नागदा चातुर्मास 2026 में महासति सरोज श्रीजी ने धर्मसभा में कहा कि मन में उतारा ज्ञान ही जीवन के काम आता है। आगम वाचन, गुरु आज्ञा, तपस्या और संस्कारों पर दिया प्रेरक संदेश।
नागदा चातुर्मास 2026: मन में उतारा ज्ञान ही जीवन के काम आता है – महासति सरोज श्रीजी
रिपोर्टर: जीवनलाल जैन | नागदा
नागदा चातुर्मास 2026 में तपस्या का वातावरण
नागदा चातुर्मास 2026 के दौरान महावीर भवन में धार्मिक गतिविधियां और तपस्या का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। मीडिया प्रभारी नितिन बुड़ावनवाला ने बताया कि चातुर्मास प्रारंभ होते ही विभिन्न तपस्वियों की आराधना शुरू हो चुकी है।
श्रीमती हंसा दिलीप कोठेड़ का सातवां उपवास जारी है, जबकि हर्ष तरवेचा ने तीन उपवास पूर्ण किए। वहीं संदीप कोलन की तेला लड़ी भी प्रारंभ हो गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन धर्मसभा में पहुंचकर प्रवचन का लाभ ले रहे हैं।
महासति सरोज श्रीजी ने दिया प्रेरक संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासति सरोज श्रीजी ने कहा कि मन में उतारा ज्ञान ही जीवन के काम आता है। केवल पुस्तकों में रखा ज्ञान व्यक्ति का कल्याण नहीं करता, बल्कि उसे जीवन में अपनाना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गुरु की आज्ञा से करनी चाहिए। सामायिक, स्वाध्याय और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में गुरु वंदना का विशेष महत्व है। वर्तमान समय में साधना के दौरान मंत्रों का सही उच्चारण भी आवश्यक है।
आगम वाचन का महत्व
महासति सरोज श्रीजी ने कहा कि जैन धर्म में आगम का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। आगम का नियमित वाचन आत्मा की चेतना को जागृत करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।उन्होंने सभी समाजजनों से आग्रह किया कि प्रत्येक घर में आगम ग्रंथ अवश्य होना चाहिए। चाहे कोई भी पंथ या संप्रदाय हो, सभी को आगम वाचन करना चाहिए क्योंकि इससे श्रद्धा, समर्पण और आत्मबल में वृद्धि होती है।
सामाजिक परंपराओं पर जताई चिंता
प्रवचन के दौरान महासति सरोज श्रीजी ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में दिखावा और प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।शादी-ब्याह में डीजे, कॉकटेल, मॉकटेल, महिला डांस, हल्दी-मेहंदी जैसे आयोजनों पर अत्यधिक खर्च किया जा रहा है, जिसे सामान्य परिवार वहन नहीं कर सकते। बड़ी पार्टियों में मदिरा सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति भी समाज के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि यदि इन परंपराओं में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी को संस्कार देना कठिन हो जाएगा।
धर्मपाल शिक्षकों का सम्मान
धर्मसभा में लगभग दस धर्मपाल शिक्षक उपस्थित रहे। ये शिक्षक छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक जैन संस्कृति एवं धार्मिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।कार्यक्रम का संचालन एवं आतिथ्य सत्कार का लाभ दिलीप पार्थ कांठेड़ द्वारा लिया गया। बाहर से आए श्रद्धालुओं की व्यवस्था कंचन अतिथि भवन में की गई, जहां उनका स्वागत एवं सत्कार किया जा रहा है।
निष्कर्ष
नागदा चातुर्मास 2026 केवल तपस्या और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को संस्कार, ज्ञान और आध्यात्मिक जीवन की दिशा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। महासति सरोज श्रीजी का संदेश स्पष्ट है कि वास्तविक ज्ञान वही है जिसे जीवन में उतारा जाए। गुरु आज्ञा, आगम वाचन और संस्कारित जीवन ही समाज को मजबूत आधार प्रदान कर सकते हैं।
