32 किमी दंडवत यात्रा आठवें दिन श्री होरी हनुमान धाम पहुंचकर संपन्न हुई। ताराखेड़ी निवासी मुकेश कुमावत ने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
32 किमी दंडवत यात्रा: 8 दिन की कठिन साधना पूरी, होरी हनुमान धाम पहुंचकर मुकेश कुमावत ने मांगी सुख-शांति
रतलाम (ताराखेड़ी-होरी हनुमान जी)। रिपोर्टर अर्जुन कुमावत बछोड़िया।
32 किमी दंडवत यात्रा की कठिन धार्मिक साधना शनिवार को आठवें दिन श्री होरी हनुमान जी धाम पहुंचने के साथ पूर्ण हो गई। रतलाम जिले के ग्राम ताराखेड़ी निवासी मुकेश कुमावत ने क्षेत्र में सुख, समृद्धि, शांति और विकास की कामना को लेकर यह अनूठी यात्रा शुरू की थी। आठ दिनों तक आस्था, श्रद्धा और संकल्प के साथ जारी रही इस यात्रा का समापन राजस्थान स्थित श्री होरी हनुमान जी धाम मंदिर में हुआ।
यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने के बाद मुकेश कुमावत ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान श्री हनुमान जी के चरणों में क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
32 किमी दंडवत यात्रा का संकल्प और सफर
मुकेश कुमावत द्वारा शुरू की गई यह 32 किमी दंडवत यात्रा ताराखेड़ी गांव से प्रारंभ हुई थी। धार्मिक आस्था और क्षेत्र की सुख-शांति की भावना के साथ उन्होंने दंडवत करते हुए यात्रा पूरी करने का संकल्प लिया।
यात्रा के दौरान उन्हें कई गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ा। ताराखेड़ी से शुरू हुई यात्रा कचनारा, सरसोद, निम्बोद, बेहपुर और नांदवेल होते हुए श्री होरी हनुमान जी धाम तक पहुंची।
आठ दिनों तक चले इस कठिन धार्मिक सफर में रास्ते की चुनौतियों के बावजूद मुकेश कुमावत अपने संकल्प पर कायम रहे। यात्रा के दौरान ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का सहयोग भी लगातार मिलता रहा।
आठवें दिन होरी हनुमान धाम पहुंची यात्रा
शनिवार को यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची। आठवें दिन मुकेश कुमावत श्री होरी हनुमान जी धाम पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्होंने मंदिर में दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।उन्होंने भगवान श्री हनुमान जी से क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और विकास की कामना की। यात्रा के समापन के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण भी मौजूद रहे।
होरी हनुमान जी धाम मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। मंदिर के प्रति आसपास के क्षेत्रों के लोगों में लंबे समय से श्रद्धा देखने को मिलती रही है।
दिव्यांग भाइयों ने भी निभाया साथ
इस धार्मिक यात्रा की एक खास बात यह रही कि ताराखेड़ी के दो दिव्यांग भाई अमृतराम और कमल प्रजापत भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ यात्रा में लगातार साथ रहे।दोनों भाई अपनी ट्राईसाइकिल के साथ यात्रा में शामिल हुए और उन्होंने अपनी सेवा एवं सहयोग से धार्मिक यात्रा को विशेष रूप दिया। उनकी सहभागिता ने यात्रा में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उनके उत्साह की ग्रामीणों ने सराहना भी की।
मुकेश कुमावत के साथ इन दोनों भाइयों का लगातार बने रहना इस यात्रा के सामाजिक और मानवीय पक्ष को भी सामने लाता है। धार्मिक आस्था के साथ एक-दूसरे का साथ देना इस पूरे सफर की महत्वपूर्ण विशेषता रही।
गांव-गांव में हुआ स्वागत
32 किमी दंडवत यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले विभिन्न गांवों और पड़ावों पर ग्रामीणों एवं युवाओं ने मुकेश कुमावत का स्वागत किया।कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पमालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। युवाओं और श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ यात्रा का समर्थन किया। इससे पूरे मार्ग में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
यात्रा के दौरान ग्रामीणों की ओर से मिले इस सहयोग ने मुकेश कुमावत के उत्साह को और बढ़ाया। लगातार आठ दिनों तक चली यात्रा के दौरान अलग-अलग पड़ावों पर लोगों की सहभागिता देखने को मिली।
सुख-शांति और समृद्धि की कामना
यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और विकास की कामना करना रहा। यात्रा पूरी होने के बाद मुकेश कुमावत ने श्री होरी हनुमान जी के दरबार में पहुंचकर क्षेत्रवासियों के लिए मंगलकामना की।उन्होंने भगवान से सभी के जीवन में सुख-शांति बनी रहने, क्षेत्र में समृद्धि आने और आपसी भाईचारा मजबूत होने की प्रार्थना की।
धार्मिक यात्राएं केवल आस्था से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एकजुटता और सामूहिक सहभागिता का माध्यम भी बनती हैं। इस यात्रा के दौरान भी ग्रामीणों और युवाओं की भागीदारी इसका उदाहरण रही।
यात्रा पूर्ण होने पर विशाल भंडारा
यात्रा के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के पावन अवसर पर श्री होरी हनुमान जी धाम मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
भंडारे में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने श्रद्धाभाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।बताया गया कि भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया। यात्रा के समापन के अवसर पर आयोजित इस भंडारे ने धार्मिक आयोजन को और व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
आस्था, संकल्प और सेवा का संदेश
मुकेश कुमावत की यह यात्रा आस्था के साथ-साथ संकल्प और सेवा की भावना को भी सामने लाती है। आठ दिनों तक 32 किलोमीटर का कठिन सफर पूरा करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण धार्मिक संकल्प रहा।यात्रा में अमृतराम और कमल प्रजापत की सहभागिता ने सामाजिक सहयोग और हौसले का संदेश दिया, वहीं रास्ते में ग्रामीणों और युवाओं द्वारा किए गए स्वागत ने सामूहिक आस्था की तस्वीर प्रस्तुत की।यात्रा के समापन पर सभी ने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
