—Advertisement—

Parliament Monsoon Session: ‘डरिए मत, भागिए मत…’ BJP का विपक्ष को चैलेंज, अमित शाह के बयान पर बढ़ा सियासी टकराव

Author Picture
Published On: 12 August 2026
Parliament Monsoon Session: ‘डरिए मत, भागिए मत...’ BJP का विपक्ष को चैलेंज, Amit Shah के बयान पर बढ़ा सियासी टकराव

—Advertisement—

Parliament Monsoon Session: ‘डरिए मत, भागिए मत…’ BJP का विपक्ष को चैलेंज, Amit Shah के बयान पर बढ़ा सियासी टकराव

नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। सत्र के कामकाज के लिए अब केवल दो दिन शेष हैं और इसी बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध और तीखा होता दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष से सदन में गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुनने का साहस दिखाने की अपील की है। वहीं कांग्रेस और विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के प्रदर्शन और अन्य मुद्दों पर सरकार से जवाब मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा।

संसद में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा कराने की पेशकश की है। सरकार का कहना है कि अमित शाह सदन में इस मुद्दे पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं। हालांकि विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग लगातार उठाई जा रही है।

अंतिम दो दिनों में क्या होगा?

मॉनसून सत्र अब समाप्ति की ओर है। आखिरी दिन आमतौर पर सदन का कामकाज सीमित रहता है और दोपहर के आसपास सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जा सकता है। ऐसे में बचे हुए दो दिन सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों को लेकर सदन में हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर निशाना साधा। दूसरी ओर सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

इस दौरान सरकार द्वारा लाए गए एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा हुई, लेकिन कई अन्य बड़े मुद्दों पर सदन में अपेक्षित स्तर की बहस नहीं हो सकी।

छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा बना केंद्र

सत्र के शुरुआती दौर से ही छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। विपक्ष ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर लिया।

जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और विपक्षी दलों के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी सामने आया। इसके बाद विपक्ष का फोकस गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर केंद्रित हो गया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई अमित शाह के निर्देश पर की गई थी। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि विपक्ष को आरोपों के बजाय सदन में चर्चा के दौरान अपना पक्ष रखना चाहिए।

BJP ने विपक्ष को दी चुनौती

संसद में गतिरोध के बीच भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष से सदन में मौजूद रहने और गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुनने की अपील की।

भाजपा का कहना है कि विपक्ष यदि छात्रों से जुड़े मुद्दे पर सरकार से जवाब चाहता है तो उसे सदन में चर्चा में भाग लेना चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्ष कई बार सदन की कार्यवाही बाधित करता है और बाद में संसद के बाहर राजनीतिक बयान देता है।

भाजपा की ओर से यह संदेश दिया गया कि विपक्ष को सदन में सरकार का पक्ष सुनना चाहिए और उसके बाद अपनी बात रखनी चाहिए।

अमित शाह व्यापक चर्चा के लिए तैयार

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार केवल गृह मंत्री अमित शाह का औपचारिक बयान कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती। सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने के पक्ष में है।

सरकार का कहना है कि अमित शाह न केवल 20 जुलाई के मार्च से जुड़े विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं, बल्कि छात्रों के आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सदन में चर्चा के लिए तैयार हैं।

सरकारी पक्ष का तर्क है कि केवल बयान देने के बजाय इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, ताकि विपक्षी दलों, सत्ता पक्ष और सरकार को अपना-अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।

Rahul Gandhi की PM Modi से माफी की मांग

दूसरी ओर कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा है कि जब तक प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगते, विपक्ष का विरोध जारी रहेगा। कांग्रेस की ओर से यह भी सवाल उठाया गया है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के संबंध में निर्णय किस स्तर पर लिया गया था।

विपक्ष का कहना है कि केवल अमित शाह का सामान्य बयान पर्याप्त नहीं होगा। वह उन आरोपों पर सीधा जवाब चाहता है जो छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे हैं।

FCRA Bill को लेकर भी गतिरोध

संसद में FCRA Amendment Bill को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है।

वहीं विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया है कि विधेयक को Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजा जाना चाहिए। सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस विधेयक को JPC के पास भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है।

इससे पहले अमित शाह ने ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की थी। सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित पक्षों की चिंताओं को सुनने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

Delimitation का मुद्दा भी रहा अहम

मॉनसून सत्र में परिसीमन यानी Delimitation का मुद्दा भी प्रमुख रहा। सरकार ने परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश की। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ बातचीत भी की।

बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। राहुल गांधी ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर जोर दिया। दूसरी ओर सरकार का कहना रहा कि यदि कांग्रेस प्रस्ताव का समर्थन करने को तैयार है तो सर्वदलीय बैठक आयोजित करने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि इस मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई।

सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव

मॉनसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे ने संसदीय कामकाज को प्रभावित किया है। विपक्ष सरकार पर कई मुद्दों को लेकर हमला करता रहा, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

सरकार का दावा है कि हंगामे के बावजूद कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया गया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा से बच रही है।

अब जब सत्र के केवल दो कामकाजी दिन बचे हैं, दोनों पक्षों के सामने यह चुनौती है कि क्या वे किसी मुद्दे पर सार्थक चर्चा के लिए सहमत हो पाएंगे।

क्या आखिरी दो दिनों में होगी बड़ी बहस?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि संसद के अंतिम दो दिनों में छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हो पाएगी या नहीं। सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान और विस्तृत बहस की पेशकश की है, जबकि विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है।

भाजपा चाहती है कि विपक्ष सदन में मौजूद रहकर अमित शाह को सुने और उसके बाद अपने सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी के बिना उसका विरोध समाप्त नहीं होगा।

ऐसे में मॉनसून सत्र के आखिरी दो दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि दोनों पक्ष चर्चा के लिए तैयार होते हैं तो छात्रों के प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर सदन में विस्तृत बहस हो सकती है। लेकिन यदि गतिरोध जारी रहता है, तो सत्र का अंतिम चरण भी हंगामे की भेंट चढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp