Ujjain Mahakal: सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Ujjain Mahakal News: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को श्रावण कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर भस्म आरती के दौरान भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए। तड़के तीन बजे शुरू हुई भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही कतारों में खड़े नजर आए। जैसे ही मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।
भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। भगवान को सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और त्रिनेत्र से सजाया गया। इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं।
तड़के तीन बजे खुले मंदिर के पट
Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, शनिवार को श्रावण कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर भस्म आरती की प्रक्रिया तड़के करीब तीन बजे शुरू हुई। मंदिर के पट खुलने से पहले निर्धारित धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया। सबसे पहले वीरभद्रजी से आज्ञा ली गई। इसके बाद गर्भगृह में विराजमान भगवान की विभिन्न प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन और अर्चन किया गया।
मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन का अवसर मिला। इस दौरान मंदिर के पुजारी और पुरोहित धार्मिक अनुष्ठानों में जुटे रहे। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
पंचामृत और फलों के रस से हुआ अभिषेक
पूजन-अर्चन के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें दूध, दही, घी, शक्कर और पंचामृत से स्नान कराया गया। विभिन्न फलों के रस से भी भगवान का अभिषेक किया गया। अभिषेक की इस धार्मिक प्रक्रिया के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म
Ujjain भस्म आरती का सबसे प्रमुख और विशेष धार्मिक क्षण उस समय आया, जब महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालु लगातार ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष करते रहे और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।
सदाशिव स्वरूप में नजर आए बाबा महाकाल
शनिवार के भस्म आरती शृंगार की खास बात बाबा महाकाल का सदाशिव स्वरूप रहा। पूजन-अर्चन के बाद भगवान महाकाल को सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और त्रिनेत्र से विशेष रूप से सजाया गया। बाबा महाकाल का यह मनमोहक और दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
दर्शन के दौरान भक्तों ने भगवान महाकाल की आराधना की और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच बाबा के इस विशेष शृंगार को लेकर उत्साह देखने को मिला।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी वजह से महाकाल मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देशभर से श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन करने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
देर रात से लगी श्रद्धालुओं की कतार
Ujjain भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के आसपास पहुंचने लगे थे। सुबह आरती के समय तक बड़ी संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।
भस्म आरती के दौरान धार्मिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाकाल मंदिर में आरती का बदला हुआ समय
Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में वर्तमान समय में आरतियों के समय में बदलाव किया गया है। यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा।
आरती का निर्धारित समय इस प्रकार है:
- भस्म आरती: सुबह 3:00 से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक
श्रावण मास के दौरान उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है। शनिवार को भी हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और त्रिनेत्र से सजे दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।
