वर्तमान ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय, इसी क्षण में बदलाव संभव: साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब
रिपोर्ट : सचिन भंडारी
महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सानिध्य में बुधवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न श्रीसंघों के सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने जीवन में वर्तमान समय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को प्रेरणादायी संदेश दिया।
साध्वीश्री ने कहा कि “भूतकाल एक सपना है, भविष्य काल एक कल्पना है, लेकिन वर्तमान सिर्फ अपना है।” उन्होंने इस विचार को विस्तार से समझाते हुए कहा कि बीता हुआ समय अब केवल स्मृतियों का हिस्सा है, जबकि आने वाला समय अभी हमारे सामने नहीं आया है। मनुष्य के पास वास्तविक रूप से केवल वर्तमान क्षण ही है, जिसमें वह अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में बदलाव कर सकता है।
बीता कल केवल स्मृति, आने वाला कल कल्पना
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य अक्सर अपने बीते हुए समय को लेकर चिंतित रहता है। कभी पुरानी गलतियों का पश्चाताप करता है तो कभी बीती सफलताओं को याद करके वर्तमान से दूर हो जाता है। इसी तरह भविष्य को लेकर भी मन में अनेक प्रकार की आशंकाएं और कल्पनाएं बनी रहती हैं।
उन्होंने कहा कि बीता हुआ कल वापस नहीं आ सकता और आने वाला कल अभी हमारे हाथ में नहीं है। ऐसे में मनुष्य के पास जो समय मौजूद है, उसका सदुपयोग करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को वर्तमान क्षण को समझने और उसमें सकारात्मक कर्म करने की प्रेरणा दी।
वर्तमान ही वास्तविक जीवन है
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने कहा कि वर्तमान की सबसे बड़ी विशेषता उसकी वास्तविकता है। आज और अभी का क्षण ही हमारे सामने मौजूद है। इसी समय में हम अपने निर्णय ले सकते हैं और अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति हर समय बीते हुए समय की चिंताओं में उलझा रहेगा या भविष्य को लेकर अनावश्यक तनाव करता रहेगा, तो वह वर्तमान के अवसरों को खो सकता है।
जीवन में मिलने वाला प्रत्येक वर्तमान क्षण अपने आप में महत्वपूर्ण है। इसलिए मनुष्य को वर्तमान में रहते हुए अपने कर्तव्यों और अच्छे कर्मों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बदलाव की शुरुआत इसी क्षण से

धर्मसभा में साध्वीश्री ने कर्म के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत केवल वर्तमान समय में ही कर सकता है।
यदि किसी व्यक्ति से अतीत में कोई गलती हुई है तो उसे लेकर लगातार चिंतित रहने के बजाय उससे सीख लेकर वर्तमान में बेहतर कर्म करने चाहिए। इसी तरह भविष्य को लेकर केवल योजनाएं बनाने के बजाय आज से उन योजनाओं को पूरा करने की दिशा में कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और सही कर्मों के साथ वर्तमान का सदुपयोग किया जाए तो जीवन में अच्छे परिवर्तन लाए जा सकते हैं।
वर्तमान में जीने से मन को मिलती है शांति
साध्वीश्री ने वर्तमान में जीने के मानसिक लाभों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति लगातार अतीत की घटनाओं और भविष्य की चिंताओं में उलझा रहता है, तो मन में तनाव बढ़ सकता है।
इसके विपरीत यदि व्यक्ति अपने वर्तमान कार्य और जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करता है, तो मन को अधिक शांति मिल सकती है। वर्तमान में रहकर किए गए अच्छे विचार और अच्छे कर्म जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। इसलिए वर्तमान परिस्थिति को स्वीकार करते हुए सही दृष्टिकोण और संयम के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
साधार्मिक भक्ति और प्रभावना का आयोजन

धर्मसभा के दौरान साधार्मिक भक्ति और प्रभावना के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि संपूर्ण दिवस की साधार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ अशोक कुमार एवं दिलीप कुमार तलेरा परिवार द्वारा लिया गया।
इसके साथ ही सिद्धि तप तपस्वियों के सुबह के पारणे और शाम के बियासने का लाभ श्री लीलाबाई, पुत्र दिनेश कुमार, अनिल कुमार एवं राजेश कुमार कांठेड़ परिवार द्वारा लिया गया।
धार्मिक आयोजन के दौरान तपस्वियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ विभिन्न परिवारों ने अपनी ओर से सेवा एवं प्रभावना का लाभ लिया।
सिद्धि तप तपस्वियों की उत्कृष्ट प्रभावना
कार्यक्रम में सिद्धि तप तपस्वियों की उत्कृष्ट प्रभावना का लाभ भी विभिन्न परिवारों द्वारा लिया गया। इसमें अशोक कुमार एवं रौनक कुमार बोहरा परिवार, भाटपचलाना; अभय कुमार एवं नानालाल सुराणा परिवार, दलोदा; पीयूष कुमार मुणत परिवार; तथा अशोक कुमार, अमन कुमार, अक्षित कुमार कटारिया परिवार, जावरा शामिल रहे।
इन परिवारों ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता करते हुए तपस्वियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और प्रभावना का लाभ लिया।
विभिन्न श्रीसंघों ने की सहभागिता
चातुर्मास के दौरान आयोजित इस मंगलकारी धार्मिक कार्यक्रम में आसपास के कई क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। जावरा, दलोदा, महिदपुर और भाटपचलाना सहित विभिन्न स्थानों के श्रीसंघों ने धर्मसभा में उपस्थित होकर साध्वीश्री के प्रवचन का श्रवण किया और धार्मिक लाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा में श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। साध्वीश्री के विचारों ने उपस्थित समाजजनों को जीवन में वर्तमान समय के महत्व को समझने और सकारात्मक कर्मों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।
चातुर्मास में धर्म और आत्मचिंतन का संदेश
श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चल रहे चातुर्मास के दौरान धार्मिक प्रवचन, तप, साधना और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म के साथ-साथ जीवन को बेहतर बनाने वाले व्यवहारिक संदेश भी दिए जा रहे हैं।
बुधवार की धर्मसभा में वर्तमान में जीने का संदेश भी इसी क्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को समझाया कि मनुष्य के हाथ में केवल वर्तमान है और इसी समय किए गए कर्म भविष्य की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीवन में वर्तमान को बनाएं सार्थक
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब का संदेश श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन का विषय बना। “भूतकाल एक सपना है, भविष्य काल एक कल्पना है, लेकिन वर्तमान सिर्फ अपना है” का भाव यही बताता है कि जीवन में बीती बातों को लेकर अनावश्यक पछतावे और भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंता से बचते हुए वर्तमान को सार्थक बनाना चाहिए।
धर्मसभा के अंत में श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन से प्रेरणा लेते हुए वर्तमान समय का सदुपयोग करने, सकारात्मक कर्म करने और जीवन में शांति एवं संयम को अपनाने का संकल्प लिया।
