श्रावण के दूसरे सोमवार को निकली बांकनाथ अटल दरबार की भव्य शोभायात्रा, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
संवाददाता : कौशिक पण्डित
पुष्पवर्षा से हुआ शिवभक्तों का अभिनंदन, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा मनावर
Manawar । श्रावण मास के दूसरे सोमवार के पावन अवसर पर मनावर क्षेत्र में धार्मिक आस्था और उत्साह का अनूठा नजारा देखने को मिला। बांकनाथ अटल दरबार की भव्य शोभायात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां श्रद्धालुओं और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह भगवान भोलेनाथ के भक्तों का पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया गया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए स्वागत की विशेष व्यवस्थाएं भी की गईं। पूरे यात्रा मार्ग पर धार्मिक वातावरण बना रहा और हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों से क्षेत्र गूंजता रहा।
20 वर्षों से जारी है शोभायात्रा की परंपरा
बांकनाथ अटल दरबार की शोभायात्रा को लेकर शिवभक्तों में विशेष आस्था देखने को मिलती है। समाजसेवी एवं शिव भक्त भक्तचंद जी पाटीदार ने बताया कि क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से लगातार श्रद्धालुओं के सहयोग से शोभायात्रा की परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन से जुड़ते हैं और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी शोभायात्रा
शोभायात्रा में अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों से आए शिवभक्तों ने सहभागिता की। श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। यात्रा के दौरान लोगों में धार्मिक उत्साह के साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की भावना भी दिखाई दी।
भक्तचंद जी पाटीदार ने श्रद्धालुओं और शोभायात्रा का स्वागत करने वाले सभी नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से जिस तरह क्षेत्रवासियों और शिवभक्तों का सहयोग मिल रहा है, वह इस धार्मिक परंपरा की मजबूती को दर्शाता है।
पांडव काल से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
बांकनाथ अटल दरबार का प्राचीन मंदिर क्षेत्र में धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस पवित्र स्थल का संबंध पांडव काल से माना जाता है। यही वजह है कि मंदिर का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष विश्वास है।
श्रावण मास में यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के सोमवार को मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
जगह-जगह हुआ शोभायात्रा का स्वागत
शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शिवभक्तों और स्थानीय नागरिकों ने यात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान भोलेनाथ के भक्तों का अभिनंदन किया।
यात्रा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। शिवभक्त जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक में शोभायात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिला।
शाही सवारी की तैयारियां भी तेज
बांकनाथ अटल दरबार से जुड़ी आगामी शाही सवारी को लेकर भी शिवभक्तों और आयोजन समिति की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
आयोजन समिति और शिवभक्तों की ओर से अधिक से अधिक लोगों से शाही सवारी में शामिल होने की अपील की जा रही है। श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे धार्मिक आस्था के साथ अनुशासन बनाए रखते हुए आयोजन में भाग लें और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।
भक्तचंद पाटीदार बोले- आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक है आयोजन
समाजसेवी एवं शिव भक्त भक्तचंद जी पाटीदार ने कहा कि बांकनाथ अटल दरबार की शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो दशकों से समाज और शिवभक्तों का लगातार सहयोग मिल रहा है। इसी सहयोग के कारण शोभायात्रा की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा क्षेत्र
श्रावण के दूसरे सोमवार को निकली बांकनाथ अटल दरबार की शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना दिया। यात्रा में शामिल श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।
हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। जगह-जगह हुए स्वागत और पुष्पवर्षा ने शोभायात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया।
श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर निकली यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था के साथ वर्षों पुरानी परंपरा और सामाजिक सहभागिता का संदेश देती नजर आई। अब श्रद्धालुओं की नजर आगामी शाही सवारी पर है, जिसे लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं।
