काबरवा गौशाला में बदहाल व्यवस्थाओं का खुलासा: शिवसेना ने मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण, बीमार व घायल गौवंश को लेकर प्रशासन से जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट: नरेन्द्र सिरवी
स्थान: गंधवानी (धार)
काबरवा गौशाला की स्थिति पर उठे गंभीर सवाल
धार जिले की गंधवानी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत काबरवा स्थित गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गौशाला में चारा, स्वच्छ पेयजल, उपचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव की शिकायतें सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों एवं ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लापरवाही और पर्याप्त देखभाल नहीं होने के कारण कई गौवंश कुपोषण एवं बीमारी का शिकार हो गए हैं, जबकि कुछ गौमाताओं की मौत होने की भी बात सामने आई है।
इन शिकायतों के बाद शिवसेना गंधवानी इकाई के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और गौशाला का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं ने गौशाला की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
शिवसेना के नेतृत्व में निरीक्षण दल ने किया गौशाला का दौरा
शिवसेना गंधवानी तहसील प्रमुख दीप सिंह बरनाला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल काबरवा गौशाला पहुंचा। निरीक्षण के दौरान गौवंश की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया गया। कार्यकर्ताओं ने बीमार एवं घायल गौवंश को देखकर चिंता व्यक्त की और कहा कि यदि समय रहते उचित उपचार एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
निरीक्षण दल में जय जैन, मनीष गहलोत, दीपक चौहान, यशवंत खराड़ी, रोहित चौहान, रौनक यादव, जितेन सोलंकी, बबलू प्रजापत तथा अजय प्रजापत सहित अनेक शिवसेना कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने गौशाला की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
गौशाला में मौजूद गौवंश की संख्या
निरीक्षण के दौरान शिवसेना कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में गौशाला में लगभग 44 गाय एवं 6 बछड़े मौजूद हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतनी संख्या में गौवंश होने के बावजूद उनके रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
उनका आरोप है कि गौवंश के लिए पर्याप्त चारे, स्वच्छ पेयजल और नियमित पशु चिकित्सकीय सेवाओं का अभाव स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे कई पशु कमजोर एवं बीमार दिखाई दिए।
बीमार और घायल गौवंश को देखकर जताई चिंता
निरीक्षण के दौरान कई गौवंश घायल एवं कमजोर अवस्था में दिखाई दिए। शिवसेना पदाधिकारियों ने कहा कि पशुओं के शरीर पर चोट के निशान और उनकी शारीरिक स्थिति इस बात का संकेत देती है कि उन्हें समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल पा रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि गौवंश की देखभाल में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण कई पशुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उनका मानना है कि यदि समय पर उपचार और पोषण उपलब्ध कराया जाए तो कई पशुओं की जान बचाई जा सकती है।
चारा और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों एवं निरीक्षण दल ने आरोप लगाया कि गौशाला में चारे की नियमित एवं पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि कई गौवंश कमजोर दिखाई दिए, जिससे कुपोषण की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इसके अलावा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पशुओं के लिए हर समय साफ पानी उपलब्ध होना आवश्यक है, लेकिन मौके पर ऐसी व्यवस्था पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दी।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि गौशाला की सुरक्षा के लिए चारों ओर केवल तार फेंसिंग की गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतनी बड़ी गौशाला के लिए केवल तार की घेराबंदी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
उनका कहना है कि गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एवं स्थायी पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि बाहरी जानवरों और असामाजिक गतिविधियों से गौवंश को सुरक्षित रखा जा सके।
आवारा श्वानों के हमले का आरोप
शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गौशाला की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के कारण आवारा श्वान अंदर प्रवेश कर जाते हैं और घायल एवं कमजोर गौवंश पर हमला करते हैं।
उनका कहना है कि कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पहले से घायल या कमजोर पशुओं को आवारा कुत्तों ने और अधिक नुकसान पहुंचाया। यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।
ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
निरीक्षण के बाद कार्यकर्ताओं ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि गौशाला के संचालन एवं रखरखाव में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते गौशाला की नियमित निगरानी, पशु चिकित्सा, चारे की व्यवस्था और सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
हालांकि, इस संबंध में ग्राम पंचायत अथवा संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
शिवसेना पदाधिकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति सामने लाकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
इन व्यवस्थाओं को तत्काल सुधारने की मांग
निरीक्षण के बाद कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- गौशाला में पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण चारे की व्यवस्था।
- स्वच्छ एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
- बीमार एवं घायल गौवंश का तत्काल पशु चिकित्सकीय उपचार।
- नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण।
- गौशाला की चारदीवारी के रूप में पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण।
- सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
- गौशाला की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाए।
गौसंरक्षण को लेकर प्रभावी कदम उठाने की अपील
शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कहा कि गौशाला केवल पशुओं को रखने का स्थान नहीं बल्कि गौसंरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाला केंद्र है। यदि यहां मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो गौवंश का संरक्षण संभव नहीं हो सकेगा।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तत्काल आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों ने भी जताई चिंता
स्थानीय ग्रामीणों ने भी गौशाला की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि गौवंश भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि गौशाला की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण कराया जाए और आवश्यक बजट एवं संसाधन उपलब्ध कराकर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाए।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद
काबरवा गौशाला का मामला सामने आने के बाद अब क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो गौवंश की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा और गौशाला में चारा, पानी, उपचार, सुरक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
