टपकती छत के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे, पार्षद कुणाल सोलंकी ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
एक साल से शिकायत के बावजूद नहीं सुधरी स्कूल की छत, अधूरे शौचालयों को लेकर भी उठे सवाल
Indore । बारिश शुरू होते ही शहर के सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुलने लगी है। स्कूल भवन की जर्जर और टपकती छत के बीच बच्चों को पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्कूल में कई जगह पानी टपकने के कारण कक्षाओं में बाल्टियां और टाट रखने की स्थिति बन गई है। वहीं शौचालयों का निर्माण भी अधूरा होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले की जानकारी मिलने पर पार्षद कुणाल सोलंकी ने स्कूल का निरीक्षण किया और मौके पर सामने आई बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर नगर निगम एवं प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों को समस्या का तत्काल निराकरण करने के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया है।
‘ऊपर की चादर दिखाओ भैया’
स्कूल निरीक्षण के दौरान पार्षद कुणाल सोलंकी ने कक्षा की छत की स्थिति देखते हुए संबंधित लोगों से छत की ऊपर लगी चादर दिखाने को कहा। उन्होंने बताया कि स्कूल की छत की समस्या को लेकर करीब एक वर्ष पहले नगर निगम के इंजीनियर हर्ष गहलोत को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
बारिश के दौरान छत से पानी कक्षा में गिर रहा है। ऐसे में बच्चों के बैठने की जगह पर पानी जमा हो जाता है और पढ़ाई प्रभावित होती है। कक्षाओं में पानी से बचाव के लिए बाल्टियां और टाट रखने पड़ रहे हैं।
एक साल से दे रहे लेटर, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
पार्षद सोलंकी ने कहा कि स्कूल की छत को लेकर करीब एक साल से लगातार शिकायतें की जा रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बार-बार कहने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्कूल में बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं और बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, तब भवन की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।
अधूरे शौचालयों पर भी नाराजगी
निरीक्षण के दौरान स्कूल के शौचालयों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए। पार्षद ने बताया कि स्कूल में बाथरूम और शौचालयों का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उनका कहना था कि जिस स्थान पर बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, वहां मूलभूत सुविधाएं तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल शुरू हो चुके हैं और बच्चे रोजाना यहां पढ़ने आ रहे हैं। ऐसे में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अधूरा रहना गंभीर विषय है।

बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
पार्षद ने कहा कि बारिश के दौरान छत से पानी गिरना केवल पढ़ाई में बाधा का विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है। कक्षा में पानी गिरने से फर्श पर फिसलन और अन्य दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उनके सिर पर टपकती हुई छत नहीं। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम
कुणाल सोलंकी ने मौके से ही प्रशासन को सात दिन का समय देते हुए स्कूल की छत की समस्या को तत्काल ठीक कराने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बच्चों को साथ लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचेंगे और पूरे मामले को प्रशासन के सामने रखेंगे।
उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। लंबे समय से लंबित समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि बारिश के दौरान बच्चों को परेशान न होना पड़े।
‘मामला राजनीति का नहीं, बच्चों का है’
पार्षद सोलंकी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल या राजनीति से जुड़ा हुआ नहीं है। उनका कहना था कि मामला सीधे बच्चों की सुविधा और सुरक्षा से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई कर सकें। यदि बारिश के दौरान उन्हें टपकती छत के नीचे बैठना पड़े और मूलभूत सुविधाएं भी अधूरी हों, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई का इंतजार
स्कूल निरीक्षण के बाद अब नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। पार्षद द्वारा सात दिन का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एक वर्ष से लंबित छत की समस्या को कितनी जल्दी दूर किया जाता है और अधूरे शौचालयों का काम कब पूरा होता है।
फिलहाल बारिश के बीच स्कूल की बदहाल स्थिति ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
