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Lucknow LDA Bribery: लखनऊ में LDA के JE समेत तीन लोग 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

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Published On: 3 August 2026
Lucknow LDA Bribery Case: Uttar Pradesh Vigilance officials arrest an LDA Junior Engineer, a supervisor, and a middleman after allegedly accepting a ₹7.5 lakh bribe during a trap operation at the Lucknow Development Authority office
— Lucknow LDA Bribery Case: Uttar Pradesh Vigilance officials arrest an LDA Junior Engineer, a supervisor, and a middleman after allegedly accepting a ₹7.5 lakh bribe during a trap operation at the Lucknow Development Authority office

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Lucknow LDA Bribery: लखनऊ में LDA के JE समेत तीन लोग 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के एक जूनियर इंजीनियर (JE), एक सुपरवाइजर और एक कथित बिचौलिए को 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई गोमतीनगर स्थित LDA कार्यालय में की गई, जहां विजिलेंस टीम ने पहले से तैयार रणनीति के तहत ट्रैप बिछाकर आरोपियों को पकड़ा। इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश तथा श्रवण कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, तीनों पर आरोप है कि उन्होंने एक निर्माणाधीन मकान के मामले में कार्रवाई का भय दिखाकर शिकायतकर्ता से पहले 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के दौरान यह रकम घटाकर 7.50 लाख रुपये कर दी गई।

शिकायत के बाद विजिलेंस ने शुरू की गोपनीय जांच

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के लखनऊ सेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि LDA के अधिकारियों द्वारा उसके निर्माणाधीन भवन को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और कार्रवाई से बचाने के नाम पर भारी रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू की। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, बातचीत और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया रिश्वत मांगे जाने के आरोप सही पाए गए, जिसके बाद विजिलेंस ने ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की।

IGRS पोर्टल की शिकायत का हवाला देकर बनाया दबाव

शिकायतकर्ता के अनुसार, LDA के जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि भवन के संबंध में IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल पर शिकायत दर्ज हुई है। इसी आधार पर निर्माण कार्य रोकने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

इसके बाद शिकायतकर्ता को गोमतीनगर स्थित LDA कार्यालय बुलाया गया, जहां अधिकारियों ने कथित रूप से कहा कि यदि वह कार्रवाई से बचना चाहता है तो उसे मोटी रकम देनी होगी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकारी नियमों का भय दिखाकर रिश्वत मांगने का पूरा प्रयास किया गया।

पहले मांगे गए 15 लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, LDA कार्यालय में हुई बातचीत के दौरान जूनियर इंजीनियर और सुपरवाइजर ने मिलकर शिकायतकर्ता से 15 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। अधिकारियों ने कथित रूप से कहा कि यदि रकम नहीं दी गई तो निर्माणाधीन भवन पर कार्रवाई की जाएगी और मामला कानूनी विवाद में फंस सकता है।

शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद आरोपियों ने कथित रूप से आपसी बातचीत के बाद रिश्वत की राशि घटाकर 7.50 लाख रुपये कर दी। यही वह बिंदु था जहां शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया और विजिलेंस से संपर्क किया।

विजिलेंस ने तैयार किया ट्रैप ऑपरेशन

प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस टीम ने पूरी योजना के साथ ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह तय समय पर रिश्वत की राशि लेकर LDA कार्यालय पहुंचे।

निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता 7.50 लाख रुपये लेकर कार्यालय पहुंचा। जैसे ही आरोपियों ने रकम अपने कब्जे में ली, पहले से मौके पर मौजूद विजिलेंस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान रिश्वत के पूरे 7.50 लाख रुपये भी बरामद कर लिए गए। विजिलेंस टीम ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

मौके पर मचा हड़कंप

LDA कार्यालय में विजिलेंस की अचानक हुई कार्रवाई से कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया, जिससे आरोपियों को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका नहीं मिला।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बाद में विजिलेंस टीम आरोपियों को अपने साथ लेकर रवाना हो गई।

JE और सुपरवाइजर तत्काल प्रभाव से निलंबित

मामले की जानकारी मिलते ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

विजिलेंस अधिकारियों ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे।

जांच एजेंसियां आरोपियों की भूमिका, उनके बीच हुए आर्थिक लेनदेन और रिश्वत मांगने के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

IGRS प्रणाली का दुरुपयोग करने के आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने IGRS पोर्टल पर दर्ज शिकायत का हवाला देकर शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने का प्रयास किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग लोगों से अवैध वसूली के लिए किया जाता है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाएंगी कि संबंधित शिकायत वास्तविक थी या केवल दबाव बनाने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि विजिलेंस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। आम नागरिक यदि साहस के साथ शिकायत दर्ज कराते हैं और जांच एजेंसियों का सहयोग करते हैं, तो भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई संभव है।

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में विजिलेंस द्वारा कई ऐसे ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं, जिनमें विभिन्न विभागों के अधिकारी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए हैं। इससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

विजिलेंस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि रिश्वत मांगने का यह कोई संगठित तंत्र था, तो अन्य संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, विभागीय जांच पूरी होने के बाद LDA प्रशासन सेवा नियमों के तहत अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करेगा।

निष्कर्ष

लखनऊ विकास प्राधिकरण में सामने आया यह रिश्वत कांड सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। शिकायतकर्ता की सतर्कता और विजिलेंस की योजनाबद्ध कार्रवाई के कारण तीनों आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा होगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

 

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