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अमरकंटक में अवैध वसूली और बहु-शुल्क व्यवस्था से पर्यटक परेशान: प्रवेश से लेकर पर्यटन स्थलों तक कई जगह वसूली के आरोप, पारदर्शी व्यवस्था की उठी मांग

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Published On: 7 August 2026
Tourists visit Amarkantak, the sacred origin of the Narmada River, amid complaints of alleged illegal collections, multiple entry and parking fees, and demands for a transparent single tourism fee system.
— Tourists visit Amarkantak, the sacred origin of the Narmada River, amid complaints of alleged illegal collections, multiple entry and parking fees, and demands for a transparent single tourism fee system.

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अमरकंटक में अवैध वसूली और बहु-शुल्क व्यवस्था से पर्यटक परेशान: प्रवेश से लेकर पर्यटन स्थलों तक कई जगह वसूली के आरोप, पारदर्शी व्यवस्था की उठी मांग

रिपोर्ट: जिला ब्यूरो अभिषेक द्विवेदी

अमरकंटक। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित तथा मां नर्मदा के पवित्र उद्गम स्थल के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध अमरकंटक इन दिनों एक गंभीर समस्या को लेकर चर्चा में है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अनुभव करने आते हैं, लेकिन प्रवेश मार्गों से लेकर प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कथित अवैध वसूली और अलग-अलग स्थानों पर लिए जा रहे शुल्कों ने उनकी यात्रा को परेशानी भरा बना दिया है।

इस पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार धनंजय तिवारी ने एक बार फिर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए अमरकंटक में व्याप्त अव्यवस्थित शुल्क प्रणाली और कथित अवैध वसूली पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो इसका सीधा असर अमरकंटक की धार्मिक और पर्यटन छवि पर पड़ सकता है।

प्रवेश मार्गों पर कथित अवैध वसूली से बढ़ी नाराजगी

जानकारी के अनुसार अमरकंटक में प्रवेश करने वाले चार पहिया वाहनों से कुछ स्थानों पर सुविधा शुल्क के नाम पर राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि मोटरसाइकिल पर सवार कुछ लोग वाहनों को रोककर शुल्क की मांग करते हैं। कई पर्यटकों का आरोप है कि शुल्क की कोई स्पष्ट रसीद या अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और विवाद की स्थिति भी बनने की शिकायतें सामने आई हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के कारण स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जांच की मांग की है।

कई पर्यटन स्थलों पर अलग-अलग शुल्क से बढ़ी परेशानी

पर्यटकों का कहना है कि अमरकंटक पहुंचने के बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बार-बार शुल्क देना पड़ता है।

बताया गया है कि रामघाट, सोनमुड़ा, कपिलधारा सहित कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर पार्किंग, बैरियर, ग्लास व्यू-प्वाइंट और अन्य सुविधाओं के नाम पर अलग-अलग शुल्क लिए जाते हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि जब वे एक ही पर्यटन क्षेत्र में घूम रहे होते हैं, तब हर स्थान पर अलग से शुल्क देना उन्हें असुविधाजनक और अनावश्यक प्रतीत होता है।

शुल्क की पारदर्शिता पर उठे सवाल

पर्यटकों ने यह भी सवाल उठाया है कि विभिन्न स्थानों पर वसूले जा रहे शुल्क की अधिकृत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

कई लोगों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं मिलती कि शुल्क किस विभाग द्वारा लिया जा रहा है, उसका उपयोग किन कार्यों में किया जाएगा और उसके बदले कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

यही कारण है कि शुल्क व्यवस्था को लेकर भ्रम और असंतोष दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।

देशभर से आए पर्यटकों ने जताई नाराजगी

अमरकंटक पहुंचे विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने भी इस व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त किया।

बताया गया कि रीवा, कवर्धा, हैदराबाद और वाराणसी सहित कई शहरों से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि धार्मिक स्थल पर बार-बार शुल्क वसूले जाने से उनकी यात्रा का अनुभव प्रभावित हो रहा है।

उनका कहना है कि यदि सरकार या प्रशासन पर्यटन विकास के लिए शुल्क लेना चाहता है तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन व्यवस्था पारदर्शी और एकीकृत होनी चाहिए।

