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Ujjain: श्रावण की सप्तमी पर बाबा महाकाल का चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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Published On: 5 August 2026
Ujjain
— श्रावण कृष्ण पक्ष की सप्तमी पर बाबा महाकाल का चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से दिव्य श्रृंगार किया गया

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Ujjain: श्रावण की सप्तमी पर बाबा महाकाल का चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Ujjain News: श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है और उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रावण कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर बुधवार तड़के आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। इस अवसर पर भगवान महाकाल का चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से विशेष श्रृंगार किया गया, जिसने भक्तों को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। मंदिर परिसर पूरे समय “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजता रहा।

Ujjain तड़के 3 बजे खुले मंदिर के पट

श्रावण मास में बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी देर रात से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालु कई घंटों तक इंतजार करने के बाद गर्भगृह के दर्शन के लिए पहुंचे।

परंपरा के अनुसार तड़के करीब 3 बजे मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेकर पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया और फिर भगवान महाकाल का अभिषेक आरंभ हुआ।

पंचामृत और फलों के रस से हुआ अभिषेक

Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल का जलाभिषेक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया गया। जलाभिषेक के बाद शिवलिंग का दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके साथ ही विभिन्न फलों के रस अर्पित कर भगवान का विशेष पूजन संपन्न हुआ।

पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। वैदिक मंत्रों की गूंज और शंखध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से हुआ विशेष श्रृंगार

अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। इस बार के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि भगवान महाकाल को चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिससे उनका स्वरूप और भी मनमोहक दिखाई दिया।

श्रृंगार के बाद कपूर आरती की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान के साकार स्वरूप के दिव्य दर्शन किए। बड़ी संख्या में मौजूद भक्त इस अलौकिक दृश्य को देखकर भावविभोर हो गए।

महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की गई भस्म

श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई।

मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का धार्मिक महत्व देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच विशेष माना जाता है। श्रावण मास में इस आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।

जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

Ujjain भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते दिखाई दिए। जैसे ही आरती शुरू हुई, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान शिव की आराधना करते रहे।

श्रावण मास के कारण मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को भी विशेष रूप से मजबूत किया गया है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

शरद पूर्णिमा तक बदला रहेगा आरती का समय

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने बताया कि श्रावण और आगामी धार्मिक पर्वों को ध्यान में रखते हुए आरतियों के समय में परिवर्तन किया गया है। यह व्यवस्था आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगी।

महाकालेश्वर मंदिर की आरती का समय
  • भस्म आरती: सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
श्रावण में बढ़ जाता है महाकाल दर्शन का महत्व

हिंदू धर्म में श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और भस्म आरती में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना और भस्म आरती के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि हर दिन महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

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