रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए केवल 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त
28 अगस्त को सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा राखी बांधने का श्रेष्ठ समय, भद्रा के कारण शुभ मुहूर्त हुआ सीमित
मुरैना (मनोज जैन नायक)। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांधना विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष तिथि परिवर्तन और भद्रा के संयोग के कारण राखी बांधने के लिए शुभ समय अपेक्षाकृत कम रहेगा।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए केवल 3 घंटे 51 मिनट का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि बहनें 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे के बीच भाइयों को राखी बांध सकती हैं।
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन
भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। भाई भी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार देते हैं।
इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर शुभ मुहूर्त की अवधि को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार तिथि और भद्रा के संयोग के कारण राखी बांधने के लिए उपयुक्त समय सीमित रहेगा।
27 अगस्त से शुरू होगी पूर्णिमा तिथि
डॉ. जैन के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 9:09 बजे से प्रारंभ होगी और 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9:48 बजे समाप्त हो जाएगी। पूर्णिमा समाप्त होने के बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी।
रक्षाबंधन पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने के कारण उसी दिन प्रातःकाल राखी बांधने का शुभ समय माना गया है।
सुबह 5:57 से 9:48 तक रहेगा शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक 28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:57 बजे होगा और पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। इस अवधि में रक्षाबंधन का पर्व मनाना श्रेष्ठ रहेगा।
इस प्रकार राखी बांधने के लिए कुल 3 घंटे 51 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।
शुभ मुहूर्त:
28 अगस्त, शुक्रवार
सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक
कुल अवधि: 3 घंटे 51 मिनट
भद्रा के कारण समय का विशेष महत्व
डॉ. जैन ने बताया कि 27 अगस्त को सुबह 9:09 बजे से रात 9:21 बजे तक भद्रा रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल के दौरान रक्षाबंधन जैसे शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है।
इसी कारण इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त की सुबह शुभ मुहूर्त में मनाना अधिक उचित माना जा रहा है। भद्रा की स्थिति और पूर्णिमा तिथि के समय को देखते हुए सुबह का मुहूर्त विशेष महत्व रखता है।

सुबह जल्दी राखी बांधने की चुनौती
आधुनिक जीवनशैली में भाई-बहनों के लिए सुबह जल्दी उठकर रक्षाबंधन की रस्म पूरी करना कुछ कठिन हो सकता है। नौकरी, व्यवसाय और अन्य जिम्मेदारियों के कारण कई परिवारों के लिए सुबह का समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके बावजूद धार्मिक मान्यताओं में शुभ तिथि और मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से ज्योतिषाचार्य ने निर्धारित समय के भीतर ही राखी बांधने और बंधवाने की सलाह दी है।
शुभ मुहूर्त में राखी बांधना शुभता का प्रतीक
भारतीय परंपरा में राखी केवल भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। बहन राखी बांधते समय भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन पर भी शुभ समय का ध्यान रखने की परंपरा रही है।
बहनें भाई की सुख-समृद्धि की करें मंगलकामना
डॉ. जैन ने कहा कि बहनों को निर्धारित शुभ मुहूर्त में भाइयों को राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की मंगलकामना करनी चाहिए। वहीं भाइयों को भी बहनों के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का संकल्प दोहराना चाहिए।
रक्षाबंधन का वास्तविक उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और आत्मीयता को मजबूत करना है। ऐसे में शुभ मुहूर्त के साथ परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर पर्व की खुशियां साझा करनी चाहिए।
इस बार सुबह का समय रहेगा खास
इस वर्ष रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त सीमित होने के कारण परिवारों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी जा रही है। राखी, पूजा सामग्री और अन्य आवश्यक सामान पहले से तैयार रखने पर सुबह के शुभ समय में आसानी से पूजा और राखी बांधने की रस्म पूरी की जा सकती है।
28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय रक्षाबंधन के लिए प्रमुख शुभ अवधि रहेगा। धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले परिवार इस अवधि में राखी बांधने की रस्म पूरी कर सकते हैं।
मुरैना से मनोज जैन नायक की रिपोर्ट।
