सर्पदंश पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जाएं: मध्यप्रदेश शासन की महत्वपूर्ण अपील
भोपाल। रिपोर्ट— संभागीय ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास, दैनिक स्वराज वाणी।
बारिश के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शासन ने लोगों से अपील की है कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक, घरेलू नुस्खों या अंधविश्वास के भरोसे समय बर्बाद न करें, बल्कि पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं।
सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपातस्थिति हो सकता है और जहरीले सांप के काटने पर समय पर चिकित्सा उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सर्पदंश के बाद बिना देरी स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने और उचित उपचार लेने की सलाह देता है।
पीड़ित को घबराने न दें, शरीर को रखें स्थिर
सांप के काटने के बाद सबसे पहले पीड़ित को शांत रखना जरूरी है। उसे अनावश्यक रूप से चलने या दौड़ने न दें। प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखने की कोशिश करें और सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाएं।
WHO के अनुसार सर्पदंश के बाद व्यक्ति को स्थिर रखना और प्रभावित अंग को immobilize करना प्राथमिक कदमों में शामिल है।
झाड़-फूंक और घरेलू उपचार से बचें
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद कई बार लोग झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी, सांप का जहर चूसने, घाव पर चीरा लगाने या अन्य पारंपरिक उपायों का सहारा लेते हैं। ऐसे उपाय उपचार में देरी करने के साथ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
WHO घाव को काटने, जहर चूसने, टाइट टूर्निकेट लगाने तथा अप्रमाणित पारंपरिक उपचारों से बचने की स्पष्ट सलाह देता है।
काटे हुए स्थान पर चीरा न लगाएं
सर्पदंश के बाद घाव पर ब्लेड या किसी धारदार वस्तु से चीरा लगाना खतरनाक हो सकता है। इससे अनावश्यक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह मुंह से जहर चूसने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए।
WHO की आपातकालीन गाइडलाइन में घाव को काटने और जहर चूसने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है।
कसकर रस्सी या पट्टी बांधने से बचें
सर्पदंश के स्थान के ऊपर कसकर रस्सी, तार या टूर्निकेट बांधना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे रक्त प्रवाह बाधित होकर अंग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। WHO सामान्य रूप से टाइट आर्टेरियल टूर्निकेट का इस्तेमाल न करने की सलाह देता है।
उल्टी होने पर करवट में रखें
यदि सर्पदंश के बाद पीड़ित को उल्टी हो रही है या वह बेहोशी जैसी स्थिति में है, तो उसकी सांस की नली सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। WHO ऐसी स्थिति में व्यक्ति को करवट, विशेषकर बाईं ओर recovery position में रखने की सलाह देता है।
एंटीवेनम से मिलता है प्रभावी उपचार
जहरीले सांप के काटने पर अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकता के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम यानी एंटीवेनम दिया जा सकता है। WHO के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाला snake antivenom जहरीले सर्पदंश के अधिकांश विषैले प्रभावों को रोकने या उलटने का प्रभावी उपचार है।
इसलिए सर्पदंश के बाद सबसे जरूरी कदम यह है कि पीड़ित को जल्द से जल्द ऐसी स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाया जाए, जहां प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी और आवश्यक उपचार उपलब्ध हो।
बारिश के मौसम में विशेष सावधानी जरूरी
बारिश और बाढ़ के दौरान सांपों के अपने सामान्य ठिकानों से बाहर आने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में खेतों, झाड़ियों, लकड़ी या निर्माण सामग्री के ढेर और घर के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
रात में बाहर निकलते समय टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का इस्तेमाल करें। घर के आसपास अनावश्यक कचरा और ऐसी सामग्री जमा न होने दें, जहां सांप छिप सकते हैं। WHO भी घरों और आसपास के क्षेत्रों में सांपों के संभावित ठिकानों को कम करने तथा रात में रोशनी का इस्तेमाल करने की सलाह देता है।
समय पर अस्पताल पहुंचाना ही सबसे महत्वपूर्ण
सर्पदंश की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। अंधविश्वास या घरेलू उपचार के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी होने से स्थिति गंभीर हो सकती है। WHO सर्पदंश को चिकित्सकीय आपातस्थिति मानता है और शीघ्र चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने पर जोर देता है।
मध्यप्रदेश शासन का जागरूकता संदेश भी इसी दिशा में है कि लोग सर्पदंश को लेकर भ्रम और अंधविश्वास से बचें तथा पीड़ित को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं।
याद रखें
सांप काटने पर घबराएं नहीं। पीड़ित को शांत रखें, उसे कम से कम हिलाएं-डुलाएं, प्रभावित अंग को स्थिर रखें और बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाएं। घाव पर चीरा न लगाएं, जहर चूसने की कोशिश न करें और कसकर टूर्निकेट न बांधें।
सर्पदंश में झाड़-फूंक नहीं, समय पर चिकित्सकीय उपचार ही सबसे जरूरी है।
