अजन्मा, स्वयंभू और अविनाशी परमात्मा शिव की महिमा देवात्माओं से न्यारी : ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी
मांगलिक भवन में चल रहे सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ में बड़ी संख्या में पहुंच रहे धर्मप्रेमी, सहज-सरल भाषा में समझाया जा रहा गीता का गूढ़ ज्ञान
सारंगपुर (म.प्र.) | 10 अगस्त 2026
संवाददाता :मनोज कुमार पुष्पद
सारंगपुर। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर नगर पालिका के पीछे स्थित मांगलिक भवन में चल रहे सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी नागरिक पहुंचकर आध्यात्मिक ज्ञान और प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं। आयोजन में नगर की माताएं-बहनें सहित श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और तन्मयता के साथ शामिल हो रहे हैं।
गीता ज्ञान यज्ञ में प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी गीता, भागवत और रामायण के गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान को बेहद सहज और सरल भाषा में दैनिक जीवन से जोड़कर समझा रही हैं। उनके प्रवचनों से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ रही है। साथ ही, जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं का समाधान आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से समझाया जा रहा है।
अर्जुन के समान परमात्मा में रखें अटूट निश्चय
गीता ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा भगवान में निश्चय अर्जुन के समान होना चाहिए। अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण को चुना और उनके ज्ञान एवं मार्गदर्शन को स्वीकार किया। इसी ज्ञान और मार्गदर्शन ने अर्जुन को विजयश्री प्राप्त करने में सहायता की।
उन्होंने कहा कि ईश्वर से शक्तियां प्राप्त करने के लिए सबसे पहले उनके यथार्थ स्वरूप और सत्य परिचय को जानना आवश्यक है। परमात्मा के प्रति सच्ची आस्था तभी मजबूत होती है, जब मनुष्य उनके वास्तविक स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व को समझता है।
परम ज्योति स्वरूप हैं परमात्मा शिव
ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि परमात्मा शिव परम ज्योति स्वरूप हैं और उनका धाम परमधाम है। इसी स्मृति स्वरूप हम ज्योतिर्लिंग के रूप में परमात्मा को याद करते हैं और ज्योति प्रज्वलित करते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल धार्मिक कथाओं और प्रवचनों को सुनकर प्रसन्न हो जाना पर्याप्त नहीं है। इन शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना जरूरी है। मनुष्य को गीता के ज्ञान को व्यवहार में उतारकर सच्चे अर्जुन के समान बनने का प्रयास करना चाहिए।
ज्ञान को जीवन में उतारने की जरूरत
दीदी ने श्रद्धालुओं से कहा कि ईश्वरीय ज्ञान मनुष्य के जीवन को सकारात्मक और श्रेष्ठ दिशा प्रदान कर सकता है। इस ज्ञान को जीवन में अपनाकर व्यक्ति ऐसा जीवन बना सकता है, जो समाज के लिए अनुकरणीय हो।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के विचारों, व्यवहार और कर्मों में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। जब व्यक्ति स्वयं में परिवर्तन लाता है तो उसका प्रभाव परिवार और समाज पर भी पड़ता है। इसी प्रकार श्रेष्ठ विचारों और संस्कारों से सुंदर समाज का निर्माण किया जा सकता है।
सहज प्रस्तुति से बढ़ रही ज्ञान के प्रति जिज्ञासा
सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन शिक्षाप्रद और ज्ञानवर्धक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों की जानकारी दी जा रही है। ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी द्वारा गूढ़ आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाए जाने के कारण लोगों में ज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ रही है।
प्रवचनों के दौरान श्रद्धालु पूरी तन्मयता के साथ आध्यात्मिक संदेशों को सुन रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में जिज्ञासु मांगलिक भवन पहुंचकर गीता ज्ञान यज्ञ में शामिल हो रहे हैं।
सुंदर समाज निर्माण का प्रयास
आयोजकों के अनुसार इस सात दिवसीय आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि लोगों को सकारात्मक जीवनशैली और श्रेष्ठ संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। कथा एवं प्रवचनों के माध्यम से प्रतिदिन ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद संदेश दिए जा रहे हैं।
इस आयोजन के माध्यम से सुंदर, संस्कारवान और सकारात्मक समाज के निर्माण का अभिनव प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने और अपने कर्मों के माध्यम से समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने की प्रेरणा दी जा रही है।
श्रद्धालुओं में उत्साह, प्रतिदिन पहुंच रहे जिज्ञासु
श्रावण मास में आयोजित गीता ज्ञान यज्ञ को लेकर सारंगपुर नगर में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में माताएं-बहनें, पुरुष और अन्य धर्मप्रेमी नागरिक मांगलिक भवन पहुंचकर प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं।
श्रद्धालु पूरे मनोयोग से प्रवचन सुन रहे हैं और आध्यात्मिक विषयों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति और ज्ञान का वातावरण बना हुआ है।
आयोजकों ने किया प्रवचनकर्ता का अभिवादन
कार्यक्रम के दौरान राधेश्याम माहेश्वरी, सुशील व्यास सहित आयोजकों ने प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी का अभिवादन किया। आयोजकों ने बताया कि सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ के आगामी दिनों में भी विभिन्न आध्यात्मिक एवं जीवनोपयोगी विषयों पर प्रवचन जारी रहेंगे।
गीता ज्ञान यज्ञ में बढ़ती श्रद्धालुओं की सहभागिता से आयोजन को लेकर नगर में सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। धर्मप्रेमी नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचकर इस ज्ञान यज्ञ का लाभ ले रहे हैं और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।
