MP Transport Scam: सौरभ शर्मा की दुबई वाली 150 करोड़ की कथित संपत्ति पर फिर होगी जांच, लोकायुक्त मांगेगा अहम जानकारी
MP Transport Scam: मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले में लोकायुक्त संगठन ने जांच का दायरा एक बार फिर बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब दुबई में सौरभ शर्मा के नाम या उसके करीबियों के नाम पर कथित तौर पर खरीदी गई संपत्ति की जानकारी जुटाएगी। शिकायत में दुबई में करीब 150 करोड़ रुपये मूल्य के एक विला का उल्लेख किया गया था। हालांकि, अब तक हुई कार्रवाई में इस संपत्ति से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज सामने नहीं आया है।
लोकायुक्त पुलिस कोर्ट में चालान पेश करने से पहले सौरभ शर्मा और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों का दोबारा बारीकी से परीक्षण कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी के नाम पर देश या विदेश में कितनी संपत्तियां हैं और कहीं किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर उसकी कथित संपत्ति तो नहीं खरीदी गई।
दुबई के विला की शिकायत में हुआ था जिक्र
लोकायुक्त संगठन को सौरभ शर्मा के खिलाफ शिकायत देने वाले व्यक्ति ने दावा किया था कि दुबई में सौरभ का एक आलीशान विला है। शिकायत में इस संपत्ति की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी और कहा गया था कि इसे एमआर ग्रुप के माध्यम से खरीदा गया है।
हालांकि, सौरभ शर्मा और उसके कथित सहयोगियों के ठिकानों पर हुई तलाशी के दौरान दुबई स्थित इस संपत्ति से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले थे। पूछताछ में भी सौरभ शर्मा या उसके नजदीकी रिश्तेदारों की ओर से ऐसी किसी संपत्ति के स्वामित्व की पुष्टि नहीं की गई थी। इसके बावजूद शिकायत में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया था, उनमें से कई जानकारियां जांच के दौरान सही पाए जाने के कारण लोकायुक्त अब दुबई वाली संपत्ति की जानकारी भी दोबारा जुटाने की तैयारी में है।
एमआर ग्रुप से मांगी जाएगी संपत्ति की जानकारी
लोकायुक्त पुलिस अब एमआर ग्रुप को पत्र भेजकर जानकारी मांग सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि सौरभ शर्मा या उसके कथित आर्थिक नेटवर्क से जुड़े 15 से अधिक लोगों में से किसी ने एमआर ग्रुप के माध्यम से दुबई में कोई संपत्ति खरीदी है या नहीं।
जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि यदि कोई संपत्ति सीधे सौरभ के नाम पर नहीं है, तो क्या उसे किसी रिश्तेदार, परिचित या कथित सहयोगी के नाम पर खरीदा गया। इसके लिए संपत्ति की खरीद, भुगतान और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
दुबई आने-जाने की जानकारी भी सामने आई
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि सौरभ शर्मा का दुबई आना-जाना रहा है। 19 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ और उससे जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान उसके परिवार की ओर से भी यह जानकारी सामने आई थी कि वह अपनी पत्नी के साथ दुबई गया था।
इसके बाद सौरभ शर्मा ने 28 जनवरी 2025 को भोपाल जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। जांच एजेंसी अब उसके विदेश दौरे और कथित संपत्ति के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर सकती है।
छापे के बाद लावारिस कार से मिला था करोड़ों का माल
सौरभ शर्मा प्रकरण उस समय सुर्खियों में आया था जब उसके ठिकानों पर कार्रवाई के बाद भोपाल के मेंडोरी गांव में एक लावारिस कार से बड़ी मात्रा में सोना और नकदी बरामद हुई थी। आयकर विभाग की टीम को कार से करीब 52 किलो सोना और 11.60 करोड़ रुपये नकद मिले थे।
यह कार सौरभ शर्मा के कथित कारोबारी सहयोगी चेतन गौर के नाम पर पंजीकृत बताई गई थी। बरामद सोने और नकदी को जांच एजेंसियों ने मामले से जोड़कर देखा था। इसी बरामदगी के बाद सौरभ शर्मा और उसके कथित नेटवर्क की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर जांच और तेज हुई।
सितंबर के अंत तक चालान की तैयारी
लोकायुक्त संगठन अब इस मामले में सितंबर के अंत तक अदालत में चालान पेश करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले जांच एजेंसी आरोपी की चल-अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण जुटाने में लगी है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में मौजूद संभावित संपत्तियों की जानकारी भी शामिल की जा रही है।
जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित तौर पर अर्जित धन का इस्तेमाल किन संपत्तियों में किया गया और क्या कुछ संपत्तियां दूसरे लोगों के नाम पर खरीदी गईं। इसी वजह से शिकायत में बताए गए नामों और संपत्तियों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है।
शिकायत में बताई गई संपत्तियों की भी जांच
लोकायुक्त संगठन के लिए शिकायत में दी गई जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि शिकायतकर्ता ने जिन कई संपत्तियों और लेन-देन का उल्लेख किया था, उनमें से अधिकांश की जानकारी जांच के दौरान सही पाई गई। ऐसे में दुबई स्थित कथित विला की जानकारी को भी एजेंसी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहती।
हालांकि, अभी तक दुबई में 150 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति के स्वामित्व की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच एजेंसी दस्तावेजी साक्ष्यों और संबंधित संस्थाओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करेगी।
अब एमआर ग्रुप से मिलने वाली जानकारी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि रिकॉर्ड में सौरभ शर्मा या उसके कथित सहयोगियों से जुड़ी कोई संपत्ति सामने आती है, तो लोकायुक्त जांच में यह एक अहम कड़ी साबित हो सकती है। वहीं, यदि ऐसी कोई संपत्ति नहीं मिलती है, तो शिकायत में किए गए दावे की भी उसी आधार पर जांच की जाएगी।
