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Rewa PWD Chief Engineer Arrested:50 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पकड़ा, हर महीने 1 लाख मांगने का आरोप

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Published On: 11 August 2026
Rewa PWD Chief Engineer arrested by Lokayukta while allegedly accepting a ₹50,000 bribe in a corruption case in Madhya Pradesh
— Rewa PWD Chief Engineer arrested by Lokayukta while allegedly accepting a ₹50,000 bribe in a corruption case in Madhya Pradesh

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Rewa PWD Chief Engineer Arrested: ₹50 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पकड़ा, हर महीने ₹1 लाख मांगने का आरोप

निजी टेस्टिंग लैब को PWD के काम दिलाने के बदले रिश्वत की मांग का आरोप; प्रभारी चीफ इंजीनियर के साथ गैर-शासकीय सहयोगी भी गिरफ्तार

Rewa PWD Bribery Case: मध्यप्रदेश के रीवा से लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ा रिश्वत का मामला सामने आया है। रीवा संभाग के प्रभारी चीफ इंजीनियर कैलाश कुमार लच्छे को लोकायुक्त की टीम ने कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान उनका गैर-शासकीय सहयोगी धर्मवीर भारती भी पकड़ा गया।

लोकायुक्त की कार्रवाई रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में अटल पार्क के सामने स्थित सरकारी आवास के पास की गई। आरोप है कि निजी टेस्टिंग लैब को PWD के निर्माण कार्यों से जुड़े काम दिलाने के बदले हर महीने रिश्वत की मांग की जा रही थी।

लोकायुक्त ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों को जमानत पर रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच आगे जारी है।

निजी टेस्टिंग लैब के मैनेजर ने की थी शिकायत

मामले की शुरुआत सतना जिले की एक निजी टेस्टिंग लैब के मैनेजर सोनू सिंह की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने 4 अगस्त को लोकायुक्त के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी।

शिकायत में बताया गया कि उनकी फर्म PWD के निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता की जांच का काम करती है। इस तरह की जांच के लिए निजी लैब सरकारी निर्माण परियोजनाओं से जुड़े कार्य करती हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि रीवा PWD संभाग में काम दिलाने और काम जारी रखने के बदले प्रभारी चीफ इंजीनियर की ओर से नियमित रूप से रिश्वत की मांग की जा रही थी।

हर महीने ₹1 लाख देने की मांग का आरोप

शिकायत के मुताबिक, निजी टेस्टिंग लैब को काम दिलाने के एवज में हर महीने 1 लाख रुपये देने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को कथित मांग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई।

मामले की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने आरोपों की जांच शुरू की। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और इसके बाद कथित रिश्वत की रकम लेने के दौरान आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई गई।

लोकायुक्त की कार्रवाई में शिकायतकर्ता द्वारा दी जा रही 50 हजार रुपये की रकम को कथित तौर पर स्वीकार करते समय आरोपी पकड़े गए।

पहले भी 50 हजार रुपये लेने का आरोप

जांच के दौरान लोकायुक्त को यह जानकारी भी मिली कि शिकायत दर्ज होने से पहले भी 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत ली जा चुकी थी।

आरोप है कि प्रभारी चीफ इंजीनियर ने यह रकम सीधे लेने के बजाय अपने गैर-शासकीय सहयोगी धर्मवीर भारती के माध्यम से ली थी।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त टीम ने कथित तौर पर दूसरी किस्त लेते समय दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

अटल पार्क के पास हुई कार्रवाई

लोकायुक्त की टीम ने रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया गया कि प्रभारी चीफ इंजीनियर का सरकारी आवास अटल पार्क के सामने स्थित है।

इसी सरकारी आवास के आसपास रिश्वत की रकम लेने के दौरान लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की। कार्रवाई के बाद टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया।

मामले में रिश्वत की रकम, शिकायत और कार्रवाई से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

PWD के निर्माण कार्यों से जुड़ा है मामला

यह मामला PWD के निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी गुणवत्ता की जांच से जुड़े काम को लेकर सामने आया है।

निजी टेस्टिंग लैब निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जांच करती हैं। ऐसे में संबंधित लैब को सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े परीक्षण के अवसर मिलना उसके कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी काम को दिलाने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई

मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर लोकायुक्त द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी शिकायत मिलने के बाद ट्रैप कार्रवाई की गई।

लोकायुक्त का ट्रैप किसी शिकायत में लगाए गए रिश्वत के आरोपों की जांच के लिए किया जाने वाला कानूनी कदम होता है। ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

इस मामले में भी दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

कार्रवाई के बाद जमानत पर छोड़ा गया

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के बाद प्रभारी चीफ इंजीनियर कैलाश कुमार लच्छे और धर्मवीर भारती को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

जमानत पर रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि आरोप समाप्त हो गए हैं। मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाएगा।

जांच में सामने आ सकते हैं और तथ्य

लोकायुक्त की जांच के दौरान रिश्वत की कथित मांग, पहले भुगतान की गई रकम, काम दिलाने के बदले भुगतान की शर्त और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं, तो उनके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई संभव है। फिलहाल मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद PWD विभाग और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर भी घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।

रिश्वतखोरी के आरोपों पर विभाग की नजर

सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में किसी निजी संस्था को काम दिलाने के बदले रिश्वत की मांग का आरोप गंभीर माना जाता है।

रीवा PWD से जुड़े इस मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे क्या तथ्य हैं और कथित रिश्वत की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

 

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