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बम्होरी : 10 साल से पानी को तरस रहे 89 बच्चे, करंट के खतरे के बीच पढ़ाई; जर्जर शौचालय और अधूरा किचन शेड

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Published On: 18 August 2026
बम्होरी

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10 साल से पानी को तरस रहे 89 बच्चे, करंट के खतरे के बीच पढ़ाई; जर्जर शौचालय और अधूरा किचन शेड

जिम्मेदारों से बोले बच्चे—समस्या हल नहीं हुई तो अब सड़क पर उतरेंगे

बम्होरी। मध्यप्रदेश के जिला रायसेन के तहसील सिलवानी के ग्राम पंचायत गुंदरई अर्जनी के ग्राम गुंदरई स्थित एकीकृत माध्यमिक शाला में अध्ययनरत 89 बच्चे पिछले करीब 10 वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानी झेल रहे हैं। स्कूल परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को पानी लेने के लिए अपने घर जाना पड़ता है। मध्यान्ह भोजन के बाद प्लेटें धोने के लिए भी बच्चों को घर का रास्ता पकड़ना पड़ता है। ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा पंचायत से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

समस्याओं से जूझ रहा स्कूल

स्कूल भवन में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। बारिश के दौरान स्कूल की छत से पानी टपकता है। शौचालय जर्जर हालत में हैं। इनमें नियमित साफ-सफाई नहीं होने के साथ पर्याप्त दरवाजे भी नहीं हैं। स्कूल की छत पर बनाया जा रहा किचन शेड भी अधूरा पड़ा है। स्थिति यह है कि किचन शेड तक पहुंचने के लिए सीढ़ी तक नहीं बनाई गई है।

स्कूल परिसर की रास्ते की ओर बनी दीवार भी झुक गई है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है। वहीं स्कूल की एक खिड़की भी टूट चुकी है। बारिश के मौसम में परिसर में जगह-जगह खरपतवार उग आई है, लेकिन लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

छत से गुजर रही बिजली की डोरी, हादसे का खतरा

स्कूल की छत से बिजली की डोरी गुजर रही है। बारिश के मौसम में यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली के तार में करंट फैलता है तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदारों द्वारा इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

भोजन बनाने वाले कमरे की छत भी टपकती है = अध्यक्ष लक्ष्मी बाई स्व सहायता समूह गुंदरई

मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले कमरे की छत भी बारिश के दौरान टपकती है। ऐसे में भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल में पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण मध्यान्ह भोजन के बर्तन धोने में भी परेशानी होती है।

अब आंदोलन की तैयारी में बच्चे और ग्रामीण

करीब एक दशक से मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान बच्चों वैष्णवी धाकड़,मानवी, शिवानी और ग्रामीणों शोएब खान,राघवेंद्र लोधी,अनिल गौर सहित ग्रामवासियों का अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि जल्द ही स्कूल में पानी, शौचालय, बिजली के तार, किचन शेड, भवन की मरम्मत और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो बच्चे और ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल की समस्याओं का तत्काल निरीक्षण कराकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

प्राचार्य बोले—पानी की व्यवस्था नहीं, इसी से बढ़ रही परेशानी

स्कूल प्राचार्य भरत राजपूत ने बताया कि स्कूल परिसर में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

वहीं बीईओ रूपेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा, “आपके माध्यम से मुझे जानकारी मिल रही है। जांच करवाकर समस्या का हल किया जाएगा।”

अब देखना यह है कि करीब दस वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए इंतजार कर रहे इन 89 बच्चों की समस्या कब तक दूर होती है और जिम्मेदार विभाग बच्चों की सुरक्षा एवं सुविधाओं को लेकर कब गंभीर कदम उठाता है।

10 साल से पानी को तरस रहे 89 बच्चे, करंट के खतरे के बीच पढ़ाई; जर्जर शौचालय और अधूरा किचन शेड

अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आसपास के गांवों से आते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन पानी, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और बारिश के मौसम में भवन तथा बिजली के तारों से जुड़ा खतरा और बढ़ जाता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने प्रशासन से स्कूल परिसर का तकनीकी निरीक्षण कराने, बिजली के तार को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने, क्षतिग्रस्त दीवार और खिड़की की मरम्मत कराने तथा नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं तो संभावित दुर्घटना को रोका जा सकता है और बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सकता है।

अधूरे किचन शेड और टपकती छत से बढ़ी परेशानी

विद्यालय में अधूरे पड़े किचन शेड और टपकती छत को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार मध्यान्ह भोजन बच्चों के पोषण का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए भोजन तैयार करने और बर्तन साफ करने के लिए पर्याप्त एवं स्वच्छ व्यवस्था होना जरूरी है। बारिश के दौरान किचन की छत से पानी टपकने के कारण भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर विद्यालय की सभी समस्याओं का निरीक्षण करे और प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए समयसीमा तय करे। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम दिखाई देना चाहिए। यदि जल्द ही पानी, शौचालय, बिजली के तार, भवन मरम्मत और साफ-सफाई जैसी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बच्चे और ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

शिक्षकों और विद्यार्थियों को रोज उठानी पड़ रही परेशानी

विद्यालय में पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने का असर विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों और मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। बच्चों को पीने के पानी के लिए घर जाना पड़ता है, वहीं भोजन के बाद प्लेट और अन्य बर्तन साफ करने के लिए भी पानी की समस्या बनी रहती है। इससे पढ़ाई के समय का भी नुकसान होता है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय जैसी जगह पर पेयजल और स्वच्छता की सुविधा सबसे प्राथमिक आवश्यकता है। लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

समयसीमा में समाधान की मांग, प्रशासन के जवाब पर नजर

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय का तत्काल निरीक्षण कर सभी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाए। उनका कहना है कि बिजली के तार, झुकी हुई दीवार और जर्जर शौचालय जैसी समस्याएं सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इसलिए इनके समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन द्वारा कराई जाने वाली जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है। यदि अधिकारियों की ओर से जल्द ठोस कदम उठाए जाते हैं तो वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान संभव है। वहीं कार्रवाई में देरी होने पर ग्रामीणों और विद्यार्थियों द्वारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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