त्योहारों से पहले महंगाई का बड़ा झटका: शक्कर 25% महंगी, तुअर-चना दाल के बढ़े दाम; रसोई से लेकर मिठाइयों तक बढ़ेगा खर्च
भोपाल। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से ठीक पहले आम लोगों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ सप्ताह में शक्कर, तुअर (अरहर) दाल, चना दाल, बेसन, मैदा, चावल और खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर घर-घर की रसोई और मासिक बजट पर पड़ रहा है। किराना व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में मिठाइयों, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती मांग, सीमित स्टॉक, आपूर्ति पर दबाव और कुछ सरकारी नीतिगत कारणों के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आई है। त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ने के कारण महंगाई का असर और अधिक महसूस किया जा सकता है।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी रसोई की चिंता
भारतीय परिवारों में त्योहारों का मौसम खरीदारी, पूजा-पाठ और पारंपरिक व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इस समय घरों में मिठाइयां, नमकीन, पकवान और विशेष भोजन बड़ी मात्रा में तैयार किए जाते हैं। ऐसे में यदि चीनी, दाल, बेसन, मैदा और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ जाएं तो घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ता है।
इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बाजार में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से गृहिणियों और उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
पिछले एक महीने में शक्कर हुई करीब 25 प्रतिशत महंगी
किराना बाजार के व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान शक्कर की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिसका असर फुटकर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
वर्तमान में—
- थोक बाजार में शक्कर लगभग 51 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है।
- फुटकर बाजार में इसकी कीमत 54 से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
चीनी के बढ़े दाम का असर केवल चाय या घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि मिठाई उद्योग, बेकरी उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी पड़ रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं शक्कर की कीमतें?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शक्कर की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं।
1. बाजार में स्टॉक कम
पिछले वर्ष की तुलना में बाजार में चीनी का उपलब्ध स्टॉक कम बताया जा रहा है। मांग अधिक होने और उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी आई है।
2. मांग बनी हुई है
त्योहारी सीजन नजदीक आने के कारण चीनी की मांग लगातार बढ़ रही है। मिठाई निर्माता, होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू उपभोक्ता बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
3. इथेनॉल नीति का प्रभाव
सरकार की इथेनॉल नीति के तहत गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में उपयोग किया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल यही एक कारण नहीं है, लेकिन इससे चीनी की उपलब्धता पर कुछ असर अवश्य पड़ा है।
4. आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव
लॉजिस्टिक लागत, परिवहन खर्च और मांग-आपूर्ति के असंतुलन ने भी कीमतों को ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई है।
तुअर और चना दाल ने भी बढ़ाई चिंता
सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि तुअर (अरहर) दाल और चना दाल के दामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दाल भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा है। लगभग हर घर में प्रतिदिन दाल का उपयोग किया जाता है। ऐसे में दालों के महंगे होने से सीधे घरेलू खर्च में वृद्धि होती है।
वर्तमान बाजार दरों के अनुसार—
- अरहर दाल थोक में लगभग 110 से 115 रुपये प्रति किलो तथा फुटकर बाजार में 120 से 130 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
- चना दाल थोक बाजार में 72 से 75 रुपये प्रति किलो और फुटकर बाजार में 80 से 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
बेसन और मैदा भी हुए महंगे
चना दाल महंगी होने का असर बेसन की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
बेसन का उपयोग—
