—Advertisement—

Indore News: पीपल्याहाना तालाब का पानी हुआ हरा, ग्राउंड वाटर में दूषित पानी पहुंचने की आशंका

Author Picture
Published On: 11 August 2026
Green water and algae buildup visible in Pipliyahana Lake in Indore, raising concerns over water pollution and groundwater contamination
— Green water and algae buildup visible in Pipliyahana Lake in Indore, raising concerns over water pollution and groundwater contamination

—Advertisement—

Indore News: पीपल्याहाना तालाब का पानी हुआ हरा, ग्राउंड वाटर में दूषित पानी पहुंचने की आशंका

तालाब में काई जमने से उठे सवाल, स्टॉर्म वाटर लाइन से पानी आने के बावजूद गंदगी मिलने की आशंका; ई-कोलाई समेत बैक्टीरिया के ग्राउंड वाटर तक पहुंचने का खतरा

इंदौर। शहर के महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शामिल पीपल्याहाना तालाब इन दिनों चर्चा में है। तालाब के पानी का रंग हरा दिखाई देने लगा है और पानी की सतह पर काई भी जमती नजर आ रही है। पानी के अचानक रंग बदलने से तालाब की स्वच्छता और इसमें पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पीपल्याहाना तालाब आसपास के क्षेत्र के लिए केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि तालाब में किसी तरह का दूषित पानी या गंदगी पहुंच रही है, तो लंबे समय में इसका असर जमीन के अंदर मौजूद पानी की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

तालाब के पानी में बदलाव सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यहां पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है।

पानी हरा होने से बढ़ी चिंता

पीपल्याहाना तालाब के पानी का रंग हरा होने के पीछे पानी में काई या शैवाल की अधिकता एक संभावित कारण हो सकती है। हालांकि, पानी के हरे होने का वास्तविक कारण केवल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

स्थानीय स्तर पर तालाब के पानी में गंदगी मिलने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि किसी नाले, ड्रेनेज सिस्टम या अन्य स्रोत से दूषित पानी तालाब में पहुंच रहा है, तो यह पर्यावरण और भूजल दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

तालाब जैसे जलस्रोत में जैविक प्रदूषण बढ़ने पर पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए पानी के नमूनों की जांच कर यह पता लगाना जरूरी होगा कि इसमें किस तरह के प्रदूषक मौजूद हैं।

स्टॉर्म वाटर लाइन से तालाब में पहुंच रहा पानी

इंदौर नगर निगम के अनुसार, पीपल्याहाना तालाब में स्टॉर्म वाटर लाइन के माध्यम से पानी छोड़ा जा रहा है। बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाई गई स्टॉर्म वाटर व्यवस्था का उद्देश्य वर्षा जल को व्यवस्थित तरीके से निकालना होता है।

लेकिन यदि स्टॉर्म वाटर लाइन में बारिश के पानी के अलावा सीवेज, घरेलू गंदा पानी या अन्य प्रदूषित सामग्री पहुंच रही हो, तो समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में तालाब में आने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

बारिश के दौरान शहर में कई स्थानों से बहकर आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, कचरा, तेल, गंदगी और अन्य प्रदूषक भी ला सकता है। यदि इनकी मात्रा अधिक हो तो तालाब के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

भूजल रिचार्ज होने से बढ़ी चिंता

पीपल्याहाना तालाब की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका भूजल रिचार्ज में योगदान माना जाता है। तालाब में जमा पानी का एक हिस्सा प्राकृतिक प्रक्रिया के माध्यम से जमीन में नीचे जाता है और आसपास के क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।

यही कारण है कि तालाब का पानी दूषित होने की स्थिति में चिंता केवल तालाब तक सीमित नहीं रहती। यदि दूषित पानी जमीन में रिसता है, तो उसमें मौजूद हानिकारक तत्व भी भूजल तक पहुंच सकते हैं।

हालांकि, किसी विशेष प्रदूषक या बैक्टीरिया के भूजल में पहुंचने की पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जा सकती है। इसलिए तालाब के पानी के साथ-साथ आसपास के भूजल स्रोतों के नमूनों की भी जांच जरूरी मानी जा सकती है।

