गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत रखने का संदेश, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर हुआ मंथन
Damoh। भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है। गुरु केवल ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और संस्कारों के निर्माता होते हैं। इसी भाव को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रानी दमयंती शाखा, दमोह के तत्वावधान में बुधवार, 6 अगस्त को शासकीय नवीन पांडे माध्यमिक विद्यालय में गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, विद्यार्थियों में अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना विकसित करना तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करना था। आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में भारतीय संस्कृति, संस्कारों और शिक्षा के मूल्यों की झलक देखने को मिली।
मां सरस्वती एवं गुरु वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. काव्या मिश्रा द्वारा मां सरस्वती वंदना एवं गुरु वंदना की मनमोहक प्रस्तुति के साथ किया गया। वंदना के माध्यम से शिक्षा, ज्ञान और संस्कारों की देवी मां सरस्वती का स्मरण किया गया तथा गुरु के प्रति सम्मान की भावना को अभिव्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भारतीय परंपराओं के अनुरूप आयोजन में सहभागिता की। वातावरण में अनुशासन, श्रद्धा और सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और अपने शिक्षकों के प्रति आदर प्रकट किया।
प्राचार्या श्रीमती कल्पना नेमा ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती कल्पना नेमा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र भी होता है। यहां शिक्षक बच्चों को विषय ज्ञान के साथ-साथ अनुशासन, नैतिकता, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं।
कार्यक्रम में परिषद की ओर से श्रीमती अनीता असाटी एवं श्रीमती सुनीता मिश्रा प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने भी गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा और भारतीय परंपराओं में इसके महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सदैव सर्वोच्च
इस अवसर पर शाखा अध्यक्ष डॉ. किरण एवं श्रीमती प्रेमलता उपाध्याय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान सम्मान दिया गया है। प्राचीन समय से ही गुरु और शिष्य का संबंध ज्ञान, विश्वास, अनुशासन और समर्पण पर आधारित रहा है।
उन्होंने कहा कि गुरु विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। गुरु के मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने शिक्षकों के प्रति हमेशा सम्मान, विनम्रता और आभार का भाव रखें। शिक्षकों के बताए मार्ग पर चलकर ही वे अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं और समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
छात्राओं ने शिक्षकों का किया विशेष सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए विशेष आयोजन किया। छात्राओं ने शिक्षकों को तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया और तुलसी का पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण एवं भारतीय परंपरा का संदेश दिया।
तिलक एवं पौधा भेंट करने की यह पहल गुरु के प्रति श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बनी। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के इस भावपूर्ण सम्मान को सराहा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा दिया गया सम्मान उनके लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर मेहनत करने, अनुशासन बनाए रखने और जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का भी सम्मान किया गया। परिषद की सदस्य श्रीमती सुमन दुबे, श्रीमती खुशबू प्रजापति सहित अन्य सदस्यों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास दिखाई दिया। परिषद के सदस्यों ने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान करने से उनमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और अन्य विद्यार्थी भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और अनुशासन ही उन्हें सफलता के मार्ग पर आगे ले जाते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने का अवसर मिलता है।

गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और परिषद की सदस्याओं ने गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण एवं उसके मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे समाज में शिक्षा, संस्कार और सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा के स्वरूप में भले ही बदलाव आया है, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच सम्मान एवं विश्वास का संबंध आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षक की भूमिका हमेशा मार्गदर्शक के रूप में बनी रहती है।
राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सामूहिक वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्र के प्रति अपने सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी, परिषद की सदस्याएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, संस्कार और भारतीय परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।
गुरु वंदन–छात्र अभिनंदन कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु का सम्मान और शिक्षा के मूल्यों का संरक्षण समाज के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित करते हैं।
संवाददाता
सोनू अठया
स्वराज वाणी, दमोह (मध्य प्रदेश)