एकीकृत पर्यटन शुल्क प्रणाली लागू करने की मांग

पर्यटकों ने सुझाव दिया कि पूरे अमरकंटक क्षेत्र के लिए एक ही स्थान पर एकीकृत पर्यटन शुल्क (Single Entry Tourism Fee) की व्यवस्था लागू की जाए।

उनका कहना है कि प्रवेश के समय एक बार शुल्क लिया जाए और उसी के आधार पर पर्यटक सभी प्रमुख स्थलों का भ्रमण कर सकें।

इससे बार-बार भुगतान करने की परेशानी समाप्त होगी और पर्यटकों को भी सुविधा मिलेगी।

साथ ही प्रशासन के लिए राजस्व प्रबंधन और निगरानी भी आसान होगी।

सुविधाएं मिलें तो शुल्क देने में नहीं है आपत्ति

पर्यटकों का कहना है कि उन्हें शुल्क देने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसके बदले बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि शुल्क के बदले—

  • सुरक्षित पार्किंग
  • स्वच्छ शौचालय
  • स्वच्छता व्यवस्था
  • पेयजल की सुविधा
  • पर्याप्त सुरक्षा
  • सूचना केंद्र
  • दिशा-निर्देश बोर्ड
  • प्राथमिक चिकित्सा सुविधा
  • साफ-सुथरे पर्यटन स्थल

जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

उनका कहना है कि यदि सुविधाएं बेहतर होंगी तो पर्यटक भी खुशी-खुशी शुल्क देंगे।

स्थानीय नागरिकों ने भी उठाई आवाज

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अमरकंटक की पहचान धार्मिक और पर्यटन नगरी के रूप में है।

यदि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अव्यवस्था तथा कथित अवैध वसूली का सामना करेंगे तो इसका नकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र के पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सभी प्रकार की शुल्क व्यवस्था की समीक्षा कर उसे पारदर्शी बनाया जाए।

धार्मिक पर्यटन की छवि प्रभावित होने की आशंका

अमरकंटक केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।

मां नर्मदा के उद्गम स्थल होने के कारण यहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे में यदि बार-बार शुल्क वसूली और अव्यवस्थित व्यवस्था की शिकायतें बढ़ती हैं तो इससे धार्मिक पर्यटन की छवि प्रभावित हो सकती है।

पर्यटन विशेषज्ञों का भी मानना है कि बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता से ही अमरकंटक को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

वरिष्ठ पत्रकार धनंजय तिवारी सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

यदि कहीं अवैध वसूली हो रही है तो उस पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही अधिकृत शुल्क व्यवस्था को सार्वजनिक किया जाए ताकि पर्यटकों को किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

पर्यटन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि अमरकंटक जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर आधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू की जानी चाहिए।

ऑनलाइन टिकटिंग, डिजिटल भुगतान, एकीकृत प्रवेश पास, सीसीटीवी निगरानी, अधिकृत रसीद प्रणाली तथा स्पष्ट सूचना बोर्ड जैसी व्यवस्थाएं लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध वसूली की संभावनाएं भी कम होंगी।

पर्यटकों की प्रमुख मांगें

पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • सभी शुल्कों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक की जाए।
  • पूरे क्षेत्र में एकीकृत पर्यटन शुल्क व्यवस्था लागू की जाए।
  • सभी भुगतान डिजिटल और रसीद आधारित हों।
  • पार्किंग, सुरक्षा, स्वच्छता और पेयजल जैसी सुविधाएं बेहतर बनाई जाएं।
  • पर्यटन स्थलों पर सूचना केंद्र और हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं।
  • शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
  • समय-समय पर शुल्क व्यवस्था का सामाजिक ऑडिट कराया जाए।

निष्कर्ष

अमरकंटक की पहचान केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र के रूप में है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

यदि कथित अवैध वसूली, बहु-शुल्क व्यवस्था और पारदर्शिता से जुड़ी शिकायतों का समय रहते समाधान किया जाता है, तो इससे न केवल पर्यटकों का विश्वास बढ़ेगा बल्कि अमरकंटक की धार्मिक एवं पर्यटन पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इन शिकायतों की जांच कर क्या कदम उठाता है और अमरकंटक की पर्यटन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और पर्यटक हितैषी बनाने के लिए कौन-से ठोस निर्णय लेता है।

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