‘वृहद वृक्षारोपण महाअभियान’ का आगाज, बच्चों को ‘ग्रीन डायरी’ और ‘पौधा बैंक’ से जोड़ने की अभिनव पहल
भीनमाल में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में नई शुरुआत
Bhinmal(मुकेश सोलंकी)। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से भीनमाल शहर में एक प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की गई। नीमगोरिया क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में आयोजित ‘वृहद वृक्षारोपण महाअभियान’ के तहत बड़ी संख्या में पौधरोपण कर समाज को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया। इस अभियान का शुभारंभ विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यनारायण श्रीमाली ने अपने परिवार के साथ पौधा लगाकर किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे एक जनआंदोलन का स्वरूप देना है। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने के लिए कई अभिनव योजनाओं की भी घोषणा की गई।
पौधरोपण के साथ दिया हरित भविष्य का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से हुई, जिसमें अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यनारायण श्रीमाली ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता बन चुका है।
उन्होंने कहा कि पौधे हमारी सांसों का आधार हैं और यदि आज हम अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनका संरक्षण करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, संतुलित जलवायु और बेहतर पर्यावरण मिल सकेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आह्वान किया।
बच्चों को पर्यावरण से जोड़ने की अनूठी पहल
कार्यक्रम की सबसे विशेष पहल बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से सीधे जोड़ने की रही। इस दौरान दिनेश दवे ने “एक बालक–एक पौधा–एक वर्ष” का प्रेरक मंत्र प्रस्तुत किया।
इस अभियान के तहत प्रत्येक बच्चे को एक पौधा लगाने और पूरे एक वर्ष तक उसकी नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बच्चों द्वारा पौधे की वृद्धि, सिंचाई, खाद, देखभाल और विकास का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए ‘ग्रीन डायरी’ तैयार करने का सुझाव भी दिया गया।
ग्रीन डायरी में बच्चे पौधे की ऊंचाई, नई पत्तियों की संख्या, मौसम के अनुसार उसके विकास और देखभाल से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे। इससे उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और पर्यावरण संरक्षण को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।
‘ग्रीन डायरी’ बनेगी बच्चों की पर्यावरण साथी
कार्यक्रम में बताया गया कि ग्रीन डायरी केवल एक रिकॉर्ड बुक नहीं होगी बल्कि यह बच्चों और प्रकृति के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनेगी।
डायरी के माध्यम से विद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि एक पौधे को बड़ा वृक्ष बनने में कितनी मेहनत और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है। इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी और वे पर्यावरण संरक्षण को केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाएंगे।
‘हरित पाठशाला’ अभियान पर विशेष जोर
स्काउट-गाइड सचिव डॉ. घनश्याम कुमार व्यास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालयों में ‘हरित पाठशाला’ अभियान चलाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों को बचपन से ही प्रकृति संरक्षण का संस्कार दिया जाए तो भविष्य में समाज पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक बनेगा। उन्होंने ‘मेरा पौधा–मेरा प्रहरी’ अभियान के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लगाए हुए पौधे की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
उनका कहना था कि जब बच्चे स्वयं पौधे लगाएंगे और उन्हें बड़ा होते देखेंगे तो उनके भीतर पर्यावरण के प्रति स्वाभाविक लगाव विकसित होगा।

‘पौधा बैंक’ की अभिनव अवधारणा
कार्यक्रम के दौरान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘पौधा बैंक’ स्थापित करने की अनूठी अवधारणा भी प्रस्तुत की गई।
इस योजना के तहत स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधों का संरक्षण और उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी ताकि समय-समय पर वृक्षारोपण अभियानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों की कमी न हो।
पौधा बैंक के माध्यम से विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों को आसानी से पौधे उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और जैव विविधता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से मिलेगा बल
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में प्रतिवर्ष एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में हरित क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, युवाओं और महिलाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
विभिन्न संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर विप्र फाउंडेशन जोन-1सी के अध्यक्ष चिरंजीलाल दवे, जिलाध्यक्ष नेनसिंह राजपुरोहित, युवा जिलाध्यक्ष पवन दवे, क्षेत्रपाल मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रेमाराम बंजारा, मनोज अग्रवाल, कालूराम परमार सहित अनेक पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
सभी अतिथियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यनारायण श्रीमाली का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
हरित भविष्य की ओर मजबूत कदम
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है।
‘वृहद वृक्षारोपण महाअभियान’ के साथ शुरू की गई ग्रीन डायरी, एक बालक–एक पौधा–एक वर्ष, हरित पाठशाला, मेरा पौधा–मेरा प्रहरी और पौधा बैंक जैसी पहलें बच्चों और समाज को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
इन नवाचारों के माध्यम से भीनमाल में पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित स्थायी आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण मिल सके।
