MP Weather Today: 6 अगस्त से फिर बदलेगा मध्य प्रदेश में मानसून का मिजाज, तेज बारिश की होगी वापसी, प्रदेश में अब भी 16% वर्षा की कमी
MP में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश का दौर थमने के बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन व्यापक और तेज बारिश देखने को नहीं मिल रही। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आगामी दो दिनों तक प्रदेश में कहीं भी भारी वर्षा की संभावना नहीं है। हालांकि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद मानसून एक बार फिर जोर पकड़ सकता है और कई जिलों में अच्छी बारिश होने के आसार हैं।
फिलहाल सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश
लगातार कई दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होने का असर अब प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 3 अगस्त तक मध्य प्रदेश में औसतन 404.2 मिमी (15.9 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य तौर पर 482 मिमी (19 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 16 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई अच्छी बारिश के बावजूद जून और जुलाई की शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी। यदि अगस्त के पहले और दूसरे सप्ताह में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो यह कमी और बढ़ सकती है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक बारिश का अभाव
MP के पूर्वी हिस्सों में मानसून सबसे अधिक कमजोर रहा है। जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग के लगभग सभी जिले सामान्य वर्षा से पीछे चल रहे हैं। इन क्षेत्रों में औसतन 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडोरी, कटनी, रीवा, सतना और आसपास के जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। कई जिलों में बारिश की कमी 1 प्रतिशत से लेकर 42 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। इससे खेती-किसानी पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए इस समय पर्याप्त वर्षा बेहद जरूरी मानी जाती है।
पश्चिमी हिस्सों में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं
हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन पूरे क्षेत्र की स्थिति अभी भी सामान्य नहीं कही जा सकती। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
भोपाल, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, धार, मंदसौर, उज्जैन, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिले अब भी अपने सामान्य बारिश के आंकड़ों से पीछे हैं। वहीं दूसरी ओर बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
खरगोन जिले में लगातार हुई बारिश का असर जलाशयों पर भी दिखाई दिया है। यहां स्थित देजला-देवाड़ा जलाशय पूरी तरह भर चुका है और अतिरिक्त पानी स्पिलवे के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों में जल संसाधनों की स्थिति मजबूत हुई है।
तीन मौसमीय सिस्टम सक्रिय, लेकिन असर सीमित
मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में मध्य भारत के आसपास दो चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और एक मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough) सक्रिय हैं। इसके बावजूद इन प्रणालियों का सीधा प्रभाव फिलहाल मध्य प्रदेश पर नहीं पड़ रहा है। इसी कारण अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छाए रहने या हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।
कुछ जिलों में दिन के समय धूप भी निकली, जबकि कहीं-कहीं हल्की फुहारें दर्ज की गईं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन मौजूदा सिस्टमों की तुलना में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण रहेगा, जो 6 अगस्त से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव ला सकता है।
6 अगस्त से फिर सक्रिय होगा मानसून
मौसम विभाग का अनुमान है कि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। इसके प्रभाव से कई जिलों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। यदि यह सिस्टम अपेक्षित रूप से सक्रिय रहता है तो प्रदेश में चल रही वर्षा की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त का पहला पखवाड़ा इस बार मानसून के लिए बेहद अहम रहेगा। इसी दौरान होने वाली बारिश यह तय करेगी कि प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य स्तर के करीब पहुंच पाएगी या नहीं।
जून और जुलाई की कमी का असर अगस्त पर
इस वर्ष मानसून सीजन की शुरुआत भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। जून महीने में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद जुलाई में भी वर्षा सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी।
यही वजह है कि अगस्त के पहले सप्ताह तक प्रदेश में कुल वर्षा का घाटा बढ़कर 16 प्रतिशत पहुंच गया है। यदि आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहता है तो किसानों और जल संसाधनों दोनों के लिए राहत की स्थिति बन सकती है।
किसानों और जलाशयों की नजर अगस्त की बारिश पर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए अगस्त में नियमित और पर्याप्त बारिश बेहद आवश्यक है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिलेगा। वहीं जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा।
फिलहाल प्रदेशवासियों की निगाहें 6 अगस्त से शुरू होने वाले नए बारिश के दौर पर टिकी हैं। मौसम विभाग का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मानसून दोबारा सक्रिय होगा और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
