बैतूल के ग्राम जामठी में सरकारी चरागाह, पंचायत नर्सरी और श्मशान भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला, ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
संवाददाता: आशीष ठाकरे
आठनेर (बैतूल)। बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धामोरी के ग्राम जामठी में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार, 4 अगस्त को तहसीलदार आठनेर को ज्ञापन सौंपकर सरकारी चरागाह भूमि, पंचायत नर्सरी, सार्वजनिक कुएं तथा श्मशान घाट की भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसका मूल स्वरूप बहाल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में गांव की सार्वजनिक सुविधाओं पर और अधिक असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन कराकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
तहसीलदार को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन
ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार आठनेर को दिए गए ज्ञापन में गांव की सार्वजनिक उपयोग की विभिन्न सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का उल्लेख किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के अधीन आने वाली चरागाह भूमि, पंचायत नर्सरी तथा श्मशान घाट जैसी सार्वजनिक संपत्तियां पूरे गांव के उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई हैं। यदि इन पर अतिक्रमण होता है तो उसका सीधा प्रभाव ग्रामीणों के दैनिक जीवन और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ता है।
इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराने की मांग की है।
कथित अतिक्रमण के लगाए गए आरोप
ज्ञापन में ग्रामीणों ने हयपत पंडोले पर सरकारी चरागाह भूमि, पंचायत नर्सरी की भूमि तथा सरकारी कुएं पर वर्षों से कथित अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत द्वारा विकसित की गई नर्सरी क्षेत्र की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच प्रशासन द्वारा की जानी शेष है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पंचायत नर्सरी को नुकसान पहुंचने की आशंका
ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत द्वारा वर्षों पहले विकसित की गई नर्सरी में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए थे।
इनमें प्रमुख रूप से—
- आम के पौधे
- जामुन
- आंवला
- अन्य छायादार एवं उपयोगी पौधे
शामिल हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कथित अतिक्रमण के कारण इन पौधों वाली भूमि भी प्रभावित हो रही है, जिससे पंचायत द्वारा किए गए पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
श्मशान घाट की भूमि भी प्रभावित होने का दावा
ग्रामीणों ने ज्ञापन में यह भी कहा कि पंचायत नर्सरी के समीप स्थित श्मशान घाट की भूमि का क्षेत्रफल भी कथित अतिक्रमण के कारण कम होता जा रहा है।
उनका कहना है कि गांव के लोगों के अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्य इसी सार्वजनिक भूमि पर संपन्न होते हैं। यदि श्मशान घाट का क्षेत्र लगातार कम होता है तो भविष्य में ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से इस भूमि का सीमांकन कराकर उसका वास्तविक क्षेत्र सुरक्षित रखने की मांग की है।
सार्वजनिक कुएं पर भी जताई चिंता
ज्ञापन में ग्रामीणों ने गांव के सार्वजनिक कुएं का भी उल्लेख किया है।
उनका कहना है कि सरकारी कुआं गांव की सार्वजनिक संपत्ति है और इसका उपयोग लंबे समय से ग्रामीण करते आ रहे हैं। यदि इस पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा होता है तो यह सार्वजनिक हित के विपरीत होगा।
इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन से कुएं की भूमि की भी जांच कराने की मांग की है।
चरागाह भूमि का संरक्षण जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी चरागाह भूमि पशुपालकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
गांव में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हुए हैं और चरागाह भूमि का उपयोग पशुओं के चारे के लिए किया जाता है। यदि इस प्रकार की सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण होता है तो इसका सीधा प्रभाव ग्रामीणों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
इसलिए ग्रामीणों ने चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
राजस्व विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की राजस्व विभाग के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि—
- संबंधित भूमि का सीमांकन कराया जाए।
- राजस्व अभिलेखों का सत्यापन किया जाए।
- यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- सरकारी भूमि को पुनः मुक्त कर उसका मूल स्वरूप बहाल किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति भी नहीं होगी।
सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा पर जोर
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में कहा कि पंचायत नर्सरी, चरागाह भूमि, श्मशान घाट और सार्वजनिक कुएं जैसी संपत्तियां पूरे गांव की साझा धरोहर हैं।
इनका संरक्षण केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते इन सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि उनके ज्ञापन पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि जांच के बाद अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो सरकारी भूमि को तत्काल मुक्त कराया जाए ताकि पंचायत की सार्वजनिक संपत्तियां सुरक्षित रह सकें और ग्रामीणों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन द्वारा ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार जांच की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजस्व विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।
