Ujjain News: सावन के पहले सोमवार पर बाबा महाकाल की भस्म आरती में उमड़ी अपार श्रद्धा, तड़के 2:30 बजे खुले मंदिर के पट
Ujjain News: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है और इस माह के पहले सोमवार का महत्व विशेष रूप से अधिक होता है। इसी अवसर पर सोमवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर आयोजित इस विशेष आरती में देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। जैसे ही प्रातः 2:30 बजे मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।
श्रावण के पहले सोमवार पर महाकाल मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार भी भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। कई भक्त रातभर जागकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे ताकि उन्हें भस्म आरती के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।
परंपरा के अनुसार खुले मंदिर के पट
Ujjain श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रातः 2:30 बजे परंपरानुसार वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से अभिषेक किया गया। इस दौरान गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
अभिषेक के बाद भगवान को ‘हरि ओम’ का पवित्र जल अर्पित किया गया और प्रथम घंटा बजाकर विशेष पूजा आरंभ हुई। इसके पश्चात मंदिर के पुजारियों ने भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद बाबा को नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिससे उनका दिव्य स्वरूप और भी मनमोहक दिखाई दिया।
Ujjain भस्म आरती का अलौकिक दृश्य
महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल भस्म आरती का विशेष महत्व है। पूजा-अर्चना और श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। ढोल-नगाड़ों, झांझ, मंजीरों और शंखध्वनि के बीच संपन्न हुई यह आरती श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय क्षण बन गई।
मंदिर में मौजूद हजारों भक्तों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस दिव्य अनुष्ठान के दर्शन किए। भस्म आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया और हर ओर भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
विशेष श्रृंगार ने बढ़ाई भव्यता
श्रावण के पहले सोमवार पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर भगवान को ड्राय फ्रूट की सुंदर माला पहनाई गई। इसके साथ ही ताजे फूलों, आकर्षक आभूषणों और नवीन मुकुट से उनका अलौकिक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद जब श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए तो पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा।
श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन के पहले सोमवार को बाबा महाकाल के इस विशेष स्वरूप के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं, जहां प्रतिदिन भस्म आरती की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
श्रावण मास में इस आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है। शिवभक्तों का विश्वास है कि इस पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना और भस्म आरती के दर्शन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष सावन के दौरान लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। दर्शन के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी। स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंदिर परिसर में चिकित्सा सुविधा, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गईं ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन लगातार भीड़ की निगरानी करता रहा और दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्वक संचालित होती रही।
आस्था का अद्भुत संगम
भोर होते-होते पूरा महाकाल मंदिर शिवभक्ति के रंग में रंग चुका था। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और जयघोष की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।
श्रावण के पहले सोमवार पर उमड़ी भक्तों की अपार भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था अटूट है। भक्तों का विश्वास है कि इस पावन अवसर पर महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इसी विश्वास और श्रद्धा के साथ हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित की और उनके आशीर्वाद के साथ अपने दिन की शुरुआत की।
