रात्रि भोजन नरक का पहला द्वार, इससे त्याग से जीव रक्षा संभव: डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज
संवाददाता :सचिन भंडारी
महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान धर्मसभा का आयोजन
महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने मंगलवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को रात्रि भोजन के त्याग, अहिंसा और जीव रक्षा का महत्व समझाया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि शास्त्रों में रात्रि भोजन को नरक का प्रथम द्वार बताया गया है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि रात्रि भोजन से बचना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसके त्याग से जीवों को अभयदान देने का पुण्य कार्य किया जा सकता है।
रात्रि भोजन का त्याग अहिंसा का मार्ग
साध्वी जी ने कहा कि रात्रि भोजन का त्याग करने से अहिंसा और जीव रक्षा की भावना को मजबूत किया जा सकता है। जैन धर्म में सूक्ष्म जीवों के प्रति भी करुणा और संवेदना रखने की शिक्षा दी गई है। ऐसे में रात्रि भोजन का त्याग जीवों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकल्प माना जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को धार्मिक जीवन में संयम और अनुशासन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि किसी भी अच्छे कार्य को करने के लिए दृढ़ निश्चय आवश्यक है। यदि व्यक्ति किसी कार्य को पूरा करने का संकल्प ले लेता है तो वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकता है।
‘जन’ और ‘जैन’ में बताया अंतर
धर्मसभा के दौरान डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने ‘जन’ और ‘जैन’ शब्द के बीच अंतर को भी आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया। उन्होंने कहा कि इन दोनों शब्दों में दो मात्राओं का अंतर है। उन्होंने इन मात्राओं को जमीकंद के त्याग और रात्रि भोजन के त्याग से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं को संयमित जीवन का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक जीवन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि आचरण और दैनिक जीवन में संयम अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भोजन से जुड़े नियमों का पालन भी जैन धर्म की अहिंसा और जीव दया की भावना से जुड़ा हुआ है।

दृढ़ संकल्प से मिलती है सफलता
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने धर्मसभा में श्रद्धालुओं को दृढ़ संकल्प का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति किसी कार्य को करने का निश्चय कर ले और उस दिशा में ईमानदारी से प्रयास करे तो सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों के बावजूद व्यक्ति को अपने संकल्प से पीछे नहीं हटना चाहिए। धार्मिक और आध्यात्मिक मार्ग पर भी निरंतरता तथा दृढ़ता जरूरी है।
‘कर्म राजा को हराने की ताकत धर्म राजा में’
धर्मसभा में साध्वी जी ने कर्म और धर्म के संबंध को भी समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में कर्मों का विशेष प्रभाव होता है, लेकिन धर्म के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि “कर्म राजा को हराने की ताकत सिर्फ धर्म राजा में है।” इस संदेश के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
साधार्मिक भक्ति का लिया लाभ
महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को साधार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ राजेश कुमार बाबूलाल बोथरा परिवार द्वारा लिया गया।
वहीं प्रभावना स्वर्गीय सज्जन बाई कोचर की स्मृति में उनके पुत्र अशोक कुमार बापूलाल कोचर ‘मावा वाला’ परिवार द्वारा की गई। इस अवसर पर आयोजित मंगल कार्यक्रम में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्य उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
चातुर्मास के दौरान श्री राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में नियमित रूप से धार्मिक कार्यक्रम और धर्मसभाएं आयोजित की जा रही हैं। मंगलवार की धर्मसभा में भी बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मसभा के दौरान साध्वी जी के प्रवचन सुनकर श्रद्धालुओं ने धार्मिक जीवन में संयम, अहिंसा और जीव रक्षा के संकल्प को महत्व देने का संदेश प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने धर्मलाभ लिया और आयोजन में सहभागी बने परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
