एमपी में टोल वसूली पर बड़ा सवाल: 1,360 करोड़ की तीन सड़कों से 7,225 करोड़ की वसूली, 2038 तक जारी रहेगा टोल
भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन प्रमुख फोरलेन सड़कों पर टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव मार्गों की मूल निर्माण लागत करीब 1,360 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके मुकाबले इन सड़कों से अब तक हजारों करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक इन तीनों मार्गों से कुल 7,225.76 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हो चुका है।
मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन परियोजनाओं की मूल लागत के मुकाबले कई गुना राशि पहले ही वसूली जा चुकी है, तो इन मार्गों पर आने वाले वर्षों तक टोल वसूली क्यों जारी रहेगी। सरकार ने इसके पीछे परियोजनाओं की संशोधित लागत और अन्य वित्तीय प्रावधानों का हवाला दिया है।
1,360 करोड़ की मूल लागत, अब संशोधित लागत 7,818 करोड़
तीनों सड़क परियोजनाओं की शुरुआती लागत करीब 1,360 करोड़ रुपये थी। हालांकि बाद में परियोजनाओं की लागत में बदलाव किया गया और सरकार के नए आंकड़ों के अनुसार इनकी संशोधित लागत बढ़कर 7,818.57 करोड़ रुपये हो गई है।
इसी संशोधित लागत को आधार बनाकर टोल वसूली की अवधि आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग मार्गों पर टोल वसूली वर्ष 2033 से लेकर 2038 तक जारी रह सकती है।
इस पूरे मामले में मूल लागत और संशोधित लागत के बीच बड़ा अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब तक 7,225 करोड़ रुपये से ज्यादा का टोल कलेक्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव मार्गों से कुल 7,225.76 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा चुके हैं।
यानी इन तीनों सड़कों की शुरुआती निर्माण लागत से कई गुना अधिक राशि टोल के जरिए एकत्र की जा चुकी है। हालांकि सरकार ने परियोजनाओं की लागत में हुए संशोधन और अन्य प्रावधानों को आधार बनाकर टोल वसूली को आगे जारी रखने की व्यवस्था बताई है।
देवास-भोपाल मार्ग पर 1,889 करोड़ की वसूली
देवास-भोपाल फोरलेन सड़क की मूल परियोजना लागत 345.64 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके मुकाबले जून 2025 तक इस मार्ग से 1,889.51 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा चुके थे।
यह राशि मूल परियोजना लागत की करीब 546 प्रतिशत बताई गई है। बाद में इस मार्ग की संशोधित लागत 1,934.02 करोड़ रुपये बताई गई।
सरकार की योजना के अनुसार इस मार्ग पर 21 मई 2033 तक टोल वसूली जारी रखने का प्रावधान है। इसमें चेंज ऑफ स्कोप के तहत टोल अवधि में करीब चार से पांच वर्ष तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है।
जावरा-नयागांव से 2,450 करोड़ रुपये की वसूली
जावरा-नयागांव फोरलेन मार्ग की मूल निर्माण लागत करीब 425.71 करोड़ रुपये थी। इस मार्ग से जून 2025 तक 2,450.02 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन किया जा चुका था।
सरकार के नए आंकड़ों में इस परियोजना की संशोधित लागत 2,873.95 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके साथ ही टोल वसूली की अवधि 26 अक्टूबर 2033 तक निर्धारित की गई है।
मूल लागत की तुलना में अब तक हुई वसूली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और इसी वजह से यह परियोजना टोल वसूली के विवाद के केंद्र में है।
लेबड़-जावरा मार्ग पर 2,182 करोड़ का टोल
