MP Moong-Urad Procurement New Rules 2026: मध्यप्रदेश में अब नॉमिनी भी बेच सकेंगे मूंग-उड़द, E-KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन होगा अनिवार्य, किसान के खाते में ही पहुंचेगा भुगतान
भोपाल। मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी को लेकर केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब ऐसे किसान जिनका आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) तकनीकी कारणों से बार-बार विफल हो रहा है, वे अपनी उपज नामित प्रतिनिधि (Nominee) के माध्यम से भी बेच सकेंगे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, इस सुविधा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र किसान केवल तकनीकी दिक्कतों के कारण अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित न रहे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फसल का पूरा भुगतान केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में नॉमिनी या प्रतिनिधि के खाते में राशि ट्रांसफर नहीं होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह विशेष व्यवस्था लागू की गई है ताकि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और किसान हितैषी बनी रहे।
समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी के दौरान बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज बेचते हैं।
हाल के वर्षों में कई किसानों को आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। फिंगरप्रिंट मैच न होने, नेटवर्क संबंधी दिक्कतों या अन्य तकनीकी कारणों से अनेक किसानों की खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है।
अब नॉमिनी के माध्यम से भी बेच सकेंगे उपज
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी किसान का बायोमेट्रिक सत्यापन बार-बार विफल होता है, तो वह पहले से नामित प्रतिनिधि (Nominee) के माध्यम से अपनी फसल बेच सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल वास्तविक और विशेष परिस्थितियों में किसानों को राहत देना है। इसका लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो तकनीकी कारणों से स्वयं सत्यापन नहीं करा पा रहे हैं।
किन परिस्थितियों में मिलेगी यह सुविधा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था सामान्य प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
इस सुविधा का उपयोग केवल निम्न परिस्थितियों में किया जा सकेगा—
- आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन बार-बार विफल होना।
- तकनीकी कारणों से किसान का फिंगरप्रिंट सत्यापित न होना।
- खरीदी केंद्र पर निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी न हो पाना।
- वास्तविक एवं प्रमाणित विशेष परिस्थितियां।
नॉमिनी के लिए कौन-कौन सी शर्तें होंगी लागू
सरकार ने प्रतिनिधि (Nominee) के माध्यम से खरीदी की अनुमति देते हुए कई महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं।
किसान का सत्यापन अनिवार्य
सबसे पहले किसान का पंजीकरण, पहचान और फोटो का सत्यापन किया जाएगा।
बिना किसान की पहचान सुनिश्चित किए नॉमिनी के माध्यम से खरीदी की अनुमति नहीं मिलेगी।
नॉमिनी का OTP और E-KYC जरूरी
जिस प्रतिनिधि को किसान अधिकृत करेगा, उसका भी डिजिटल सत्यापन किया जाएगा।
इसके लिए—
- OTP आधारित सत्यापन
- E-KYC
- आधार प्रमाणीकरण
जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन भी होगा
केवल OTP पर्याप्त नहीं होगा।
प्रतिनिधि का बायोमेट्रिक सत्यापन भी आवश्यक रहेगा ताकि किसी प्रकार की फर्जी खरीदी को रोका जा सके।
भुगतान केवल किसान के खाते में ही होगा
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट कर दिया है।
फसल की खरीदी के बाद भुगतान—
- केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में होगा।
- किसी भी स्थिति में प्रतिनिधि के बैंक खाते में राशि नहीं भेजी जाएगी।
- भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रहेगी।
इसका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और भुगतान संबंधी विवादों को रोकना है।
नॉमिनी के खाते में पैसा क्यों नहीं जाएगा
केंद्र सरकार का मानना है कि यदि भुगतान प्रतिनिधि के खाते में किया जाएगा तो विवाद, धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ सकती है।
इसी कारण खरीदी चाहे प्रतिनिधि के माध्यम से हो, लेकिन राशि केवल वास्तविक किसान के बैंक खाते में ही जमा होगी।
किसानों को क्या होगा फायदा
नई व्यवस्था से हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी समस्या से राहत
जिन किसानों के फिंगरप्रिंट मशीन में बार-बार मैच नहीं हो रहे थे, वे अब अपनी उपज बेच सकेंगे।
समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा
तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र किसान MSP का लाभ लेने से वंचित नहीं रहेगा।
भुगतान रहेगा सुरक्षित
पूरी राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचने से भुगतान सुरक्षित रहेगा।
पारदर्शिता बढ़ेगी
OTP, E-KYC और बायोमेट्रिक सत्यापन की वजह से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र किसान केवल तकनीकी कारणों से अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो।
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान केवल किसान के बैंक खाते में ही किया जाएगा ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी सुविधा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद खरीदी केंद्रों पर किसानों को राहत मिलने की संभावना है।
अब ऐसे मामलों में जहां बायोमेट्रिक सत्यापन संभव नहीं होगा, वहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि के माध्यम से खरीदी की जा सकेगी।
इससे खरीदी केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ और विवाद भी कम होंगे।
किसानों को किन बातों का रखना होगा ध्यान
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि—
- आधार और बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें।
- मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो।
- नामित प्रतिनिधि की जानकारी सही दर्ज कराएं।
- खरीदी केंद्र पर सभी आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं।
- सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उपज बेचें।
नई व्यवस्था के प्रमुख नियम
- आधार आधारित बायोमेट्रिक विफल होने पर ही नॉमिनी की सुविधा।
- किसान की पहचान और फोटो सत्यापन अनिवार्य।
- प्रतिनिधि का OTP आधारित E-KYC जरूरी।
- प्रतिनिधि का बायोमेट्रिक सत्यापन भी अनिवार्य।
- भुगतान केवल किसान के बैंक खाते में।
- प्रतिनिधि के खाते में किसी भी स्थिति में राशि नहीं जाएगी।
- सुविधा केवल वास्तविक एवं विशेष परिस्थितियों में लागू होगी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य दो प्रमुख लक्ष्यों को पूरा करना है—
पहला, कोई भी पात्र किसान तकनीकी दिक्कत के कारण समर्थन मूल्य से वंचित न रहे।
दूसरा, खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहे तथा किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त हो।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में मूंग और उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। अब आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या आने पर किसान नामित प्रतिनिधि के माध्यम से भी अपनी उपज बेच सकेंगे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरी खरीदी प्रक्रिया में डिजिटल सत्यापन अनिवार्य रहेगा और भुगतान केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही किया जाएगा। इससे एक ओर पात्र किसानों को सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