ई-कोलाई सहित बैक्टीरिया की जांच जरूरी

दूषित जल में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। इनमें ई-कोलाई (E. coli) भी शामिल है, जिसकी मौजूदगी आमतौर पर फीकल प्रदूषण का संकेत मानी जाती है।

यदि किसी जलस्रोत में ई-कोलाई या अन्य हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाते हैं, तो पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता से जांच की जरूरत होती है। हालांकि पीपल्याहाना तालाब के वर्तमान पानी में ई-कोलाई की मौजूदगी की पुष्टि अभी जांच के बिना नहीं की जा सकती।

इसी वजह से विशेषज्ञ स्तर पर पानी के नमूने लेकर उनकी लैब जांच कराना महत्वपूर्ण होगा। जांच के परिणाम से यह पता चल सकेगा कि तालाब का पानी केवल शैवाल या काई के कारण हरा हुआ है अथवा इसमें किसी प्रकार का जैविक या रासायनिक प्रदूषण भी मौजूद है।

पहले बोरिंग के पानी में मिले थे बैक्टीरिया

इंदौर के कुछ क्षेत्रों में पहले बोरिंग के पानी की जांच के दौरान ई-कोलाई सहित अन्य बैक्टीरिया पाए जाने की बात सामने आई थी। उस समय भी भूजल की गुणवत्ता और जलस्रोतों के प्रदूषण को लेकर सवाल उठे थे।

भूजल का उपयोग बड़ी संख्या में लोग घरेलू जरूरतों के लिए करते हैं। ऐसे में भूजल रिचार्ज वाले क्षेत्रों की स्वच्छता और वहां पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी हो जाती है।

पीपल्याहाना तालाब के मामले में भी यह महत्वपूर्ण होगा कि तालाब में आने वाले पानी के स्रोतों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं स्टॉर्म वाटर सिस्टम में सीवेज या अन्य गंदा पानी तो नहीं मिल रहा है।

तालाब के आसपास भी निगरानी की जरूरत

तालाब की स्थिति को देखते हुए केवल पानी की सतह की सफाई पर्याप्त नहीं होगी। तालाब में आने वाले पानी के स्रोतों, आसपास की नालियों और स्टॉर्म वाटर नेटवर्क की भी जांच आवश्यक हो सकती है।

यदि किसी स्थान से लगातार दूषित पानी तालाब में पहुंच रहा है तो केवल तालाब की सफाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पानी के स्रोत को पहचानकर उसे रोकना भी जरूरी होगा।

इसके साथ ही तालाब के पानी की नियमित गुणवत्ता जांच, आसपास के बोरिंग और अन्य भूजल स्रोतों की निगरानी तथा जल निकाय के कैचमेंट क्षेत्र की सफाई पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

प्रशासन के सामने चुनौती, पानी की जांच से स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल तालाब का पानी हरा होने और काई जमने के कारण चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन वास्तविक स्थिति पानी की वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि जांच में प्रदूषण पाया जाता है तो संबंधित स्रोत की पहचान कर उसे रोकना जरूरी होगा।

पीपल्याहाना तालाब जैसे जलस्रोत शहर के पर्यावरण और भूजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनके संरक्षण के लिए केवल सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि पानी की गुणवत्ता और जलस्रोतों में आने वाले पानी की निगरानी भी जरूरी है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग तालाब के पानी के नमूने लेकर कितनी जल्दी जांच कराते हैं और यदि पानी में प्रदूषण पाया जाता है तो उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है पीपल्याहाना तालाब?

पीपल्याहाना तालाब का महत्व केवल इसके जल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह आसपास के पर्यावरण और भूजल रिचार्ज व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए तालाब में किसी भी प्रकार के प्रदूषण की अनदेखी भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकती है।

तालाब का पानी हरा होने के बाद अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या यह केवल काई जमने की सामान्य प्रक्रिया है या फिर इसके पीछे पानी के प्रदूषण की कोई वजह है? इसका जवाब पानी की लैब जांच और संबंधित विभागों की निगरानी से ही सामने आएगा।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp