन-काउंसिल (MIC) ने खारिज कर दिया है। बैठक में प्रस्ताव सामने आते ही इसका विरोध हुआ। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान और अन्य एमआईसी सदस्यों की आपत्ति के बाद इसे मंजूरी नहीं दी गई।
नगर निगम के राजस्व विभाग ने आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव तैयार किया था। इसके तहत सरकारी या नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर रहने वाले ऐसे लोगों के प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने की बात थी, जिनके पास संबंधित संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इनके खाते ‘अधिभोगी’ या ‘अधिवासी’ के आधार पर खोलने का प्रस्ताव रखा गया था।
हालांकि एमआईसी की बैठक में इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। सदस्यों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति के नाम पर संपत्तिकर खाता खोलने की प्रक्रिया उचित नहीं होगी। इसके बाद प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों के खाते खोलने का था प्रस्ताव
नगर निगम के राजस्व विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव में सरकारी और निगम स्वामित्व वाली जमीनों पर काबिज लोगों को संपत्तिकर व्यवस्था के दायरे में लाने की योजना थी।
ऐसे कब्जाधारियों के पास संबंधित जमीन या संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में भी ‘अधिभोगी’ या ‘अधिवासी’ के रूप में उनके नाम से संपत्तिकर खाता खोलने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी।
इस प्रस्ताव के पीछे नगर निगम का राजस्व बढ़ाने का उद्देश्य बताया गया। शहर में ऐसी कई संपत्तियां और जमीनें हैं जहां स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने के कारण संपत्तिकर खाते नहीं खुले हैं। राजस्व विभाग इन्हें टैक्स के दायरे में लाना चाहता था।
लेकिन सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने पर एमआईसी सदस्यों ने आपत्ति जताई।
MIC बैठक में प्रस्ताव का हुआ विरोध
जैसे ही प्रस्ताव मेयर-इन-काउंसिल की बैठक में विचार के लिए रखा गया, राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने इसका विरोध किया। प्रस्ताव को लेकर चौहान और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई और मामला गरमा गया।
चौहान ने सवाल किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों का प्रॉपर्टी टैक्स खाता खोलने से जुड़ा प्रस्ताव उनकी जानकारी के बिना किस आधार पर तैयार किया गया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी मामले पर सवाल उठाए। बैठक में चर्चा के बाद यह तय किया गया कि सरकारी और नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के नाम से संपत्तिकर खाता नहीं खोला जाएगा।
महापौर, राजस्व प्रभारी और अन्य एमआईसी सदस्यों की आपत्ति के बाद प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली।
राजस्व बढ़ाने के लिए तैयार किया गया था प्रस्ताव
नगर निगम के राजस्व विभाग का उद्देश्य शहर में प्रॉपर्टी टैक्स का दायरा बढ़ाकर निगम की आय में वृद्धि करना था। इसी दिशा में उन संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने का प्रयास किया गया, जिनके खाते विभिन्न कारणों से अब तक नहीं खुले हैं।
लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर सवाल खड़े हुए। एमआईसी सदस्यों की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि अतिक्रमण वाली जमीन पर टैक्स खाता खोलने से भविष्य में अलग तरह के प्रशासनिक और कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं।
इसी वजह से बैठक में प्रस्ताव के इस हिस्से को स्वीकार नहीं किया गया।
अवैध कॉलोनियों में नोटरी के आधार पर खुल सकेंगे खाते
एमआईसी ने सरकारी जमीन के कब्जाधारियों के नाम प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने का प्रस्ताव तो खारिज कर दिया, लेकिन अवैध कॉलोनियों से संबंधित एक अन्य व्यवस्था को मंजूरी दी गई।
इसके तहत अवैध कॉलोनियों में नोटरी के आधार पर संपत्तिकर खाते खोलने का रास्ता साफ किया गया है। बताया गया कि पहले नगर निगम में नोटरी के आधार पर ऐसे खाते खोले जाते थे, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया बंद हो गई थी।
राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बैठक में स्पष्ट किया कि उनकी राय सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खाते खोलने की नहीं थी। उनका सुझाव अवैध कॉलोनियों में नोटरी दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने को लेकर था।
‘मैंने सरकारी जमीन के कब्जाधारियों के लिए राय नहीं दी’
बैठक के दौरान प्रस्ताव को लेकर अधिकारियों और राजस्व प्रभारी के बीच स्थिति तब और स्पष्ट हुई, जब नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि प्रस्ताव राजस्व प्रभारी की राय के आधार पर रखा गया है।
इस पर निरंजन सिंह चौहान ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने की राय नहीं दी थी।
चौहान के अनुसार, उनकी राय केवल अवैध कॉलोनियों में नोटरी के आधार पर खाते खोलने की व्यवस्था बहाल करने को लेकर थी। उनका कहना था कि इस तरह के खाते पहले नगर निगम में खोले जाते थे।
इसके बाद प्रस्ताव की मूल मंशा और तैयार किए गए मसौदे को लेकर एमआईसी बैठक में सवाल उठे। आखिरकार महापौर ने सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों के खाते खोलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
संपत्तिकर खाता खुलने का मतलब मालिकाना हक नहीं
प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि संपत्तिकर का भुगतान अपने आप किसी संपत्ति पर कानूनी मालिकाना हक स्थापित नहीं करता। नगर निकाय द्वारा टैक्स वसूली और जमीन के स्वामित्व का निर्धारण अलग-अलग कानूनी विषय होते हैं।
इसके बावजूद सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों के नाम खाते खोलने की प्रस्तावित व्यवस्था पर इसलिए सवाल उठे कि इससे प्रशासनिक रिकॉर्ड में अतिक्रमण वाली संपत्तियों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसी कारण एमआईसी ने सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी टैक्स खाते का आधार
एमआईसी के निर्णय के बाद अब यह स्पष्ट है कि इंदौर में सरकारी और नगर निगम के स्वामित्व वाली जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों के नाम से केवल कब्जे या अधिभोग के आधार पर संपत्तिकर खाता नहीं खोला जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में स्थिति को स्पष्ट बनाए रखना है। दूसरी ओर, अवैध कॉलोनियों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए नोटरी के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है, जिनके मामलों में अलग परिस्थितियां हैं।
राजस्व विभाग के प्रस्ताव पर उठे कई सवाल
पूरे मामले ने नगर निगम के भीतर प्रस्ताव तैयार करने और विभागीय समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। राजस्व प्रभारी द्वारा प्रस्ताव की जानकारी और उसमें अपनी राय को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद यह सवाल उठा कि सरकारी जमीन के कब्जाधारियों को टैक्स के दायरे में लाने का बिंदु आखिर किस स्तर पर शामिल किया गया।
फिलहाल एमआईसी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के प्रॉपर्टी टैक्स खाते खोलने से इनकार कर दिया है। वहीं, अवैध कॉलोनियों में नोटरी के आधार पर संपत्तिकर खाते खोलने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा।
इस निर्णय के बाद नगर निगम के राजस्व विभाग को अब एमआईसी के फैसले के अनुरूप संपत्तिकर खातों से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
