Indore के मेजर हमजा आरिफ की जैसलमेर हादसे में मौत, बेटे को याद कर बेसुध हुई मां, रविवार को होगा अंतिम संस्कार
Indore के राजेंद्र नगर इलाके में इन दिनों गम का माहौल है। भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ की जैसलमेर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में मौत के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। बेटे की मौत की खबर सुनते ही उनकी मां रिहाना बेसुध हो गईं और बार-बार अपने बेटे को पुकार रही हैं। वहीं, 83 वर्षीय पिता फकरूद्दीन हमजा भी अपने होनहार बेटे को याद कर भावुक हो रहे हैं।
मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर शनिवार को सड़क मार्ग से इंदौर लाया जा रहा है। हवाई सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण सेना ने सड़क के रास्ते पार्थिव शरीर को उनके गृह नगर भेजने की व्यवस्था की है। परिवार और सेना के अधिकारी अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि रविवार को इंदौर में मेजर हमजा आरिफ को पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
जैसलमेर में ड्यूटी से लौटते समय हुआ हादसा
मेजर हमजा आरिफ की मौत राजस्थान के जैसलमेर में हुए एक दर्दनाक हादसे में हुई। घटना गुरुवार देर रात की बताई जा रही है। जैसलमेर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर थईयात आर्मी स्टेशन क्षेत्र में यह हादसा हुआ।
जानकारी के अनुसार, मेजर हमजा आरिफ अपने दो साथी अधिकारियों आयुष्मान और अभिनव राठौड़ के साथ ड्यूटी पूरी कर आर्मी स्टेशन लौट रहे थे। रात करीब 12:30 बजे उनकी एसयूवी के सामने अचानक एक ऊंट आ गया। वाहन की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक उसे नियंत्रित नहीं कर पाया और एसयूवी की ऊंट से जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि एसयूवी कई बार पलट गई और करीब 100 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस, सेना पुलिस और सैन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तीनों घायलों को आर्मी अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान मेजर हमजा आरिफ ने दम तोड़ दिया। वहीं, उनके दोनों साथी अधिकारियों का इलाज जारी है।
बचपन से था सेना में जाने का सपना
मेजर हमजा आरिफ के पिता फकरूद्दीन हमजा ने नम आंखों से बेटे के जीवन से जुड़ी कई बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि हमजा बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की और फिर सेना में जाने के लिए परीक्षा पास की।
हमजा पिछले करीब 10 वर्षों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। लगभग ढाई साल पहले उन्हें मेजर पद पर पदोन्नति मिली थी। इससे पहले उन्होंने जम्मू समेत कई स्थानों पर अपनी सेवाएं दी थीं।
परिवार के अनुसार, हमजा अपने कर्तव्य के प्रति बेहद समर्पित थे और देश सेवा को सबसे बड़ा उद्देश्य मानते थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
मां बार-बार कर रही बेटे को याद
मेजर हमजा की मौत की खबर जैसे ही इंदौर पहुंची, राजेंद्र नगर स्थित उनके घर पर लोगों का जमावड़ा लग गया। परिवार के सदस्य इस दुख को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
मां रिहाना बेटे को याद कर बार-बार उसे पुकार रही हैं। परिवार के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जिस बेटे ने देश की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया, वह अब उनके बीच नहीं है।
रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाया और मेजर हमजा के योगदान को याद किया। लोगों का कहना है कि हमजा ने अपने कार्यों से परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन किया।
सेना अधिकारियों ने परिवार से किया संपर्क
हादसे के बाद जैसलमेर सैन्य मुख्यालय के अधिकारी लगातार मेजर हमजा के परिवार के संपर्क में हैं। सेना अधिकारियों ने उनके पिता से फोन पर बातचीत कर घटना की जानकारी दी और अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं के बारे में बताया।
चूंकि जैसलमेर में हवाई सेवा बंद है, इसलिए मेजर के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से इंदौर लाया जा रहा है। सेना की ओर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई की तैयारी की जा रही है।
Indore में होगी अंतिम विदाई
मेजर हमजा आरिफ का अंतिम संस्कार रविवार को इंदौर में किया जाएगा। इस दौरान सेना के अधिकारी, परिवार के सदस्य और शहर के लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।
मेजर हमजा आरिफ की शहादत ने पूरे इंदौर को दुखी कर दिया है। देश सेवा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। परिवार ने अपने बेटे को खोया है, लेकिन उनकी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
