तीर्थ रक्षा पर आचार्य सुनील सागर जी का बड़ा संदेश: 3 जरूरी बातें, बोले- इसके लिए बहुत बड़ा जमीर चाहिए
तीर्थ रक्षा को लेकर चतुर्थ पट्टाधीश राष्ट्र संत आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने इंदौर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नए-नए तीर्थ और मंदिर बनाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ हमारे प्राचीन तीर्थों और मंदिरों की सुरक्षा एवं संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। आचार्य श्री ने कहा कि चातुर्मास में एकत्रित होने वाली राशि का चौथाई भाग पुराने तीर्थों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
तीर्थ रक्षा के लिए समाज को आगे आना होगा
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि धार्मिक स्थलों का निर्माण केवल नई जगहों पर मंदिर बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमारी ऐतिहासिक एवं प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा भी समाज की बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज अपने पुराने तीर्थों को लेकर गंभीरता से विचार करे। तीर्थ केवल पत्थर और मंदिरों का समूह नहीं होते, बल्कि वे धर्म, इतिहास, संस्कृति और आस्था की जीवंत पहचान होते हैं।
आचार्य श्री ने समाज से आह्वान किया कि तीर्थ रक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। चातुर्मास के दौरान समाज में एकत्रित होने वाली राशि का एक हिस्सा विशेष रूप से तीर्थ संरक्षण के लिए सुरक्षित रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
गिरनार जी को लेकर आचार्य श्री ने जताई चिंता
गिरनार जी के संदर्भ में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान हमारे हैं, मूर्तियां हमारी हैं और चरण हमारे भगवानों के हैं, लेकिन अधिकार जताने वाले कोई और हैं। उन्होंने कहा कि आज धर्म के लिए अपने प्राण तक न्योछावर करने वाले निडर और संकल्पवान लोगों की आवश्यकता है।
आचार्य श्री ने कहा कि तीर्थ रक्षा के लिए केवल भावनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए बहुत बड़ा जमीर और दृढ़ संकल्प चाहिए।
उन्होंने गिरनार जी की पांचवीं टोंक का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ से जुड़ी पवित्र स्मृति है। उनके अनुसार, इस स्थान पर रंग-पोत कर इतिहास बदलने की कोशिश की जा रही है और इस विषय पर पुरातत्व विभाग की चुप्पी भी चिंता का विषय है।
गिरनार जैन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। सरकारी जिला पोर्टल भी गिरनार को विभिन्न धार्मिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण पवित्र स्थल बताता है, जबकि जैन स्रोत भगवान नेमिनाथ के निर्वाण से इसका विशेष संबंध बताते हैं।
‘गिरनार हमारा था और आगे भी हमारे हाथों में आएगा’
आचार्य श्री ने कहा कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। आज किसी और का दौर है तो कल किसी और का हो सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि गिरनार हमारा था और आगे भी हमारे हाथों में आएगा।
उन्होंने कहा कि यदि तीर्थ और जैन धर्म सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों तक धर्म की परंपरा बनी रहेगी और हजारों-लाखों लोगों के जीवन का आध्यात्मिक कल्याण होगा।
आचार्य श्री का संदेश केवल गिरनार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज को देशभर के प्राचीन जैन तीर्थों के संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में हुआ मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि धर्मसभा के प्रारंभ में मंगलाचरण नृत्य समोशरण महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके बाद अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं चित्र अनावरण किया गया।
गुरुदेव का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य श्री सुनील जी एवं कल्पना जी जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य जे. एम. बी. परिवार, श्री राम कॉलोनी को प्राप्त हुआ।
चातुर्मास स्थापना के कलश श्री मनीष जी- सपना गोधा, आनंद जी- नवीन जी गोधा एवं सुधीर बिलाला परिवार को कमेटी द्वारा प्रदान किए गए। कार्यक्रम के आयोजक श्री इंद्र कुमार जी- वीणा जी सेठी परिवार रहे।
सुरेंद्र बड़जात्या का विशेष सम्मान
कार्यक्रम में उगरियावाश से पधारे श्री सुरेंद्र बड़जात्या जी का कमेटी द्वारा विशेष सम्मान किया गया।
इस अवसर पर श्री सौरभ पाटोदी, सुरेंद्र बाकलीवाल, हंसमुख गांधी, विमल झांझरी, सुयश बाकलीवाल, प्रवीण पाटनी, राजेश बज, महालक्ष्मी चैनल के श्री शरद जी जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
धर्मसभा का सफल संचालन सुदृढ़ मति माताजी एवं कैलाश लुहाड़िया ने किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गिरीश पाटोदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
प्राचीन तीर्थों का संरक्षण क्यों जरूरी?
जैन समाज के लिए प्राचीन तीर्थ केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे हजारों वर्षों की परंपरा, इतिहास और संस्कृति के साक्षी हैं। इसलिए तीर्थ रक्षा के लिए समाज, धार्मिक संस्थाओं और संबंधित प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज का संदेश इसी दिशा में समाज को जागरूक करने वाला है कि नए निर्माण के साथ पुराने तीर्थों की सुरक्षा भी प्राथमिकता बने।
इंदौर में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज से संबंधित पूर्व कार्यक्रमों और चातुर्मास से जुड़ी खबरें भी पाठक [दैनिक स्वराज वाणी की जैन समाज कवरेज] के माध्यम से पढ़ सकते हैं।
गिरनार तीर्थ: गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित गिरनार जैन धर्म सहित विभिन्न धार्मिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
रिपोर्ट: सतीश जैन
दिगंबर जैन समाज, सामाजिक संसद, इंदौर


