नेत्रदान सबसे बड़ा पुण्य कार्य, आचार्य परिवार का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी : अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार
रिपोर्टर: गौतम साल्बे जिला ब्यूरो चीफ – मंडलेश्वर
मंडलेश्वर। मानव सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिलता है, जब कोई परिवार अपने प्रियजन के निधन के बाद भी दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने का संकल्प लेता है। ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण मंडलेश्वर नगर में देखने को मिला, जहां स्वर्गीय नारायण जी आचार्य के निधन के पश्चात उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की।
शुक्रवार शाम अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सनातनी समाजसेवी मनोज परमार ने मंडलेश्वर के वार्ड क्रमांक-6 स्थित आचार्य परिवार के निवास पहुंचकर स्वर्गीय नारायण जी आचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और परिवार द्वारा लिए गए नेत्रदान के निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना की।
मनोज परमार ने कहा कि किसी व्यक्ति का जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन यदि उसके नेत्र किसी दूसरे व्यक्ति को नई रोशनी दे सकें, तो वह वास्तव में अमर हो जाता है। उन्होंने आचार्य परिवार के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से नेत्रदान और अंगदान के लिए आगे आने की अपील की।
शोकाकुल परिवार से मिलकर व्यक्त की संवेदनाएं
अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार शुक्रवार शाम मंडलेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने स्वर्गीय नारायण जी आचार्य के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने परिवार के सदस्य राहुल आचार्य सहित अन्य परिजनों से मुलाकात कर गहरा शोक व्यक्त किया और कठिन समय में परिवार को धैर्य रखने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि किसी प्रियजन को खोने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके द्वारा किए गए पुण्य कार्य हमेशा समाज को प्रेरित करते रहते हैं।
नेत्रदान को बताया सबसे बड़ा महादान
मनोज परमार ने अपने संबोधन में कहा कि नेत्रदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा और सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक है।
उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति अपने साथ कुछ भी नहीं ले जाता, लेकिन यदि वह अपने अंगों का दान कर देता है तो कई लोगों का जीवन बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नेत्रदान ऐसा दान है, जिससे किसी नेत्रहीन व्यक्ति को नई रोशनी और नया जीवन मिल सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान को सामाजिक आंदोलन के रूप में अपनाएं।
आचार्य परिवार ने पेश की समाज के सामने मिसाल
मनोज परमार ने कहा कि स्वर्गीय नारायण जी आचार्य के निधन के बाद उनके परिवार ने जिस संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह वास्तव में अनुकरणीय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय आसान नहीं होते, लेकिन यही निर्णय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।
उन्होंने कहा कि आचार्य परिवार ने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल शोक मनाने से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में आशा का प्रकाश पहुंचाने से मिलती है।
“आंखों के माध्यम से जीवित रहेंगे नारायण जी”
मनोज परमार ने भावुक शब्दों में कहा कि स्वर्गीय नारायण जी आचार्य आज भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके नेत्र किसी अन्य व्यक्ति की आंखों में रोशनी बनकर जीवनभर संसार को देखते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यही नेत्रदान की सबसे बड़ी विशेषता है कि व्यक्ति अपने जाने के बाद भी किसी के जीवन में उजाला छोड़ जाता है।
उन्होंने इसे अमरत्व का सबसे सुंदर माध्यम बताया।
समाज को दिया नेत्रदान और अंगदान का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मनोज परमार ने उपस्थित लोगों से कहा कि समाज में नेत्रदान और अंगदान के प्रति अभी भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि अनेक लोग जानकारी के अभाव या सामाजिक भ्रांतियों के कारण इस महान कार्य से पीछे हट जाते हैं।
उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और युवाओं से आग्रह किया कि वे लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक करें।
नेत्रदान से कई लोगों का बदल सकता है जीवन
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बताया कि देश में हजारों लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यदि अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें तो अनेक दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में प्रकाश ला सकता है।
इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने परिवार के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए और मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा नगर का सम्मानित समाज
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नगर के अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
सभी ने स्वर्गीय नारायण जी आचार्य के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
इस अवसर पर—
- राहुल आचार्य
- गोलू मामा पाटीदार
- नरेंद्र पाटीदार
- पत्रकार संघ अध्यक्ष राजेश पंवार
- कमल शर्मा
- वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश कुमार राजदीप
- रविन्द्र भालसे
- सुभाष आटोदे
- सुभाष खांडे
सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने आचार्य परिवार के निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
नेत्रदान को जनआंदोलन बनाने की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि नेत्रदान और अंगदान को केवल व्यक्तिगत निर्णय न मानकर सामाजिक जनआंदोलन बनाया जाए।
यदि प्रत्येक परिवार इस दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करे तो हजारों जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आगे आने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
समाजसेवा का सबसे सुंदर रूप
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवनभर के अंधकार से निकालकर रोशनी देना सबसे बड़ी मानव सेवा है।
नेत्रदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता, करुणा और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है।
आचार्य परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
निष्कर्ष
मंडलेश्वर में स्वर्गीय नारायण जी आचार्य के निधन के बाद उनके परिवार द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश बनकर सामने आया है। अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा पुण्य कार्य है और प्रत्येक व्यक्ति को मृत्यु के बाद अपने अंगों एवं नेत्रों का दान करने का संकल्प लेना चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा केवल शोक व्यक्त करने का अवसर नहीं रही, बल्कि यह मानवता, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश देने वाला एक प्रेरक आयोजन भी बन गई। उपस्थित सभी लोगों ने स्वर्गीय नारायण जी आचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा छोड़ी गई सेवा और प्रेरणा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
