धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया महामोक्ष कल्याणक
क्लर्क कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में श्रावण शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का महामोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान को 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। धार्मिक कार्यक्रमों के चलते मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। समाजजनों ने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना में सहभागिता की और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
अभिषेक और शांतिधारा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6:30 बजे भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक और शांतिधारा से हुई। विधि-विधान के साथ भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद देव, शास्त्र और गुरु की आराधना करते हुए भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के गुणों का स्मरण किया और धार्मिक मंत्रों का जाप किया। इसके पश्चात निर्वाण कांड पाठ का वाचन किया गया। धार्मिक विधियों के पूर्ण होने के बाद भगवान पार्श्वनाथ को 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
23वें तीर्थंकर को 23 किलो का निर्वाण लाडू अर्पित
महामोक्ष कल्याणक महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित किया गया 23 किलो का निर्वाण लाडू रहा। 23वें तीर्थंकर के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर 23 किलो का लाडू अर्पित कर समाजजनों ने अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की।
जैन धार्मिक परंपरा में तीर्थंकरों के निर्वाण कल्याणक का विशेष महत्व माना जाता है। निर्वाण लाडू अर्पित करने की परंपरा भगवान के मोक्ष की स्मृति और उनके त्याग, तप, संयम तथा आध्यात्मिक साधना के प्रति श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है।
भव्य आरती में शामिल हुए समाजजन
निर्वाण लाडू चढ़ाने के बाद भगवान पार्श्वनाथ की भव्य आरती की गई। आरती के दौरान बड़ी संख्या में समाजजन मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ आरती में हिस्सा लिया और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे लगाए।
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को महामोक्ष कल्याणक की शुभकामनाएं दीं और भगवान पार्श्वनाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और मोक्ष से जुड़ी मान्यता
प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि जैन परंपरा में भगवान पार्श्वनाथ को 23वें तीर्थंकर के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर तप और साधना का मार्ग अपनाया।
जैन मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ को सम्मेद शिखरजी के स्वर्ण कूट से कई अन्य मुनियों के साथ मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण उनके निर्वाण कल्याणक को जैन समाज में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

त्याग, तप और अहिंसा का दिया संदेश
भगवान पार्श्वनाथ का जीवन जैन समाज के लिए त्याग, तप, संयम और अहिंसा की प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। महामोक्ष कल्याणक के आयोजन के माध्यम से समाजजनों ने उनके जीवन एवं उपदेशों को स्मरण किया।
धार्मिक कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। संयम, सत्य, अहिंसा और आत्मशुद्धि जैसे सिद्धांतों को जीवन में अपनाने से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
महामोक्ष कल्याणक महोत्सव में जैन समाज के अनेक गणमान्य सदस्य और श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में एम.के. जैन, आनंद-नवीन गोधा, दिलीप बज, संजय जैन, विशाल जैन, एस.के. सोगानी, मनीष जैन, सिद्धार्थ गंगवाल, राकेश जैन, शम्भू पाटोदी, पदम जैन और अशोक मोदी सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
सभी श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करते हुए भगवान पार्श्वनाथ का स्मरण किया और महोत्सव का धर्मलाभ प्राप्त किया।
मंदिर में दिनभर रहा भक्तिमय माहौल
महामोक्ष कल्याणक के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष उत्साह देखने को मिला। अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, निर्वाण कांड पाठ और आरती जैसे धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन कर अपने परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की। धार्मिक आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।
धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम के माध्यम से जैन समाज ने भगवान पार्श्वनाथ की धार्मिक परंपराओं और उनके संदेशों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। समाजजनों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को जैन धर्म की परंपराओं, तीर्थंकरों के जीवन और उनके आध्यात्मिक संदेशों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भगवान पार्श्वनाथ का महामोक्ष कल्याणक महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, त्याग और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दी।
श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ आयोजन
क्लर्क कॉलोनी दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित महामोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। 23 किलो के निर्वाण लाडू का अर्पण, विशेष अभिषेक, शांतिधारा, पूजा, निर्वाण कांड पाठ और भव्य आरती ने आयोजन को विशेष बना दिया।
समाजजनों ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा ली। महोत्सव ने जैन समाज की धार्मिक आस्था, एकजुटता और आध्यात्मिक परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
