प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की क्षमता: आचार्यश्री उदारसागर, पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित
मुरैना। भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर धार्मिक आयोजनों का श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजन किया गया। परम पूज्य आचार्यश्री 108 उदारसागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित कर श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण और कर्मनिर्जरा का संकल्प लिया।
सच्चे गुरु से बढ़कर कोई मार्गदर्शक नहीं
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने कहा कि संसार में सच्चे गुरु से बढ़कर कोई मार्गदर्शक नहीं है। गुरु जीव को संसार के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने कठोर तप, संयम और आत्मसाधना के माध्यम से आठों कर्मों का क्षय कर केवलज्ञान प्राप्त किया और अंततः मोक्ष पद को प्राप्त हुए। उनका जीवन प्रत्येक जीव को यह संदेश देता है कि प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की क्षमता मौजूद है। इसके लिए सही दिशा, संयम और पुरुषार्थ आवश्यक है।
पिंजरे में बंद पक्षी का दिया उदाहरण
आचार्यश्री ने आत्मा और कर्मों के संबंध को समझाने के लिए पिंजरे में बंद पक्षी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पक्षी बंधन में रहता है, तब तक वह स्वतंत्र होकर उड़ नहीं सकता। उसी प्रकार आत्मा भी कर्मों के बंधन में रहने के कारण संसार के जन्म-मरण चक्र में भटकती रहती है।
कर्मों का क्षय होने पर आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त करती है और मोक्ष की ओर अग्रसर होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि गुरु के उपदेशों को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारना भी आवश्यक है।

भगवान पार्श्वनाथ की आराधना का बताया वास्तविक अर्थ
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना तभी सार्थक होगी, जब हम अपने भीतर मौजूद राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को दूर करने का प्रयास करेंगे। आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा के लिए निरंतर पुरुषार्थ करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मोक्ष कल्याणक केवल धार्मिक उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन का पर्व है। भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण की स्मृति हमें संयम, त्याग, तप और आत्मचिंतन को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है।
भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से लें आत्मकल्याण की प्रेरणा
मोक्ष सप्तमी के अवसर पर मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन प्रत्येक जीव को आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करना तभी सार्थक है, जब हम अपने जीवन से राग-द्वेष और अन्य विकारों को कम करने का संकल्प लें। मोक्ष कर्मों से मुक्ति का नाम है और कर्मनिर्जरा संयम, तप, त्याग एवं आत्मचिंतन के माध्यम से होती है।
मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से प्रेरणा लेकर आसक्ति को कम करने और आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानने का प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही मोक्ष सप्तमी पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
निर्वाण लाडू महोत्सव श्रद्धा से मनाया
मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य एवं मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज के पावन निर्देशन में भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
निर्वाण लाडू महोत्सव में विद्वान नवनीत जैन शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराईं। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री जिनेंद्र प्रभु के अष्टद्रव्य पूजन से हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित किए और आत्मकल्याण एवं कर्मनिर्जरा का संकल्प लिया।

अभिषेक और शांतिधारा का मिला सौभाग्य
भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक का सौभाग्य राजेंद्र-अतुल जैन दयेरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य डालचंद-निखिलकुमार तथा अजय-श्रेयांस जैन परिवार को मिला।
प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य श्रीमती शीला जैन एवं नीलेश-विजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता की और पुण्यार्जन किया।
नसियाजी जिनालय में भी हुआ धार्मिक आयोजन
मोक्ष सप्तमी के अवसर पर नसियाजी जिनालय में भी भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया।
यहां भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य महावीरप्रसाद-अनिलकुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि शांतिधारा का सौभाग्य महेशचंद्र-राकेशकुमार अझेडा वाले परिवार को मिला।
मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य अभिषेक जैन ‘टीटू’, अनिकेत जैन एवं आलोक प्रेस परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना करते हुए आत्मकल्याण और कर्मनिर्जरा की भावना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।
श्रद्धालुओं ने लिया आत्मशुद्धि का संकल्प
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना और निर्वाण लाडू अर्पण के साथ अपने जीवन में संयम, त्याग, तप और आत्मचिंतन को अपनाने की भावना व्यक्त की।
धर्मसभा में संतों के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि मोक्ष का मार्ग बाहरी सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, कर्मों की निर्जरा और सही पुरुषार्थ से प्रशस्त होता है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन इसी आत्मकल्याण और मुक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

