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काशी से सागर पहुंची समरसता संकल्प कलश यात्रा का भव्य स्वागत: गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर श्रद्धा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम

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Published On: 1 August 2026
Flower shower and devotional celebrations mark the arrival of the Guru Ravidas Samrasta Sankalp Kalash Yatra in Sagar, Madhya Pradesh
— Flower shower and devotional celebrations mark the arrival of the Guru Ravidas Samrasta Sankalp Kalash Yatra in Sagar, Madhya Pradesh

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काशी से सागर पहुंची समरसता संकल्प कलश यात्रा का भव्य स्वागत: गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर श्रद्धा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम

संवाददाता: सोनू कुशवाहा
सागर।
संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश में सामाजिक समरसता और संत परंपरा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही “श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान” की पावन कलश यात्रा का शनिवार को सागर जिले में ऐतिहासिक स्वागत किया गया। काशी (वाराणसी) की पावन जन्मभूमि से पवित्र जल, पावन माटी और समरसता संकल्प कलश लेकर निकली इस यात्रा के सागर पहुंचते ही श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।

नरयावली विधानसभा क्षेत्र के बड़तूमा स्थित संत रविदास स्मारक पर यात्रा का भव्य अभिनंदन किया गया। यात्रा के स्वागत में जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों, संत समाज, सामाजिक संगठनों, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संत रविदास जी के समरसता संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर चल रहा विशेष समरसता अभियान

देशभर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती को विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश द्वारा “श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान” संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संत रविदास जी के समानता, सामाजिक न्याय, भाईचारे और समरस समाज के संदेश को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना है।

इस अभियान के अंतर्गत काशी स्थित गुरु रविदास जी की जन्मस्थली से पवित्र जल, पावन मिट्टी और समरसता संकल्प कलश लेकर प्रदेशभर में यात्रा निकाली जा रही है। यह यात्रा विभिन्न जिलों से होकर गुजरते हुए लोगों को सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और संत परंपरा के मूल्यों से जोड़ रही है।

सागर में प्रवेश पर हुआ ऐतिहासिक स्वागत

शनिवार को जैसे ही समरसता संकल्प कलश यात्रा ने सागर जिले की सीमा में प्रवेश किया, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

नरयावली विधानसभा क्षेत्र के बड़तूमा स्थित संत रविदास स्मारक को विशेष रूप से सजाया गया था। यहां यात्रा के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग पहले से ही उपस्थित थे। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भजन-कीर्तन के बीच यात्रा का स्वागत किया गया।

श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर समरसता संकल्प कलश का अभिनंदन किया। पूरा परिसर संत रविदास जी के जयघोष, वंदन गीतों और भारत माता के नारों से गूंज उठा। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत नजर आया।

विधायक प्रदीप लारिया सहित जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत

समरसता संकल्प कलश यात्रा के स्वागत समारोह में नरयावली विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंजी. प्रदीप लारिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं समरसता संकल्प अभियान के संयोजक सुमेर सिंह सोलंकी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने संत रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर समाज में समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

संत समाज और मातृशक्ति की रही विशेष सहभागिता

यात्रा के स्वागत में संत समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के संतों ने यात्रा का स्वागत करते हुए गुरु रविदास जी के जीवन और उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मातृशक्ति की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मंगल गीत गाए, आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

युवाओं और बच्चों ने भी हाथों में तिरंगा एवं स्वागत बैनर लेकर यात्रा का अभिनंदन किया, जिससे पूरा कार्यक्रम सामाजिक समरसता के उत्सव में परिवर्तित हो गया।

संत रविदास जी का संदेश आज भी प्रासंगिक

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी भारतीय संत परंपरा के ऐसे महान संत थे, जिन्होंने समाज को जाति, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता का संदेश दिया।

उन्होंने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से समानता, सेवा, प्रेम, सद्भाव और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत किया। उनके विचार आज भी समाज को एकजुट करने और सामाजिक समरसता स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं।

यात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु रविदास जी का संदेश केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है।

जयघोष और वंदन गीतों से गूंजा पूरा क्षेत्र

समरसता संकल्प कलश यात्रा के स्वागत के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया।

श्रद्धालुओं ने “जय गुरु रविदास”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के जयघोष लगाए। विभिन्न अखाड़ों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत वंदन गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराया।

सामाजिक समरसता का दिया संदेश

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता और समरसता में निहित है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने सदियों पहले जिस समरस समाज की कल्पना की थी, आज उसी विचार को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता का अभियान भी है, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ना है।

इन मार्गों से होकर आगे बढ़ी कलश यात्रा

बड़तूमा में स्वागत के बाद समरसता संकल्प कलश यात्रा अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ी।

यात्रा बड़तूमा, मकरोनिया चौराहा, रजाखेड़ी चौराहा, सदर-अंबेडकर चौराहा, भगवानगंज स्थित संत रविदास मंदिर, सीहोरा और राहतगढ़ होते हुए आगे विदिशा और रायसेन के रास्ते भोपाल के लिए रवाना हुई।

यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत की तैयारियां की गई थीं। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने यात्रा का अभिनंदन किया।

यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, सामाजिक भी

समरसता संकल्प कलश यात्रा का मुख्य उद्देश्य संत रविदास जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है।

आयोजकों का कहना है कि समाज में आपसी सद्भाव, समान अवसर, सामाजिक न्याय और भाईचारे की भावना को मजबूत करना इस अभियान की प्राथमिकता है।

यात्रा के माध्यम से युवाओं को भारतीय संत परंपरा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

श्रद्धा और एकता का बना प्रेरक संदेश

सागर में समरसता संकल्प कलश यात्रा का स्वागत केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बना।

जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ विभिन्न वर्गों के लोगों ने इस यात्रा में भागीदारी निभाई, उसने यह संदेश दिया कि संतों की शिक्षाएं आज भी समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने की क्षमता रखती हैं।

गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर निकली यह यात्रा प्रदेशभर में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

 

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