लेबड़-जावरा फोरलेन की मूल निर्माण लागत 589.31 करोड़ रुपये बताई गई थी। जून 2025 तक इस मार्ग से 2,182.80 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा चुके थे।
सरकार के संशोधित आंकड़ों के मुताबिक अब इस परियोजना की लागत 3,010.60 करोड़ रुपये मानी गई है। इस मार्ग पर टोल वसूली 27 अप्रैल 2038 तक जारी रहने का प्रावधान है।
यानी इस मार्ग पर आने वाले कई वर्षों तक वाहन चालकों को टोल का भुगतान करना पड़ सकता है।
2038 तक जारी रह सकती है टोल वसूली
तीनों परियोजनाओं में सबसे लंबी टोल वसूली अवधि लेबड़-जावरा मार्ग की है। यहां अप्रैल 2038 तक टोल वसूली का प्रावधान बताया गया है।
वहीं देवास-भोपाल मार्ग पर मई 2033 और जावरा-नयागांव मार्ग पर अक्टूबर 2033 तक टोल वसूली की व्यवस्था है। सरकार द्वारा संशोधित परियोजना लागत के आधार पर इन अवधियों को तय किया गया है।
इस व्यवस्था ने वाहन चालकों और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यह सवाल खड़ा किया है कि टोल की अवधि आखिर कितने समय तक जारी रहेगी और संशोधित लागत तय करने का आधार क्या है।
तीन साल में 46 प्रतिशत बढ़ा ट्रैफिक
देवास-भोपाल मार्ग पर टोल वसूली के साथ यातायात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में इस मार्ग पर वाहनों की संख्या 35.74 लाख से बढ़कर 52.16 लाख हो गई।
इस तरह इस मार्ग पर यातायात में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाहनों की संख्या बढ़ने से टोल कलेक्शन में भी इजाफा हुआ है।
लगातार बढ़ते यातायात को देखते हुए यह मार्ग प्रदेश के प्रमुख परिवहन कॉरिडोर में शामिल होता जा रहा है।
गजट अधिसूचना से पहले टोल वसूली का भी आरोप
इस पूरे मामले में टोल वसूली की प्रक्रिया को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ मार्गों पर आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी होने से पहले ही टोल वसूली शुरू कर दी गई थी।
बताया गया है कि भोपाल बायपास, इंदौर-उज्जैन, सागर-दमोह और महू-घाटाबिल्लोद जैसे मार्गों पर गजट अधिसूचना जारी होने से पहले टोल वसूली शुरू किए जाने के मामले सामने आए हैं।
भोपाल बायपास के लिए 12 दिसंबर 2019, इंदौर-उज्जैन के लिए 21 जनवरी 2022, सागर-दमोह के लिए 28 फरवरी 2021 और महू-घाटाबिल्लोद मार्ग के लिए 28 फरवरी 2021 की तारीखों का उल्लेख किया गया है।
टोल व्यवस्था को लेकर उठ रहे पारदर्शिता के सवाल
तीन प्रमुख सड़कों की मूल लागत और अब तक हुई टोल वसूली के बीच भारी अंतर के कारण पूरी टोल व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब संशोधित लागत के आधार पर टोल वसूली की अवधि कई वर्षों तक बढ़ाई जा रही है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि परियोजना की लागत किन कारणों से बढ़ी, संशोधित लागत कैसे निर्धारित की गई और टोल की अवधि बढ़ाने के लिए कौन-कौन से वित्तीय एवं संविदात्मक प्रावधान लागू किए गए।
वाहन चालकों पर लंबे समय तक रहेगा टोल का बोझ
मध्य प्रदेश में इन प्रमुख मार्गों से रोजाना बड़ी संख्या में कार, बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में टोल वसूली की अवधि बढ़ने का सीधा असर वाहन चालकों और परिवहन कारोबार पर पड़ता है।
लंबे समय तक टोल जारी रहने से माल परिवहन की लागत भी प्रभावित हो सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर आम लोगों तक पहुंच सकता है।
फिलहाल सरकार के संशोधित आंकड़ों और टोल अवधि को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में यदि परियोजनाओं की लागत, टोल कलेक्शन और वसूली अवधि से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं, तो इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
