Indore Lokayukta Raid: नगर निगम के ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी, 80 लाख आय के मुकाबले 2.53 करोड़ खर्च का दावा
Indore Lokayukta Raid: मध्य प्रदेश के इंदौर में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 की सुबह लोकायुक्त की टीम ने अधिकारी से जुड़े इंदौर के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। दोनों स्थानों पर दस्तावेजों, संपत्तियों, वाहनों और अन्य निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में लोकायुक्त पुलिस ने अधिकारी की वैध आय और उनके द्वारा किए गए कथित खर्च के बीच बड़ा अंतर मिलने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार, करीब 31 वर्ष के सेवाकाल में जितेंद्र कुमार पांडेय को लगभग 80 लाख रुपये वेतन के रूप में प्राप्त होने का अनुमान है, जबकि जांच में अब तक करीब 2.53 करोड़ रुपये के खर्च का पता चलने की बात कही गई है।
लोकायुक्त के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यह अंतर करीब 1.73 करोड़ रुपये का है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़े फिलहाल शुरुआती जांच पर आधारित हैं। सभी दस्तावेजों और संपत्तियों के सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति का अंतिम आकलन किया जाएगा।
दो ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
Indore लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार सुबह जितेंद्र कुमार पांडेय से जुड़े दो ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की। टीम द्वारा मकान और अन्य संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसके अलावा बैंक खातों, निवेश, निर्माण कार्यों, वाहन खरीद और अन्य खर्चों से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अधिकारी की घोषित और वैध आय की तुलना में अर्जित संपत्ति तथा किए गए खर्च का मिलान करना है। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अधिकारी के सेवाकाल के दौरान उनकी आय के मुकाबले संपत्तियों और खर्च में कितना अंतर रहा।
31 साल की सेवा, करीब 80 लाख वेतन का अनुमान
Indore लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, जितेंद्र कुमार पांडेय इंदौर नगर निगम में करीब 31 वर्षों से सेवा में हैं। प्रारंभिक गणना के आधार पर उनके पूरे सेवाकाल में लगभग 80 लाख रुपये की वेतन आय होने का अनुमान लगाया गया है।
वहीं, जांच के दौरान करीब 2.53 करोड़ रुपये के खर्च और संपत्ति से संबंधित जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर यह खर्च उनकी वैध आय से करीब 1.73 करोड़ रुपये अधिक बताया जा रहा है।
जांच एजेंसी अब यह निर्धारित करने में जुटी है कि संपत्तियों की खरीद, निर्माण, वाहन और अन्य निवेश के लिए धन का स्रोत क्या था।
पत्नी के नाम संपत्तियों की भी जांच
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। टीम के अनुसार, आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा-चितावद क्षेत्र में करीब 40×50 फीट के प्लॉट पर G+3 भवन बना हुआ है।
इस भवन के निर्माण पर लगभग 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त टीम अब इस निर्माण की वास्तविक लागत, जमीन की खरीद और धन के स्रोत से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
इसके अलावा गजाधर नगर, चितावद स्थित गुलमोहर का बगीचा क्षेत्र में पत्नी के नाम एक अन्य प्लॉट पर G+2 भवन होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस भवन में हॉस्टल संचालित हो रहा है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
इन दोनों संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और निर्माण लागत का सत्यापन लोकायुक्त टीम द्वारा किया जा रहा है।
पत्नी और बच्चों के नाम वाहन
जांच के दौरान अधिकारी के परिवार के सदस्यों के नाम खरीदे गए वाहनों की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है। लोकायुक्त के अनुसार, पांडेय की पत्नी, बेटे और बेटी के नाम कुल चार फोर-व्हीलर और दो टू-व्हीलर खरीदे जाने की जानकारी मिली है।
वाहनों की खरीद और उनसे संबंधित अन्य खर्च को मिलाकर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। टीम इन वाहनों की खरीद के स्रोत और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की जांच के दौरान लोकायुक्त टीम संपत्ति के दस्तावेज, जमीन की खरीद, भवन निर्माण, वाहन, बैंक लेन-देन, निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है।
अंतिम आकलन जांच पूरी होने के बाद
लोकायुक्त की कार्रवाई अभी जारी है और दोनों ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़ों को अंतिम नहीं माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि सभी संपत्तियों और खर्चों के दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही यह तय होगा कि अधिकारी के पास वास्तव में कितनी अनुपातहीन संपत्ति है। साथ ही, संपत्ति और खर्च के स्रोत की भी जांच की जाएगी।
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई जारी है। दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और आय से अधिक संपत्ति का अंतिम आकलन सामने आने की उम्मीद है।
