MP में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सख्ती, 35 प्रोजेक्ट्स का औचक निरीक्षण; दो एजेंसियों पर ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई
भोपाल। मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मुख्य अभियंताओं के दलों ने रेंडम आधार पर चयनित निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। सीहोर, बालाघाट, ग्वालियर, झाबुआ, अनूपपुर, रतलाम और पन्ना जिलों में कुल 35 निर्माण कार्यों की मौके पर जाकर जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जा रहे काम का जायजा लिया गया। निरीक्षण दलों से प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई।
महीने में दो बार होगा निरीक्षण अभियान
प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने के लिए महीने में दो बार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की प्रगति और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि सार्वजनिक धन से तैयार होने वाले भवन, सड़क, पुल और अन्य अधोसंरचना कार्य गुणवत्तापूर्ण हों और निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं।
औचक निरीक्षण के दौरान जिन निर्माण कार्यों में कमियां पाई जाती हैं, उनके लिए संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं संतोषजनक और गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों की सराहना भी की जा रही है।
दो निर्माण एजेंसियों पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई
निरीक्षण दलों की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद असंतोषजनक पाए गए निर्माण कार्यों के संबंध में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दो निर्माण एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और तीन एजेंसियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए। इसके साथ ही संबंधित एजेंसियों से निर्धारित समय-सीमा में कमियों को दूर कराने की कार्रवाई भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
Ratlam में गुणवत्तापूर्ण काम की सराहना
निरीक्षण अभियान के दौरान रतलाम जिले में चल रहे कुछ निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण पाया गया। बंजली-सेजावता बाइपास रोड पर निर्माणाधीन आरओबी-190 के कार्य का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण दल ने यहां चल रहे निर्माण कार्य को गुणवत्ता के लिहाज से संतोषजनक पाया।
गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए अनुविभागीय अधिकारी आरएन सूर्यवंशी और उपयंत्री विजय मंडलोई की प्रशंसा की गई। अधिकारियों के स्तर पर बेहतर निगरानी और निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कराने को सकारात्मक उदाहरण माना गया।
इसी तरह रतलाम जिले में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, छावनी झोड़िया के निर्माणाधीन भवन का कार्य भी निरीक्षण में गुणवत्तापूर्ण पाया गया। इसके लिए उपयंत्री एवं अनुविभागीय अधिकारी प्रशांत जोशी की प्रशंसा की गई।
सरकार की ओर से गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ लापरवाही वाले मामलों में कार्रवाई की नीति अपनाई जा रही है।
Gwalior में Four-Lane निर्माण पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान ग्वालियर जिले में अटल गेट से बहोड़ापुर चौराहा फोरलेन निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
मामले में ठेकेदार मेसर्स ऋषिराज कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों को निर्माण कार्य की स्थिति पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि बड़े सड़क प्रोजेक्ट में निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों पर प्रभावी निगरानी रखी जाए। फोरलेन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का सीधा संबंध आम लोगों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था से होता है, इसलिए इनमें गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
Anuppur में सड़क निर्माण पर भी सख्ती
अनूपपुर जिले में निर्माणाधीन कोयलारी-पुरगा-मझली सड़क के कार्य की भी जांच की गई। निरीक्षण में कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही ठेकेदार मेसर्स पांडे कंस्ट्रक्शन कंपनी, कोरिया के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की गई है।
निर्माण कार्य में पाई गई कमियों को लेकर संबंधित एजेंसी और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
Jhabua में सड़क संधारण कार्य पर नोटिस
झाबुआ जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत झाबुआ-जोबट-बाग-कुक्षी मार्ग के संधारण कार्य का निरीक्षण किया गया। यह कार्य भी निरीक्षण के दौरान संतोषजनक नहीं पाया गया।
इसके बाद ठेकेदार मेसर्स गंगोत्री झाबुआ-जोबट-कुक्षी टोलवे लिमिटेड को नोटिस जारी किया गया। संबंधित एजेंसी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सड़क का संधारण कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क के रखरखाव में किसी भी तरह की कमी से वाहन चालकों और आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में सरकार ने संधारण कार्य को समय पर पूरा कराने पर जोर दिया है।
Lokpath App की शिकायतों का चार दिन में समाधान
बैठक के दौरान निर्माण कार्यों के साथ-साथ आम लोगों की शिकायतों के समाधान को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि लोकपथ एप पर प्राप्त शिकायतों का अनिवार्य रूप से चार दिवस की निर्धारित समय-सीमा में निराकरण किया जाए।
लोकपथ एप के माध्यम से सड़क और निर्माण कार्यों से संबंधित शिकायतें सामने आती हैं। सरकार का उद्देश्य है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो और संबंधित विभाग की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर रहेगा फोकस
प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क, पुल, भवन और अन्य अधोसंरचना निर्माण कार्यों के बीच उनकी गुणवत्ता बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। निर्माण कार्यों में शुरुआती स्तर पर ही कमियां सामने आने पर उन्हें दूर करने के लिए निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
महीने में दो बार होने वाले निरीक्षण अभियान के तहत रेंडम आधार पर प्रोजेक्ट का चयन किए जाने से निर्माण एजेंसियों पर भी गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव रहेगा। वहीं अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी कि वे अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करें।
इस निरीक्षण अभियान में सीहोर, बालाघाट, ग्वालियर, झाबुआ, अनूपपुर, रतलाम और पन्ना जिलों के 35 निर्माण कार्यों को शामिल किया गया। निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा के बाद जहां कमियां मिलीं, वहां कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों की प्रशंसा की गई।
सरकार की इस कार्रवाई से यह संकेत साफ है कि प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता करने वाली एजेंसियों पर सख्ती जारी रहेगी। साथ ही बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि प्रदेश में बनने वाली सड़कें, पुल और सरकारी भवन लंबे समय तक टिकाऊ और उपयोगी बने रहें।
