ग्राम पिपरिया में निकली भव्य हरियाली कलश यात्रा, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
संवाददाता : अभिषेक द्विवेदी
कोतमा। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में विकासखंड कोतमा के सेक्टर क्रमांक-03 अंतर्गत ग्राम पिपरिया में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। नवांकुर संस्था मां अंबे सेवा समिति के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में नवांकुर सखियों, ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को पौधारोपण एवं पौधों की देखभाल से जोड़ना रहा।
श्रीराम नाम के जयघोष के साथ निकली कलश यात्रा
कार्यक्रम के तहत ग्राम पिपरिया से हरियाली कलश यात्रा एवं शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में नवांकुर सखियां और ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। श्रीराम नाम के गीतों और भक्ति भाव के साथ निकली यात्रा ने पूरे गांव में उत्साह एवं सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया।
ग्रामीणों ने भी यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर हरियाली कलश धारण कर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश दिया। यात्रा का समापन ग्राम पिपरिया स्थित शिव मंदिर में हुआ, जहां भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया गया।
पौधारोपण के साथ संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम में विकासखंड समन्वयक सरीमन साकेत ने उपस्थित ग्रामीणों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों का संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बड़े होने तक नियमित देखभाल करना भी जरूरी है। इस दौरान उपस्थित नवांकुर सखियों को बीज रोपित पॉलीथिन थैलियां प्रदान की गईं और पौधों के संरक्षण का संकल्प दिलाया गया।

नवांकुर सखियों को बताए दायित्व
परामर्शदाता रश्मि रैकवार ने नवांकुर सखियों को उनके कार्य एवं दायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नवांकुर सखियां अपने गांव में पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि उन्हें प्रदान की गई बीज थैलियों को एक वर्ष तक सुरक्षित रखा जाए। इसके बाद तैयार पौधों को घर, खेत और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाए तथा उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े स्तर पर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
हरित ग्राम के निर्माण में जनभागीदारी जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जब ग्रामीण स्वयं पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे आएंगे, तभी स्थायी बदलाव संभव होगा।
हरियाली यात्रा के माध्यम से ग्रामीणों को पेड़-पौधों के महत्व, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
समिति पदाधिकारियों और ग्रामीणों की सहभागिता
कार्यक्रम में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति पिपरिया के अध्यक्ष सुनील राव एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति पिपरिया, नगर विकास प्रस्फुटन समिति कोतमा से अजय शर्मा, सीएमसीएलडीपी छात्र, नवांकुर सखियां तथा बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में नवांकुर संस्था प्रतिनिधि दिलीप शुक्ला का भी अपेक्षित सहयोग रहा। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और गांव में हरियाली बढ़ाने के अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान बनाने का प्रयास
आयोजकों ने बताया कि नवांकुर संस्था और नवांकुर सखियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हरियाली यात्रा का उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम न बनाकर नियमित जनअभियान का स्वरूप देना है।
कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक परिवार यदि अपने घर, खेत और आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाए तथा उनकी नियमित देखभाल करे तो आने वाले समय में गांव अधिक हरा-भरा और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित बन सकता है।
हरियाली कलश यात्रा, शिव पूजन, बीज वितरण और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीणों के बीच जागरूकता का प्रभावी माध्यम बना। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य करने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया।