- लड्डू
- भजिया
- नमकीन
- सेव
- पकौड़े
- मिठाइयों
सहित अनेक खाद्य पदार्थों में होता है।
इसके अलावा मैदा के दामों में भी वृद्धि हुई है।
वर्तमान बाजार में—
- मैदा थोक में 38 से 40 रुपये प्रति किलो
- फुटकर में 42 से 46 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
मिठाइयों के दाम बढ़ने की आशंका
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में कमी नहीं आई तो आने वाले त्योहारों के दौरान मिठाइयों के दाम बढ़ाना मजबूरी हो जाएगा।
चीनी, बेसन, घी, सूखे मेवे और अन्य सामग्री की कीमतें पहले से ही बढ़ चुकी हैं।
इनका असर विशेष रूप से निम्न मिठाइयों पर पड़ सकता है—
- बेसन लड्डू
- मोतीचूर लड्डू
- मैसूर पाक
- बर्फी
- पेड़ा
- गुलाब जामुन
- रसगुल्ला
- काजू आधारित मिठाइयां
त्योहारों पर बढ़ सकता है खर्च
आने वाले दिनों में देशभर में कई प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे।
इनमें शामिल हैं—
- रक्षाबंधन
- जन्माष्टमी
- गणेशोत्सव
- नवरात्रि
- दशहरा
- दीपावली
इन अवसरों पर मिठाइयों, नमकीन, पूजा सामग्री और खाद्य वस्तुओं की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
यदि वर्तमान कीमतें बनी रहती हैं तो त्योहार मनाने का खर्च पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हो सकता है।
सरकार ने स्टॉक लिमिट भी तय की
त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा भी निर्धारित की है।
सरकार का उद्देश्य है—
- बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
- कृत्रिम कमी पैदा न हो।
- जमाखोरी पर रोक लगे।
- उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर सामग्री उपलब्ध हो।
हालांकि व्यापारियों का कहना है कि केवल स्टॉक लिमिट तय करने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी, जब तक उत्पादन और आपूर्ति सामान्य नहीं होती।
किराना व्यापारियों की क्या राय?
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।
उनका मानना है कि केवल चीनी ही नहीं बल्कि चावल, आटा, मैदा और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
यदि समय रहते आपूर्ति व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।
फुटकर व्यापारियों की बढ़ी परेशानी
फुटकर दुकानदारों का कहना है कि थोक बाजार में रोजाना कीमतें बदल रही हैं।
इसका असर सीधे खुदरा व्यापार पर पड़ रहा है।
दुकानदारों के अनुसार—
- ग्राहकों की खरीदारी कम हो रही है।
- लोग कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं।
- महंगे दामों के कारण बिक्री प्रभावित हुई है।
- छोटे व्यापारियों का मुनाफा भी घटा है।
घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव
महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ रहा है।
एक सामान्य परिवार हर महीने जिन वस्तुओं का उपयोग करता है उनमें शामिल हैं—
- चीनी
- दाल
- चावल
- आटा
- तेल
- बेसन
- मैदा
इन सभी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होने से मासिक रसोई बजट कई सौ रुपये तक बढ़ सकता है।
विशेषकर बड़े परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों की सलाह
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में आपूर्ति सामान्य होती है और उत्पादन में सुधार आता है तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि—
- खाद्य वस्तुओं की नियमित निगरानी की जाए।
- जमाखोरी पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
- आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- उपभोक्ताओं को अनावश्यक घबराहट में अधिक खरीदारी से बचना चाहिए।
भोपाल में प्रमुख खाद्य वस्तुओं के वर्तमान भाव (प्रति किलो)
| वस्तु | थोक भाव | फुटकर भाव |
|---|---|---|
| शक्कर | ₹51 | ₹54–55 |
| अरहर दाल | ₹110–115 | ₹120–130 |
| चना दाल | ₹72–75 | ₹80–85 |
| मैदा | ₹38–40 | ₹42–46 |
नोट: ये दरें स्थानीय किराना व्यापारियों से प्राप्त बाजार जानकारी के आधार पर हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतों में अंतर संभव है।
निष्कर्ष
त्योहारी सीजन से पहले खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शक्कर, तुअर दाल, चना दाल, बेसन, मैदा और अन्य आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने से रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में कीमतों में राहत नहीं मिलती है तो त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों की नजर अब सरकार के अगले कदम और बाजार की स्थिति पर टिकी हुई है।
