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भेरूंदा मंडी में मूंग की आवक में जबरदस्त उछाल, सीमित सरकारी खरीद के बाद मंडी पहुंचे किसान; दामों में उतार-चढ़ाव जारी

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Published On: 5 August 2026
Farmers bring large quantities of moong to Bherunda Agricultural Produce Market as arrivals surge following limited MSP procurement, with market prices showing fluctuations.
— Farmers bring large quantities of moong to Bherunda Agricultural Produce Market as arrivals surge following limited MSP procurement, with market prices showing fluctuations.

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भेरूंदा मंडी में मूंग की आवक में जबरदस्त उछाल, सीमित सरकारी खरीद के बाद मंडी पहुंचे किसान; दामों में उतार-चढ़ाव जारी

संवाददाता: विकास सैनी
स्थान: भेरूंदा

मध्यप्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में शामिल भेरूंदा कृषि उपज मंडी में इन दिनों मूंग की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। बुधवार को मंडी परिसर में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां सबसे अधिक आवक मूंग की रही। हालांकि आवक बढ़ने के साथ ही मंडी में जिंसों के दामों में भी लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, जिससे किसान बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मंडी से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार मध्यप्रदेश शासन द्वारा समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की खरीद सीमित मात्रा में किए जाने के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी शेष उपज खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसका सीधा असर भेरूंदा मंडी में देखने को मिल रहा है, जहां पिछले कुछ दिनों की तुलना में मूंग की आवक में अचानक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में सरकारी खरीद की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो मंडी में मूंग की आवक और अधिक बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी।

समर्थन मूल्य पर सीमित खरीद बनी बड़ी वजह

इस वर्ष मध्यप्रदेश शासन द्वारा मूंग की खरीद समर्थन मूल्य पर निर्धारित सीमा के अनुसार की गई। किसानों का कहना है कि केवल लगभग 60 प्रतिशत उपज की ही सरकारी खरीद हो सकी, जबकि बड़े किसानों के पास इससे कहीं अधिक उत्पादन उपलब्ध है।

सरकारी खरीद पूरी होने के बाद बची हुई उपज अब निजी व्यापारियों और मंडियों के माध्यम से बेची जा रही है। इसी कारण भेरूंदा मंडी में मूंग की आवक लगातार बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि यदि पूरी उपज की खरीद समर्थन मूल्य पर होती, तो उन्हें खुले बाजार की अनिश्चित कीमतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

मंडी में मूंग की सबसे अधिक आवक

भेरूंदा कृषि उपज मंडी में इस समय सबसे अधिक आवक मूंग की दर्ज की जा रही है। सुबह से ही किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के माध्यम से अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं।

मंडी परिसर में बड़ी संख्या में कृषि उपज आने के कारण तुलाई और नीलामी की प्रक्रिया भी लगातार जारी रही। व्यापारियों के अनुसार आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।

मंडी प्रबंधन भी बढ़ती आवक को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं करने में जुटा हुआ है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

क्यों बढ़ी मंडी में किसानों की संख्या?

किसानों के अनुसार सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद उनके पास अपनी शेष उपज बेचने के लिए मंडी ही एकमात्र विकल्प बचा है।

इस कारण अब ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान सीधे भेरूंदा मंडी पहुंच रहे हैं।

विशेष रूप से बड़े किसानों के पास अभी भी पर्याप्त मात्रा में मूंग उपलब्ध है, जिसे वे बाजार भाव पर बेचने के लिए ला रहे हैं।

दामों में लगातार बना हुआ है उतार-चढ़ाव

भले ही मंडी में आवक बढ़ी हो, लेकिन कीमतों में स्थिरता अभी देखने को नहीं मिल रही है।

व्यापारियों का कहना है कि बाजार में मांग और आपूर्ति के अनुसार प्रतिदिन भावों में बदलाव हो रहा है।

