FCRA बिल पर घमासान के बीच JPC का गठन, 31 सदस्य करेंगे विधेयक की समीक्षा
20 जुलाई की घटना पर चर्चा को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव कम होता नजर नहीं आ रहा है। सत्र के अंतिम दौर में भी दोनों सदनों में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। 20 जुलाई की घटना पर गृह मंत्री अमित शाह ने 24 घंटे की चर्चा का प्रस्ताव रखा, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
गृह मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 20 जुलाई की घटना पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि लगातार 24 घंटे चर्चा हो और इस दौरान वह सदन में मौजूद रहकर सभी सवालों का जवाब देंगे।
विपक्ष ने मांगा सीधा जवाब
विपक्ष ने सरकार के प्रस्ताव पर असहमति जताई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को लंबा भाषण नहीं, बल्कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े एक महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब चाहिए।
विपक्ष की ओर से पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया, इस सवाल को प्रमुखता से उठाया गया। विपक्ष ने कहा कि वह लंबी बहस के बजाय इस सवाल पर सीधा जवाब चाहता है।
FCRA बिल को JPC के पास भेजा गया
इसी बीच विदेशी फंडिंग और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बिल को JPC को भेजने का प्रस्ताव रखा।
विपक्ष ने बिल को लेकर कई सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि इसके प्रावधान अल्पसंख्यकों तथा गैर-सरकारी संगठनों को प्रभावित कर सकते हैं।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से बिल में ऐसा कोई प्रावधान बताने की चुनौती दी, जो किसी विशेष समुदाय के खिलाफ हो।
रिजिजू ने यह भी कहा कि जब विपक्ष पहले बिल को JPC में भेजने की मांग कर रहा था, तो अब उसे JPC को भेजे जाने पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए।
अखिलेश यादव और रिजिजू के बीच तीखी बहस
FCRA बिल को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने 20 जुलाई की घटना पर प्रस्तावित चर्चा का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
इसके बाद रिजिजू ने विपक्ष से फिर कहा कि वह बिल में किसी भी अल्पसंख्यक विरोधी प्रावधान को सामने लाकर दिखाए। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
31 सदस्यीय JPC करेगी बिल की समीक्षा
लोकसभा ने ध्वनि मत से FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का निर्णय लिया। समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे।
समिति को चालू वर्ष के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करनी होगी।
सत्र के अंतिम चरण में भी जारी रहा गतिरोध
संसद का मानसून सत्र अब समाप्त होने वाला है, लेकिन अंतिम दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। एक ओर सरकार 20 जुलाई की घटना पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष सीधे जवाब की मांग पर कायम है।
दूसरी ओर FCRA बिल को JPC भेजे जाने से इस मुद्दे पर तत्काल टकराव कुछ हद तक टला है, लेकिन आने वाले समय में समिति की समीक्षा और रिपोर्ट के दौरान इस पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मानसून सत्र के अंतिम दौर में 20 जुलाई की घटना और FCRA बिल दो प्रमुख मुद्दे बने रहे, जिनको लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान जारी रही।