यदि आवक लगातार बढ़ती रही तो कीमतों पर दबाव भी बढ़ सकता है। वहीं यदि मांग मजबूत बनी रहती है तो अच्छे गुणवत्ता वाले माल को बेहतर भाव मिलने की संभावना बनी रहेगी।

भेरूंदा मंडी के ताजा भाव

बुधवार को मंडी में प्रमुख कृषि उपज के भाव इस प्रकार दर्ज किए गए—

जिंस भाव (रुपये प्रति क्विंटल)
मूंग ₹6,500 – ₹7,300
गेहूं ₹2,525 – ₹2,700
सोयाबीन ₹6,100 – ₹6,400
डंकी (हल्का) चना लगभग ₹5,200

व्यापारियों का कहना है कि गुणवत्ता के अनुसार भावों में अंतर देखने को मिल रहा है।

किसानों में सरकारी खरीद को लेकर नाराजगी

कई किसानों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर सीमित खरीद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उनका कहना है कि यदि सरकार अधिक मात्रा में खरीद करती तो किसानों को बेहतर मूल्य मिलता और खुले बाजार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता।

कुछ किसानों ने मांग की कि आगामी वर्षों में उत्पादन के अनुरूप खरीद सीमा तय की जाए ताकि किसानों को उचित लाभ मिल सके।

व्यापारियों की क्या है राय?

मंडी के व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में मूंग की पर्याप्त उपलब्धता है।

उनके अनुसार—

  • आने वाले दिनों में आवक और बढ़ सकती है।
  • गुणवत्ता के अनुसार अच्छे दाम मिल रहे हैं।
  • अधिक आवक होने पर भावों में हल्की नरमी आ सकती है।
  • बाजार की स्थिति मांग पर निर्भर करेगी।

व्यापारियों ने किसानों को सलाह दी कि उपज को अच्छी तरह साफ और ग्रेडिंग करके मंडी लाएं, जिससे बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

अच्छी गुणवत्ता वाली मूंग को मिल रहे बेहतर भाव

मंडी में उच्च गुणवत्ता वाली मूंग को अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • साफ-सुथरी उपज
  • कम नमी
  • समान दाना
  • बेहतर ग्रेडिंग

जैसे कारकों के कारण किसानों को अधिक भाव प्राप्त हो सकते हैं।

राजस्व और व्यापारिक गतिविधियों में आई तेजी

मूंग की बढ़ती आवक से मंडी की व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिल रही है।

तुलाई केंद्र, हम्माल, परिवहन व्यवसाय और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं।

व्यापारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले कुछ दिनों तक मंडी में कारोबार काफी सक्रिय रहेगा।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान बाजार भाव पर लगातार नजर रखें और जल्दबाजी में उपज बेचने के बजाय बाजार की स्थिति का मूल्यांकन करें।

यदि गुणवत्ता अच्छी है तो बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।

साथ ही भंडारण की सुविधा रखने वाले किसान बाजार में अनुकूल समय का इंतजार भी कर सकते हैं।

आने वाले दिनों में क्या रह सकती है स्थिति?

मंडी कारोबारियों के अनुसार अगले कुछ दिनों में मूंग की आवक में और वृद्धि होने की संभावना है।

यदि सरकारी खरीद दोबारा शुरू नहीं होती या खरीद सीमा में वृद्धि नहीं होती, तो अधिकांश किसान अपनी शेष उपज मंडियों में ही लेकर आएंगे।

इसका सीधा प्रभाव मंडी की गतिविधियों और बाजार भाव पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

भेरूंदा कृषि उपज मंडी में मूंग की आवक में आया अचानक उछाल इस बात का संकेत है कि समर्थन मूल्य पर सीमित सरकारी खरीद के बाद किसान अब खुले बाजार का रुख कर रहे हैं। फिलहाल मंडी में व्यापारिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन बढ़ती आवक के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव भी जारी है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि आवक कितनी बढ़ती है, मांग कैसी रहती है और शासन खरीद नीति में कोई बदलाव करता है या नहीं।

 

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